भीनमाल, जिला जालोर: अपर सत्र न्यायालय भीनमाल ने नरसींगाराम और महादेवाराम द्वारा प्रस्तुत जमानत याचिका को अस्वीकार कर दिया। न्यायाधीश राजेंद्र सहू ने अपने आदेश में उल्लेख किया कि अभियुक्तों के खिलाफ उपलब्ध साक्ष्य अपराध की गंभीरता को दर्शाते हैं, जिससे जमानत दिया जाना उचित नहीं है।
मामले की पृष्ठभूमि
परिवादिया ने भीनमाल पुलिस थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि अभियुक्तों ने उनके फोटो को एडिट कर अश्लील छवियां बनाई और उसे सोशल मीडिया पर प्रसारित किया। इसके साथ ही, आरोपितों ने उन्हें अवैध संबंध बनाने के लिए ब्लैकमेल किया, धमकी दी कि यदि उनकी मांग पूरी नहीं हुई तो वे एडिटेड तस्वीरों को और अधिक वायरल कर देंगे।

न्यायालय की टिप्पणी
न्यायालय ने अपनी टिप्पणी में कहा कि महिला सम्मान और डिजिटल सुरक्षा की दृष्टि से यह गंभीर मामला है। अभियुक्तों ने सोशल मीडिया का दुरुपयोग करते हुए महिला की छवि को धूमिल किया, जिससे पीड़िता एवं उसके परिवार को मानसिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ा।
जमानत अस्वीकार करने का आधार
अपर लोक अभियोजक और परिवादी के अधिवक्ता हेतराम बिश्नोई ने न्यायालय को सूचित किया कि आरोपितों के खिलाफ मामला आई.टी. एक्ट की धारा 67, 67 ए और भारतीय दंड संहिता की धारा 500, 501, 506, 509 के तहत दर्ज किया गया है। न्यायालय ने अपराध की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए जमानत अस्वीकार कर दी। बिश्नोई ने इस आदेश का स्वागत करते हुए कहा कि यह फैसला महिला सुरक्षा और डिजिटल अपराधों पर नकेल कसने में अहम भूमिका निभाएगा।







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