रानीवाड़ा/मालवाड़ा: रानीवाड़ा उपखंड के मालवाड़ा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) पर अव्यवस्था और फंड की 'गोलमाल' को लेकर बवाल मच गया है। पारदर्शिता की कमी से आक्रोशित ग्रामीणों ने सरपंच प्रदीप सिंह देवल के नेतृत्व में शुक्रवार को पीएचसी परिसर में कड़ा धरना शुरू कर दिया। ग्रामीणों की मांग साफ है: पिछले पाँच सालों के फंड खर्च का पूरा हिसाब दिया जाए, अन्यथा यह आंदोलन और उग्र होगा।
सरपंच का तीखा सवाल: 18 लाख रुपए का हिसाब कहाँ?
ग्राम पंचायत सरपंच प्रदीप सिंह देवल ने अस्पताल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए पिछले पाँच वर्षों (2020 से अक्टूबर 2025) तक राजस्थान मेडिकल रिलीफ सोसायटी कमेटी के अंतर्गत कराए गए सभी कार्यों और खर्चों का तत्काल और सार्वजनिक विवरण माँगा है। सरपंच देवल, जो स्वयं इस रिलीफ सोसायटी कमेटी के अध्यक्ष हैं, ने कहा कि ग्रामीणों के सामने पारदर्शिता बनाए रखना अस्पताल प्रशासन की नैतिक जिम्मेदारी है।

सरपंच ने चौंकाने वाला खुलासा करते हुए कहा कि 2022 में रिलीफ फंड में लगभग 11 लाख रुपए जमा थे। इसके अलावा, अस्पताल को दो बार प्रतिष्ठित 'कायाकल्प अवॉर्ड' मिल चुका है, जिसके तहत प्रति वर्ष 1.45 लाख रुपए का रिनोवेशन फंड प्राप्त होता है। इन सभी राशियों को मिलाकर अस्पताल के खाते में लगभग 17 से 18 लाख रुपए की मोटी राशि होनी चाहिए थी, जिसका कोई स्पष्ट लेखा-जोखा उपलब्ध नहीं है। यह गंभीर वित्तीय अनियमितता की ओर इशारा करता है।
मामले की आंच उच्च अधिकारियों तक
इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए उपखंड अधिकारी सुनील कुमार को सूचना दी गई। उपखंड अधिकारी ने इसे गंभीरता से लेते हुए तत्काल चिकित्सा विभाग के उच्च अधिकारियों से बात की और मामले की सत्यता जानने के लिए उच्च स्तरीय जांच कमेटी गठित करने के कड़े निर्देश दिए हैं। प्रशासन का यह कदम दिखाता है कि वे इस फंड गबन के आरोप को हल्के में नहीं ले रहे हैं।

सिर्फ फंड नहीं, व्यवस्था भी चौपट
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि केवल फंड ही नहीं, बल्कि पीएचसी की सामान्य व्यवस्था भी पूरी तरह चौपट है। अस्पताल में सफाई व्यवस्था बदहाल है, दवा वितरण में अनियमितता है, और डॉक्टरों की उपस्थिति भी सवालों के घेरे में है। एक स्थानीय ग्रामीण ने कहा, "पहले हम सामान्य शिकायतों से परेशान थे, लेकिन अब जब फंड की चोरी का मामला सामने आया है, तो हमारा विश्वास पूरी तरह टूट चुका है।"

अंतिम चेतावनी: अब इंसाफ होकर रहेगा!
सरपंच देवल ने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर उच्च स्तरीय जांच कमेटी जल्द काम शुरू नहीं करती है और खर्च का ब्यौरा सार्वजनिक नहीं किया जाता है, तो ग्रामीण अपना धरना समाप्त नहीं करेंगे, बल्कि आंदोलन को तहसील और जिला स्तर तक ले जाकर और तेज करेंगे। यह मामला केवल मालवाड़ा पीएचसी का नहीं है, बल्कि यह सार्वजनिक धन के दुरुपयोग पर सीधे सवाल खड़ा करता है। सर्कल न्यूज़ नेटवर्क यह सुनिश्चित करेगा कि इस पूरे मामले में पारदर्शिता बनी रहे और जनता के पैसे का पाई-पाई का हिसाब मिले।







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