मीटरगेज से ब्रॉडगेज, दोहरीकरण और विद्युतीकरण के 'फाउंडेशन पिलर' बने पूर्व सांसद देवजी पटेल; वर्तमान सांसद लुंबाराम चौधरी की ऊर्जावान पैरवी से जालौर-सिरोही को मिली लंबी दूरी की ट्रेनों की सौगात।
जालौर। कहते हैं कि एक आलीशान महल की भव्यता हर किसी को आकर्षित करती है, लेकिन उस महल को सदियों तक मजबूती से थामे रखने का असली काम जमीन के नीचे छिपा वो 'फाउंडेशन पिलर' (नींव का पत्थर) करता है, जिसे अमूमन लोग देखना भूल जाते हैं। जालौर-सिरोही संसदीय क्षेत्र में आज जयपुर और देश की राजधानी दिल्ली के लिए जो ट्रेनें सरपट दौड़ रही हैं, इस विकास रूपी महल के असली 'फाउंडेशन पिलर' पूर्व सांसद श्री देवजी एम. पटेल हैं। देवजी भाई के १५ साल के कार्यकाल की अथक तपस्या, विजन और इच्छाशक्ति के बिना जालौर के रेल मार्ग का यह आधुनिक स्वरूप असंभव था। आज वर्तमान सांसद श्री लुंबाराम चौधरी की ऊर्जावान कार्यशैली और मजबूत पैरवी से विकास की इस गति को नया पंख मिला है, जिससे पूरा क्षेत्र गौरवान्वित है।
असंभव को संभव बनाने का सफर: जब पाटन-भीलड़ी और रानी की वाव की बाधाएं टूटीं
एक दौर था जब जालौर रेल के मामले में देश के सबसे पिछड़े क्षेत्रों में गिना जाता था। यहां मीटरगेज (छोटी लाइन) की पुरानी पटरियां थीं, जिन पर लंबी दूरी की ट्रेनें चलाना एक सपना मात्र था। पूर्व सांसद देवजी पटेल ने जब कमान संभाली, तो उनके सामने चुनौतियों का पहाड़ था। सबसे बड़ा और जटिल कार्य था मीटरगेज से ब्रॉडगेज (बड़ी लाइन) का आमान परिवर्तन।
इस कार्य में सबसे बड़ी बाधा गुजरात के पाटन में 'रानी की वाव' हेरिटेज क्षेत्र के कारण आई। पुरातत्व विभाग और पर्यावरण की कड़ी बंदिशों के चलते काम रुकने की कगार पर था। लेकिन देवजी भाई ने हार नहीं मानी। दिल्ली के गलियारों में लगातार पैरवी कर, तकनीकी दिक्कतों को दूर करवाकर न सिर्फ लाइन बिछवाई, बल्कि इस पूरे रूट के दोहरीकरण (डबलिंग) का काम भी मंजूर करवाया।
बिजली की रफ्तार और स्टेशनों का कायाकल्प
जैसे ही ब्रॉडगेज का काम पूरा हुआ, देश में रेलवे के शत-प्रतिशत विद्युतीकरण (इलेक्ट्रिफिकेशन) की नीति आ गई। अब समस्या यह थी कि देश के अन्य हिस्सों की इलेक्ट्रिक ट्रेनें जालौर रूट पर नहीं आ सकती थीं। देवजी भाई ने इस समस्या को भी चुनौती के रूप में लिया और जालौर रूट का विद्युतीकरण युद्धस्तर पर चालू करवाया। इसके साथ ही असुरक्षित रेलवे क्रॉसिंग्स पर ओवरब्रिज और अंडरपास (पुल) बनवाए तथा क्षेत्र के रेलवे स्टेशनों का आधुनिकीकरण कर उन्हें विश्वस्तरीय पहचान दिलाई। सच कहा जाए तो उन्होंने थाली में विकास के सारे व्यंजन परोस कर तैयार कर दिए थे।
लुंबाराम चौधरी ने आगे बढ़ाई विकास की मशाल
देवजी भाई द्वारा तैयार किए गए इसी मजबूत बुनियादी ढांचे (इन्फ्रास्ट्रक्चर) पर आज जालौर के सुनहरे भविष्य की ट्रेन दौड़ रही है। वर्तमान सांसद श्री लुंबाराम चौधरी ने इस अवसर को बखूबी संभाला। उन्होंने अपनी ऊर्जा और सादगी भरे अंदाज से सीधे रेल मंत्री के समक्ष मजबूती से पक्ष रखा और चेन्नई के बाद अब दिल्ली-जयपुर की ट्रेनों को धरातल पर उतार दिया। लुंबाराम जी की यह मेहनत क्षेत्र के लिए संजीवनी साबित हुई है और आज जालौरवासी सीधे देश की सत्ता के केंद्र से जुड़ गए हैं।
राजनीति से परे, जनता के दिलों के 'विकास पुरुष'
आज भले ही श्रेय लेने की होड़ हो, लेकिन जालौर की जनता भली-भांति जानती है कि इस लंबी दूरी की ट्रेनों के पीछे किसका पसीना बहा है। देवजी भाई पटेल को रेल के क्षेत्र में जालौर का 'विकास पुरुष' कहना कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। राजनीति के उतार-चढ़ाव अपनी जगह हैं, लेकिन क्षेत्र के प्रति उनका समर्पण आज भी अटूट है। हार-जीत से परे, वह बंदा आज भी हाथ में भाजपा का झंडा थामे, २४ घंटे क्षेत्र की जनता की सेवा और विकास के लिए तत्पर खड़ा है।
जालौर का यह रेल विकास हमें सिखाता है कि दूरगामी सोच और विपरीत परिस्थितियों में भी डटे रहने की जिद ही बड़े बदलावों को जन्म देती है। देवजी भाई की १५ साल की मेहनत और लुंबाराम जी के वर्तमान प्रयासों के इस सुंदर समन्वय के लिए सभी जालौर-सिरोही वासियों को जयपुर-दिल्ली ट्रेन शुरू होने पर हार्दिक बधाई और उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं!







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