अपर जिला सेशन न्यायालय का बड़ा फैसला, अश्लील फोटो वायरल करने की धमकी और ब्लैकमेलिंग को माना आत्महत्या का मुख्य कारण
भीनमाल (जालोर)। भीनमाल के बहुचर्चित करिश्मा जैन आत्महत्या प्रकरण में अपर सेशन न्यायाधीश राजेन्द्र सहू ने कड़ा रुख अपनाते हुए मुख्य आरोपी प्रदीप ओझा की जमानत याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है । न्यायालय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे स्त्री की अस्मिता और सामाजिक विश्वास के साथ खिलवाड़ करार दिया है ।
अदालत में जोरदार बहस, परिवादी पक्ष ने रखा पक्ष
जमानत प्रार्थना पत्र पर सुनवाई के दौरान प्रार्थी/अभियुक्त की ओर से अधिवक्ताओं ने उसे निर्दोष बताते हुए जमानत का लाभ देने का निवेदन किया । वहीं, परिवादी पक्ष की ओर से एडवोकेट सत्यवान सिंह राजपुरोहित और अपर लोक अभियोजक ने जमानत का कड़ा विरोध किया। उन्होंने दलील दी कि आरोपी ने मृतका को इस कदर प्रताड़ित किया कि उसके पास मौत को गले लगाने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा था ।

क्या था पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार, मृतका करिश्मा (23) की शादी 23 नवंबर 2025 को तय थी । मेहंदी की रस्म के दिन ही 18 नवंबर 2025 को उसने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी ।
जांच और कोर्ट की टिप्पणी में सामने आए चौंकाने वाले तथ्य:
- अश्लील फोटो से ब्लैकमेलिंग: आरोपी प्रदीप ओझा ने मृतका के साथ प्रेम संबंध के दौरान कुछ अश्लील फोटो ले लिए थे । मृतका की शादी कहीं और तय होने पर आरोपी ने वे फोटो उसके होने वाले पति को भेजने और सोशल मीडिया पर वायरल करने की धमकी दी ।
- भावनात्मक शोषण: आरोपी ने मृतका को ज्योतिषीय भय, मंगल दोष और भविष्य खराब होने जैसी अंधविश्वासपूर्ण बातों से भी मानसिक रूप से प्रताड़ित किया ।
- अंतिम वॉइस मैसेज बना मुख्य सबूत: करिश्मा ने सुसाइड से ठीक पहले प्रदीप को दो वॉइस मैसेज भेजे थे । इसमें उसने साफ कहा था, "प्रदीप, आज यदि मैं मरी भी ना तो आपके कारण से मरी हूं... मेरे गले में फांसी का फंदा है, आप जिंदगी में कभी खुश नहीं रहोगे" ।

कोर्ट की सख्त टिप्पणी: "नारी सम्मान पर घातक प्रभाव"
न्यायाधीश राजेन्द्र सहू ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि यह केवल एक आत्महत्या नहीं है, बल्कि विश्वास की आड़ में एक युवती के सम्मान और मानसिक स्वतंत्रता को कुचलने का मामला है । कोर्ट ने माना कि मृतका की मौत आरोपी द्वारा किए गए लंबे मानसिक उत्पीड़न और ब्लैकमेलिंग का सीधा परिणाम है । ऐसे गंभीर अपराध में जमानत देना न्यायसंगत नहीं होगा ।







पाठक टिप्पणियां (Comments)
0 टिप्पणियां