रानीवाडा | होली, रंगों और उल्लास का प्रतीक त्योहार, भारत के विभिन्न कोनों में अपनी विशिष्ट परंपराओं और रीति-रिवाजों के साथ मनाया जाता है। राजस्थान के जालोर जिले के रानीवाड़ा कस्बे में होली की शुरुआत होलिका दहन से होती है, जो सामुदायिक एकता और सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक है।
रानीवाड़ा के महालक्ष्मी मंदिर के सामने, आखरिया मैदान में हर वर्ष भव्य तरीके से होलिका दहन का आयोजन होता है। गाँव के मौजिज लोग और समुदाय के सदस्य एकत्रित होकर इस आयोजन को विधिवत मंत्रोच्चार के साथ संपन्न करते हैं। यह न केवल धार्मिक अनुष्ठान है, बल्कि सामाजिक मिलन का भी अवसर है।

होलिका दहन के लिए लकड़ी और गोबर के उपलों से तैयार चिता को स्थापित किया जाता है। इसके चारों ओर लोग घूमकर अपनी मनोकामनाएँ व्यक्त करते हैं। मंत्रोच्चार और पूजा विधि के बाद होलिका प्रज्वलित की जाती है, जो बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश देती है। इस अवसर पर लोग आपसी गिले-शिकवे दूर कर एक-दूसरे को गले लगाते हैं।
होलिका दहन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि समाज में प्रेम, भाईचारे और एकता का संदेश फैलाने का माध्यम भी है। रानीवाड़ा के लोगों के लिए यह पर्व उनकी सांस्कृतिक पहचान और परंपराओं का अभिन्न हिस्सा है।
होलिका दहन के बाद, अगले दिन रंगों की होली मनाई जाती है, जिसमें हर उम्र के लोग उत्साह से भाग लेते हैं। रानीवाड़ा की होली न केवल स्थानीय समुदाय के लिए, बल्कि बाहर से आए लोगों के लिए भी विशेष आकर्षण का केंद्र है।







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