सांचौर। वन्यजीवों के प्रति अपनी अटूट आस्था और बलिदान के लिए जाने जाने वाले बिश्नोई समाज ने एक बार फिर हृदयस्पर्शी कदम उठाते हुए अनूठी मिसाल पेश की है। बिश्नोई धर्मशाला सांचौर में आयोजित समाज की महत्वपूर्ण बैठक में एक ऐतिहासिक निर्णय लिया गया, जिसके तहत धमाना में हिरण रक्षा और वन्यजीव संरक्षण के उद्देश्य से आरक्षित 10 बीघा ज़मीन को गुरुद्वारा प्रबंध कमेटी सांचौर के नाम करने पर सहमति बन गई।
नेशनल हाईवे धमाना पर स्थित यह बेशकीमती ज़मीन अब हिरणों के लिए एक सुरक्षित पर्यावास (Habitat) बनाने के साथ-साथ बिश्नोई के लिए सौहार्द का प्रतीक बनेगी। यह निर्णय न केवल वन्यजीव प्रेमियों के लिए बड़ी खबर है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि कैसे आस्था और पर्यावरण संरक्षण के मुद्दे दो अलग-अलग समुदायों को एक मंच पर ला सकते हैं।
पर्यावरण संरक्षण की नई राह
बैठक में उपस्थित समाज के वरिष्ठ सदस्यों ने बताया कि बिश्नोई समाज अपने '29 नियम' में वन्यजीवों की रक्षा को सर्वोपरि मानता है। यह भूमि हिरणों और अन्य वन्यजीवों के लिए एक सुरक्षित गलियारा (Corridor) बनाने में सहायक होगी, जिससे हाईवे पर होने वाली दुर्घटनाओं से उनका बचाव हो सकेगा। इस समझौते के साथ, गुरुद्वारा प्रबंध कमेटी अब इस भूमि का उपयोग हिरणों के लिए आवश्यक घास और जल की व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए करेगी, जिससे इस इकोसिस्टम को मजबूती मिलेगी।
सौहार्दपूर्ण वातावरण में हुआ निर्णय
यह महत्वपूर्ण निर्णय पूर्व मंत्री सुखराम बिश्नोई की उपस्थिति में लिया गया। बैठक में जिला प्रधान सुरजनराम बिश्नोई, भीखाराम सारण, रामगोपाल धायल, हरिकिशन साहू, रामावतार मांजु, पुनमाराम खिलेरी, किशनलाल सारण, जयकरण खिलेरी, रामनिवास साहू, पूनमचंद लोमरोड, मंगलाराम खोखर, मांगीलाल साहू, रघुनाथ साहू, मालाराम साहू, चुन्नीलाल डउकिया, हरिराम सारण, श्रीराम लोल, रतनाराम गुरु, वीरमाराम गुरु, बाबूलाल साहू, गणपतलाल सारण, आसुराम गोदारा, मनोहर नैण, लाबुराम सारण, तेजाराम मांजु, बंजरग पंवार, पीराराम धायल, और महिपाल सारण सहित समाज के गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।
सभी उपस्थित सदस्यों ने सर्वसम्मति से इस निर्णय पर सहमति जताते हुए कहा कि यह समझौता वन्यजीवों की सेवा के लिए उठाया गया एक बड़ा कदम है और बिश्नोई समाज की विरासत को आगे बढ़ाता है। बैठक का समापन अत्यंत सौहार्दपूर्ण वातावरण में हुआ।







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