रानीवाड़ा। "जब बेटियां शस्त्र और शास्त्र दोनों में निपुण होती हैं, तो समाज और संस्कृति का मस्तक हमेशा ऊंचा रहता है।" बदलते दौर में नारी शक्ति को आत्मनिर्भर, साहसी और अपनी गौरवशाली परंपराओं से जोड़ने के लिए जालोर के रानीवाड़ा में एक ऐतिहासिक पहल होने जा रही है। आधुनिकता की दौड़ में जहां पारंपरिक कलाएं लुप्त हो रही हैं, वहीं बेटियों को स्वावलंबी और सशक्त बनाने के उद्देश्य से अनूठे प्रशिक्षण शिविर की नींव रखी गई है।

छैल सिंह रतनपुर ने दी शिविर की संपूर्ण जानकारी
दहेज विरोधी क्षत्रिय संघ द्वारा संचालित 'टीम राजपूत सर्वोत्तम सहयोग संस्थान जालोर' एवं 'टीम जय भवानी मातृ शक्ति तलवार बाजी संघ जालोर' के संयुक्त तत्वावधान में 16 जून से 26 जून 2026 तक एक भव्य तलवारबाजी प्रशिक्षण कैम्प का आयोजन किया जा रहा है।
वरिष्ठ समाजसेवी छैल सिंह देवड़ा रतनपुर (रानीवाड़ा, सिरोही) ने शिविर की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि इस 10 दिवसीय विशेष कैंप का मुख्य उद्देश्य बालिकाओं और महिलाओं में आत्मरक्षा के गुर विकसित करना तथा उन्हें राजपूती शौर्य की पारंपरिक कला से रूबरू कराना है।
- आयोजन स्थल: राजपूत छात्रावास, रानीवाड़ा
- आयोजक संस्था: श्री आशापुरा क्षत्रिय कल्याण संस्था रानीवाड़ा (टीम रानीवाड़ा-जालोर-सिरोही, राजस्थान)
कुशल प्रशिक्षकों की देखरेख में निखरेगा बेटियों का हुनर
इस प्रशिक्षण शिविर में गोगटिया के मुख्य प्रशिक्षक टीना कंवर राठौड़ तथा दिग्विजय सिंह राठौड़ के कुशल मार्गदर्शन में बेटियां तलवारबाजी के पैंतरे सीखेंगी। इसके साथ ही, प्रदेश की प्रतिष्ठित जयपुर, जोधपुर और जालोर टीमों से जुड़ी अनुभवी महिला ट्रेनर्स बालिकाओं को प्रशिक्षित करेंगी। प्रशिक्षकों की सूची इस प्रकार है:
| ट्रेनर का नाम | मूल स्थान व टीम |
|---|---|
| टीनू कंवर राठौड़ | गोगटिया, जयपुर टीम |
| ट्विंकल कंवर राठौड़ | जाखली, जयपुर टीम |
| सौम्या कुम्पावत | अमरपुरा, जयपुर टीम |
| ओम राठौड़ | जाखली, जयपुर टीम |
| दुर्गा राठौड़ | जाखली, जयपुर टीम |
| लतिका राठौड़ | कालवा, जयपुर टीम |
| साक्षी शेखवत | शाहपुरा, टटेरा, जयपुर टीम |
| दिति शेखावत | परडोली, जोधपुर टीम |
| रेणुका उदावत | गरनिया, जोधपुर टीम |
| गुंजन कंवर चौहान | सेवड़ी, जालोर टीम |
| निधि राठौड़ | तिलोड़ा, जालोर टीम |
तलवारबाजी की विवेचना: सिर्फ एक युद्ध कला नहीं, आत्मरक्षा और एकाग्रता का विज्ञान
तलवारबाजी केवल प्राचीन काल का युद्ध कौशल या शस्त्र संचालन मात्र नहीं है, बल्कि यह वर्तमान समय में महिला सशक्तिकरण का सबसे प्रभावी माध्यम है। मानसिक और शारीरिक संतुलन की इस विधा का महत्व आज के दौर में और अधिक बढ़ गया है:
- शारीरिक और मानसिक सुदृढ़ता: तलवारबाजी से शरीर में गजब की स्फूर्ति, लचीलापन और सहनशक्ति (Stamina) आती है। यह विधा एकाग्रता (Focus) और त्वरित निर्णय लेने की क्षमता को अद्भुत रूप से बढ़ाती है।
- आत्मरक्षा का अचूक साधन: वर्तमान समय में बालिकाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों को देखते हुए, यह कला उनमें एक अभेद्य सुरक्षा कवच और आत्मविश्वास का संचार करती है।
- सांस्कृतिक धरोहर का संरक्षण: यह प्रशिक्षण भावी पीढ़ी को राजस्थान की उस वीर प्रसूता माटी के इतिहास और विरासतों से जोड़ता है, जहां हाड़ी रानी और वीरांगना किरण देवी जैसी महाशक्तियों ने शस्त्र के बल पर इतिहास का रुख बदल दिया था।
समाज के प्रबुद्ध जनों का मिला सहयोग
शिविर को सफल बनाने के लिए नवल सिंह (रानीवाड़ा कल्ला), प्रताप सिंह (देवड़ा डूंगरी), जूठ सिंह (देवल करड़ा), अनोप सिंह (देवल करड़ा), जोग सिंह (देवड़ा डूंगरी) सहित क्षेत्र के कई गणमान्य नागरिक जैसे ऊक सिंह देवड़ा, दीप सिंह, सुखदेव, डेरावर सिंह, परबत सिंह, कमल नारायण सिंह और मोती सिंह आदि अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
संपर्क सूत्र: शिविर से संबंधित किसी भी प्रकार की जानकारी या पंजीयन के लिए मुख्य मोबाइल नंबर 9785552426 पर संपर्क किया जा सकता है।







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