ओरण की सरकारी जमीनों पर 'अवैध कब्जे' का बड़ा खेल; ग्रामीणों ने खोला मोर्चा, एसडीएम को सौंपा ज्ञापन
रानीवाड़ा। उपखंड क्षेत्र के बड़गांव और मालवाड़ा गांवों में बेशकीमती सरकारी और सार्वजनिक भूमियों पर भू-माफियाओं द्वारा अवैध कब्जे, गलत आवंटन और नियम-विरुद्ध कन्वर्जन (रूपांतरण) करने का एक बड़ा खेल सामने आया है। इस सुनियोजित खेल को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश फूट पड़ा है। अभिमन्यु सिंह धामसीन के साथ ग्रामीणों ने इस पूरे नेक्सस के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए उपखंड अधिकारी (एसडीएम) रानीवाड़ा को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपकर निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
खेल नंबर 1: 'ओरण भूमि' को कागजों में बदला, फिर काट दिए प्लॉट
ग्रामीणों द्वारा सौंपे गए शिकायती पत्र के अनुसार, ग्राम बड़गांव में स्थित खसरा संख्या 2425/1742 (जिसका पुराना खसरा संख्या 1127 है) पूर्व के राजस्व रिकॉर्ड में "ओरण भूमि" के रूप में दर्ज थी। यह भूमि पर्यावरण और सार्वजनिक महत्व की थी। आरोप है कि भू-माफियाओं ने राजस्व नियमों और भू-राजस्व कानूनों को ताक पर रखकर पहले तो इस ओरण भूमि का नियम-विरुद्ध तरीके से आवंटन करवाया। इसके बाद खेल यहीं नहीं रुका, बल्कि इस सरकारी जमीन को आबादी भूमि में कन्वर्ट (रूपांतरित) भी करवा लिया गया और भूखंडों (प्लॉटों) के रूप में आम जनता को अवैध रूप से बेचकर मोटा मुनाफा कमाया गया।

खेल नंबर 2: करोड़ों की सरकारी जमीन पर रसूखदारों का कब्जा
शिकायत में यह भी खुलासा किया गया है कि बड़गांव के ही खसरा संख्या 342 के एक खातेदार ने अपने रसूख के बल पर बेशकीमती सरकारी भूमि पर अवैध अतिक्रमण कर लिया है। इस अतिक्रमण के कारण सरकारी संपत्ति का स्वरूप पूरी तरह प्रभावित हो रहा है और सार्वजनिक संपत्ति का निजी उपयोग किया जा रहा है। ग्रामीणों ने मांग की है कि इस जमीन की राजस्व विभाग के माध्यम से निष्पक्ष पैमाइश और सीमांकन (सीमा तय करना) करवाया जाए ताकि वास्तविक स्थिति साफ हो और अतिक्रमण हटाया जा सके।

खेल नंबर 3: मालवाड़ा में सार्वजनिक भूमि पर तान दिए व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स
बड़गांव ही नहीं, बल्कि पड़ोसी ग्राम मालवाड़ा में भी भू-माफियाओं का दुस्साहस देखने को मिला है। ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि स्थानीय प्रशासन की कथित मिलीभगत से माफियाओं ने मालवाड़ा में स्थित पवित्र भूमि का भी अवैध व विधि-विरुद्ध तरीके से रूपांतरण करवा दिया। इसके बाद जमीन की खरीद-फरोख्त कर वहां व्यावसायिक निर्माण (दुकानें/कॉम्प्लेक्स) कार्य करवा दिए गए और उन्हें आगे बेच भी दिया गया। मालवाड़ा ग्राम पंचायत से सूचना के अधिकार (RTI) के तहत मिले दस्तावेजों और 14 अक्टूबर 2025 की मौका जांच रिपोर्ट से इस पूरे गड़बड़झाले की पुष्टि हो रही है, जिसे ग्रामीणों ने सबूत के तौर पर अधिकारियों को सौंपा है।
"अगर अभी नहीं जागे, तो पूरी प्रशासनिक व्यवस्था ढह जाएगी"
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि सार्वजनिक और सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे और आमजन को गुमराह कर प्लॉट-दुकानें बेचने जैसी धोखाधड़ी की घटनाओं पर यदि समय रहते प्रभावी लगाम नहीं कसी गई, तो भविष्य में अन्य सार्वजनिक भूमियों पर भी डाका पड़ेगा। इससे पूरी प्रशासनिक व्यवस्था और राजस्व कानूनों पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा।
इन धाराओं में कड़ी कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों (प्रार्थियों) जिनमें मोहन, खेमाराम, कालाराम, अर्जुन, जयेश पुरोहित, सतीश चौधरी, राजूराम, पारस कुमार, सुरखाराम, जीत जोशी, हरीश कुमार समेत बड़ी संख्या में बड़गांव के लोग शामिल हैं, उन्होंने मांग की है कि:
- बड़गांव के खसरा संख्या 2425/1742 के आवंटन और कन्वर्जन आदेशों को तुरंत निरस्त कर इसे वापस रिकॉर्ड में "ओरण भूमि" दर्ज किया जाए।
- इस पूरे महाघोटाले में संलिप्त भू-माफियाओं, संबंधित खरीदार-विक्रेताओं और यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की मिलीभगत पाई जाती है, तो उनके खिलाफ राजस्थान भू-राजस्व कानून एवं भारतीय न्याय संहिता (BNS) के प्रासंगिक प्रावधानों के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
- भविष्य में ऐसी सरकारी जमीनों पर दोबारा कब्जे न हों, इसके लिए एक स्थायी संरक्षण व्यवस्था बनाई जाए।
अब देखना यह है कि प्रशासन इस गंभीर मामले पर कितनी तेजी से एक्शन लेता है और ओरण की भूमि को भू-माफियाओं के चंगुल से कैसे मुक्त कराता है।







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