जौहरी की परख और मिट्टी के लाल का कमाल: सरकारी स्कूल के छात्र ने भील समाज और क्षेत्र का मान बढ़ाया
कहते हैं कि प्रतिभा महलों की मोहताज नहीं होती, उसे बस तराशने वाले एक ‘जौहरी’ की दरकार होती है। राजस्थान के सुदूर ग्रामीण अंचल में, जहाँ सुविधाओं के नाम पर केवल अभावों का साम्राज्य है, वहाँ एक मासूम छात्र ने अपनी मेहनत से सफलता की ऐसी इबारत लिखी है जिसने पूरे क्षेत्र को गौरवान्वित कर दिया है। माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की दसवीं की परीक्षा में कोटड़ा के एक सरकारी स्कूल के छात्र अश्विन ने 90% अंक हासिल कर यह साबित कर दिया कि यदि हौसला बुलंद हो, तो किस्मत की लकीरें खुद-ब-खुद बदल जाती हैं।
अभावों का आंगन और सफलता की उड़ान
अश्विन की कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। पिता रेखाराम भील दिन भर बकरियां चराकर और मजदूरी करके परिवार का पालन-पोषण करते हैं। रहने के लिए पत्थरों से बना एक छोटा सा कच्चा मकान, जिसकी छत भी पूरी तरह ढकी नहीं है। जिस उम्र में बच्चे सुख-सुविधाओं की मांग करते हैं, उस उम्र में अश्विन छुट्टियों के दौरान खुद बकरियां चराने जाता था।
एक ऐसे परिवेश में जहाँ शैक्षणिक माहौल शून्य है और समाज नशे की गिरफ्त में संघर्ष कर रहा है, वहाँ बिना किसी ट्यूशन या कोचिंग के 90% नंबर लाना किसी चमत्कार से कम नहीं है। अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग से आने वाले इस बालक ने अपनी इस उपलब्धि से समाज के उन तमाम बच्चों के लिए उम्मीद की एक नई किरण जगाई है, जो गरीबी के कारण पढ़ाई छोड़ देते हैं।
शिक्षक के रूप में मिले असली ‘जौहरी’
इस सफलता के पीछे विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री गिरधारी लाल जी की विशेष भूमिका रही है। उन्होंने अश्विन के भीतर छिपी उस प्रतिभा को पहचाना और उसे सही दिशा में तराशा। ग्रामीण क्षेत्रों को ‘हीरों की खान’ कहा जाता है, लेकिन उन हीरों को निखारने का जो काम गिरधारी लाल जी और उनके स्टाफ ने किया है, वह वाकई काबिल-ए-तारीफ है। आज अश्विन भविष्य में डॉक्टर, इंजीनियर या कलेक्टर बनने का सपना देख रहा है, तो इसमें स्कूल के समर्पित शिक्षकों का बड़ा योगदान है।
“भारत की असली योग्यता आज भी गांवों की ढाणियों में बसती है, बस ज़रूरत है उन्हें सही अवसर और प्रोत्साहन देने की।”
विद्यालय का अन्य गौरवमयी परिणाम
अश्विन के साथ-साथ विद्यालय के अन्य छात्र-छात्राओं ने भी शानदार प्रदर्शन कर स्कूल का नाम रोशन किया है:
- आरती कुमारी: 89% अंकों के साथ विद्यालय में द्वितीय स्थान प्राप्त किया।
- राहुल कुमार: 82% अंक हासिल कर तृतीय स्थान पर रहे।
- सराहनीय उपलब्धि: इस वर्ष परीक्षा में शामिल हुए सभी 32 विद्यार्थी उत्तीर्ण हुए, जिनमें से 22 प्रथम श्रेणी और 10 द्वितीय श्रेणी में रहे। उपप्रधानाचार्य श्री रघुनाथ राम विश्नोई ने बताया कि कक्षा 5वीं और 8वीं का परिणाम भी शत-प्रतिशत रहा है। इस अवसर पर स्टाफ साथी श्री प्रेमा राम ,अरविंद कुमार,हेमराज,लाधू राम,आदु राम,विक्रम कुमार ,रतना राम परमार,रजनी,पुनमा राम सहित समस्त स्टाफ उपस्थित रहा।
अश्विन की यह सफलता केवल एक छात्र की जीत नहीं है, बल्कि यह उन सभी रूढ़ियों और बाधाओं की हार है जो गरीबी और पिछड़ेपन के नाम पर आगे बढ़ने से रोकती हैं। अब जिम्मेदारी समाज और सरकार की है कि इस ‘हीरे’ को आगे बढ़ने के लिए उचित माहौल और संसाधन उपलब्ध कराए जाएं।
आपकी राय: दोस्तों, क्या आपको नहीं लगता कि अश्विन जैसे बच्चों को विशेष छात्रवृत्ति और प्रोत्साहन मिलना चाहिए? नीचे कमेंट बॉक्स में अपनी राय जरूर दें और इस होनहार बालक का उत्साह बढ़ाएं। समाज के अन्य लोग भी नशे से दूर रहकर शिक्षा की इस लौ को अपने घर तक ले जाएं, तभी असली विकास संभव होगा।



