ऐतिहासिक और अद्वितीय: समाजसेवी हीराभाई पुरोहित की अनूठी पहल ने रचा नया कीर्तिमान, जन-सैलाब ने देर रात तक लिया आध्यात्मिक आनंद
रानीवाड़ा/गोलवाड़ा: कहते हैं जब नियत साफ हो और संकल्प जनकल्याण का हो, तो विधाता स्वयं उस कार्य में अपनी शक्ति फूंक देते हैं। रानीवाड़ा के गोलवाड़ा की धरा पर गुरुवार की रात कुछ ऐसा ही अलौकिक दृश्य देखने को मिला, जिसे देख वृद्ध जन भी कह उठे— "ना भूतो ना भविष्यति"। यह केवल एक भजन संध्या नहीं, बल्कि भक्ति, समर्पण और सामाजिक समरसता का एक ऐसा ऐतिहासिक दस्तावेज था, जो स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो गया।
आध्यात्मिक शिखर: संतों का सान्निध्य
जब परम पूज्य बाल संत कृपाराम महाराज और उनके गुरु ब्रह्मर्षि संत राजाराम महाराज का पावन पदार्पण हुआ, तो समूचा वातावरण शंखध्वनि और पुष्पवर्षा से गुंजायमान हो उठा। संत कृपाराम महाराज, जिनकी ओजस्वी वाणी ने देश-दुनिया में सनातन का परचम लहराया है और जिनके मार्गदर्शन में दिवंगत प्रेम बाईसा जैसी महान विभूतियों ने कथा वाचन की दीक्षा लेकर समाज को नई दिशा दी, उनके मुखारविंद से निकले शब्दों ने श्रद्धालुओं के अंतर्मन को तृप्त कर दिया।

हीराभाई पुरोहित: 36 कौम के लाडले और सेवा के पर्याय
इस भव्य अनुष्ठान के केंद्र बिंदु रहे युवा समाजसेवी हीराभाई (सुपुत्र रगाजी पुरोहित)। हीराभाई की मिलनसारिता और निस्वार्थ सेवा भाव का ही प्रताप है कि उनके एक आह्वान पर जन-सैलाब उमड़ पड़ा। समाज के हर वर्ग और 36 कौम के दिलों में अपनी खास जगह बनाने वाले हीराभाई ने इस आयोजन के माध्यम से यह सिद्ध कर दिया कि धार्मिक आयोजन केवल परंपरा नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने का एक सशक्त माध्यम है। उनकी देखरेख में उनके भाई हरिराम और हंजारी भाई की अतिथि सत्कार की जो मिसाल पेश की गई, उसकी चर्चा पूरे क्षेत्र में हो रही है।

भक्ति की सरिता: श्याम पालीवाल का स्वर-जादू
सुप्रसिद्ध भजन सम्राट श्याम पालीवाल ने जब अपनी स्वर लहरियां बिखेरीं, तो पंडाल में मौजूद हजारों भक्त सुध-बुध खो बैठे। देवी अम्बे और मोमाजी महाराज की वंदना से शुरू हुआ सिलसिला देर रात तक चलता रहा। रमेश पुरोहित एंड टोली के भक्तिमय नृत्य ने कार्यक्रम में चार चाँद लगा दिए। रोशनी से नहाया गोलवाड़ा गांव ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो साक्षात इंद्रपुरी धरती पर उतर आई हो।

गरिमामयी उपस्थिति
इस पुनीत अवसर पर नरपत केराजी (ख़ास मेहमान) सहित ग्राम सेवा सहकारी समिति रानीवाडा के चेयरमैन गुमान सिंह राव सहित सूरजवाड़ा सरपंच कृष्ण पुरोहित, वचनसिंह गोलवाड़ा, जबरसिंह जेतपुरा, कालूभाई डूंगरी, रमेश प्रागजी, तनुसिंह देवड़ा, बाबूलाल रोडा, हरचंद देवासी, वागाराम वाडोल और वचनाराम देवासी जैसे प्रबुद्ध जनों ने शिरकत कर आयोजन की शोभा बढ़ाई।







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