– लैब जांच में घटिया गुणवत्ता और नियमों के उल्लंघन की पुष्टि के बाद सरकार का बड़ा एक्शन
– होटल, रेस्टोरेंट और डेयरी संचालकों को सिर्फ असली डेयरी उत्पादों के इस्तेमाल की सख्त निर्देश
अहमदाबाद:
जनस्वास्थ्य को सर्वोपरि रखते हुए गुजरात सरकार ने एक कड़ा कदम उठाते हुए राज्य में एनालॉग (नकली) पनीर, चीज और बटर के उत्पादन, भंडारण, बिक्री और परिवहन पर तत्काल प्रभाव से पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है। विभिन्न इलाकों से लिए गए खाद्य नमूनों की प्रयोगशाला जांच में यह स्पष्ट हुआ कि ये उत्पाद लोगों की सेहत के साथ गंभीर खिलवाड़ कर रहे थे। गुजरात के बाद अब महाराष्ट्र में भी एनालॉग उत्पादों पर रोक लगा दी गई है, जिसे देशहित में एक बड़ी और सकारात्मक पहल माना जा रहा है।
क्यों उठाया गया यह कड़ा कदम?
राज्य के फूड एंड ड्रग्स विभाग द्वारा प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से खाद्य पदार्थों के नमूने एकत्र किए गए थे। जब इनकी प्रयोगशाला में वैज्ञानिक जांच की गई, तो बड़े पैमाने पर नियमों का उल्लंघन और घटिया सामग्री का इस्तेमाल सामने आया।
इस अभियान के तहत 25 विशेष वैन को जमीन के अंदर (अंडरग्राउंड) और मैदानी स्तर पर उतारकर विभिन्न प्रकार के ऑन-स्पॉट परीक्षण किए गए, जिसके बाद इन नकली उत्पादों की असलियत सामने आई।
सरकार की दो टूक: नियम तोड़ा तो होगी सख्त कार्रवाई
स्वास्थ्य मंत्री प्रफूल पानसेरिए ने इस प्रतिबंध के संबंध में जानकारी देते हुए स्पष्ट किया कि सरकार के इस आदेश के बाद अब राज्य का कोई भी होटल, रेस्टोरेंट, डेयरी पार्लर, सुपर मार्केट या व्यापारी एनालॉग पनीर, चीज और बटर का उत्पादन, बिक्री या एक जगह से दूसरी जगह परिवहन नहीं कर पाएगा।
यदि कोई भी व्यक्ति या संस्थान इस नियम का उल्लंघन करता पाया जाता है, तो उसके खिलाफ तुरंत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा, सभी खाद्य कारोबारियों (FBOs), केटरर्स और दुकानदारों को केवल मानक और असली पनीर का ही उपयोग करने की कड़ी हिदायत दी गई है।
डॉक्टरों की चेतावनी: शरीर के लिए धीमा जहर है एनालॉग उत्पाद
अहमदाबाद के सिविल अस्पताल के अधीक्षक डॉ. राकेश जोशी ने एनालॉग पनीर और चीज के बढ़ते चलन पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि एनालॉग उत्पाद प्राकृतिक नहीं होते और इनके नियमित सेवन से सेहत को भारी नुकसान पहुंच सकता है।
- तत्काल प्रभाव: इसके सेवन से गैस, उल्टी और मतली (उल्टी जैसा महसूस होना) जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
- दीर्घकालिक खतरे: लंबे समय तक ऐसे नकली उत्पादों का सेवन करने से उच्च रक्तचाप (ब्लड प्रेशर), मधुमेह (डाइबिटीज) और हृदय रोग (हार्ट डिसीज) जैसी गंभीर और जानलेवा बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
डॉ. जोशी ने बताया कि नकली पनीर में प्राकृतिक दूध से मिलने वाले जरूरी प्रोटीन, कैल्शियम और अन्य पोषक तत्वों का अभाव होता है। इसमें मौजूद खराब गुणवत्ता की वसा (फैट) शरीर के मेटाबॉलिज्म को बुरी तरह प्रभावित करती है। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग की इस कार्रवाई का स्वागत करते हुए कहा कि ऐसे कदमों से आम जनता के स्वास्थ्य में उल्लेखनीय सुधार होगा।
पूरे देश में उठ रही ऐसी सख्ती की मांग
विशेषज्ञों और आम नागरिकों का मानना है कि जिस तरह गुजरात और महाराष्ट्र ने यह सराहनीय पहल की है, उसी तर्ज पर राजस्थान सहित पूरे देश में इस तरह के हानिकारक नकली खाद्य पदार्थों पर रोक लगनी चाहिए। मिलावटखोरों के खिलाफ इस प्रकार का राष्ट्रव्यापी अभियान चलाना अब समय की सबसे बड़ी मांग बन चुका है, ताकि देश के हर नागरिक की थाली तक शुद्ध और पौष्टिक आहार ही पहुंचे।







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