- विकास की कीमत प्यास से चुका रहा मेड़ा: सड़क तो बन गई, लेकिन हलक सूख गए, एक महीने से जलापूर्ति ठप
- रानीवाड़ा: मेड़ा में हाहाकार, सड़क निर्माण के दौरान काटी पानी की लाइन जोड़ी ही नहीं, ग्रामीणों का फूटा गुस्सा
रानीवाड़ा उपखंड के मेड़ा गांव में पिछले एक महीने से जारी जल संकट ने अब विकराल रूप ले लिया है। स्थिति यह है कि सड़क निर्माण के नाम पर विकास तो हुआ, लेकिन ग्रामीणों की प्यास बुझाने वाली मुख्य लाइफलाइन ही काट दी गई। पिछले 30 दिनों से पानी की एक बूंद न आने से ग्रामीणों और मवेशियों का जीना मुहाल हो गया है।
परेशान ग्रामीणों ने बुधवार को उपखंड अधिकारी (SDM) कार्यालय पहुंचकर विरोध प्रदर्शन किया और प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर तुरंत जलापूर्ति बहाल करने की मांग की।
अधिकारियों की 'अंधी' लापरवाही ग्रामीणों ने बताया कि हाल ही में गांव में सड़क निर्माण का कार्य चला था। इस दौरान नर्मदा नहर परियोजना के अधिकारी और कर्मचारियों ने काम में बाधा बन रही पानी की मुख्य पाइपलाइन (Main Line) को बाहर निकाल दिया। सड़क तो बन गई, लेकिन विडंबना यह है कि उस पाइपलाइन को दोबारा जोड़ना अधिकारी भूल गए। इस घोर लापरवाही के कारण पूरा गांव एक महीने से प्यासा है।
पशुधन पर मंडराया संकट ज्ञापन में बताया गया है कि पानी की सप्लाई बंद होने से न केवल आम जनजीवन अस्त-व्यस्त हुआ है, बल्कि बेजुबान पशुधन भी बुरी तरह प्रभावित है। गांव में पीने के पानी का कोई अन्य स्रोत न होने से हालात बदतर होते जा रहे हैं।
जांच और कार्रवाई की मांग ग्रामीणों ने उपखंड अधिकारी से मांग की है कि इस मामले की तत्काल जांच करवाई जाए कि आखिर किसकी शह पर पाइपलाइन को इतने दिनों तक तोड़े रखा गया। साथ ही, तुरंत प्रभाव से लाइन को सुचारू करवाकर राहत प्रदान की जाए।
ये रहे मौजूद विरोध प्रदर्शन और ज्ञापन देने के दौरान राणसिंह देवल, सोना राम, देवी सिंह, वीराराम पुरोहित, हीरा राम चौधरी, जितेन्द्र सिंह, नरेंद्र सिंह राठौड़, करण सिंह और अमृत लाल गर्ग सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।







पाठक टिप्पणियां (Comments)
0 टिप्पणियां