जैसलमेर से अमेरिका तक गूंजी लोक कला की तान, महारावल गिरधर से लेकर अमृत गंगा पुरस्कारों की लगी झड़ी
जैसलमेर। मरूभूमि की माटी में पैदा हुए लोक कलाकारों ने हमेशा अपनी अनूठी विधा से दुनिया को सम्मोहित किया है। इसी फेहरिस्त में एक चमकता हुआ नाम है श्री तगा राम का। अपनी उत्कृष्ट कला साधना के दम पर उन्होंने न केवल स्थानीय और राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है, बल्कि सात समंदर पार अमेरिका तक राजस्थान का गौरव बढ़ाया है। उन्हें अब तक अनेक प्रतिष्ठित पुरस्कारों, सम्मानों और प्रशंसा प्रमाण-पत्रों से नवाजा जा चुका है।
इस असाधारण उपलब्धि को समझने के लिए आइए इस खबर को मल्टी-एंगल (विभिन्न दृष्टिकोणों) से देखते हैं:
राजघराने से लेकर संस्थागत सम्मानों का सफर (प्रतिष्ठा और पहचान)
श्री तगा राम की कलात्मक यात्रा को देश की नामचीन संस्थाओं ने हमेशा सिर-आंखों पर बिठाया है। उनके पुरस्कारों का सफर बेहद शानदार रहा है:
- शाही व सांस्कृतिक सम्मान: वर्ष 2013 में उन्हें जैसलमेर के प्रतिष्ठित महारावल गिरधर ट्रस्ट द्वारा ‘महारावल गिरधर पुरस्कार’ से नवाजा गया। इसके बाद, कामयाचा संस्थान जैसलमेर द्वारा उन्हें लोक संगीत के पुरोधा की स्मृति में ‘महरम श्री सकर खान मगनियार पुरस्कार’ प्रदान किया गया।
- सांस्कृतिक संस्थाओं द्वारा सराहना: वर्ष 2018 में कोलकाता की मरूधरा संस्थान ने उन्हें ‘मरूधरा पुरस्कार’ दिया। इसके अलावा, उन्हें भारतीय दलित अकादमी राजस्थान द्वारा ‘गौरव सम्मान’ और वर्ष 2023 में अमृत गंगे, राजस्थान द्वारा ‘अमृत गंगा पुरस्कार’ से सम्मानित किया जा चुका है।
- सामाजिक जुड़ाव: कला के साथ-साथ समाज के प्रति उनके योगदान को देखते हुए उन्हें वर्ष 2019 में ‘आदिवासी सम्मान, राजस्थान’ से भी विभूषित किया गया।
सात समंदर पार गूंजी तान (अंतरराष्ट्रीय दृष्टिकोण)
तगा राम की कला केवल राजस्थान या भारत की सीमाओं तक सीमित नहीं रही। अमेरिकी धरती पर भी उनके फन का डंका बजा है। उन्हें अमेरिका की प्रतिष्ठित ‘आरएएनए (RANA) एसोसिएशन, यूएसए’ और ‘डलास कल्चरल सेंटर टेक्सास, यूएसए’ द्वारा विशेष प्रशस्ति प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया गया है, जो यह साबित करता है कि लोक कला में भौगोलिक दूरियां बेमानी हो जाती हैं।
सरकारी और प्रशासनिक स्तर पर मिली सराहना (प्रशासनिक दृष्टिकोण)
स्थानीय प्रशासन से लेकर देश के प्रतिष्ठित सांस्कृतिक केंद्रों ने तगा राम की कला को हमेशा प्रमोट किया है। उन्हें निम्नलिखित विभागों से प्रशंसा प्रमाण-पत्र (Appreciation Certificates) प्राप्त हुए हैं:
- स्थानीय व पर्यटन प्रशासन: जिला मजिस्ट्रेट (कलेक्टर) जैसलमेर, नेहरू युवा केंद्र जैसलमेर और राजस्थान पर्यटन विभाग, जैसलमेर।
- सांस्कृतिक केंद्र: पश्चिम क्षेत्र संस्कृति केंद्र (उदयपुर), दक्षिण क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र (नागपुर), जवाहर कला केंद्र (जयपुर) और रोमा सांस्कृतिक विश्वविद्यालय।
- पर्यावरण व अनुसंधान क्षेत्र (2022): कला के साथ-साथ पर्यावरण और वन अनुसंधान के क्षेत्र में भी उनके काम को सराहा गया है। उन्हें शुष्क क्षेत्र वन अनुसंधान संस्थान (AFRI) तथा भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद, देहरादून (2022) द्वारा सम्मानित किया गया है।
कलाकारों के लिए प्रेरणास्रोत:
श्री तगा राम को मिले ये अनगिनत सम्मान इस बात का जीवंत प्रमाण हैं कि यदि कला में समर्पण और प्रामाणिकता हो, तो एक छोटा सा गांव भी वैश्विक पटल पर चमक सकता है। जैसलमेर का पर्यटन विभाग और स्थानीय कलाप्रेमी उनकी इन उपलब्धियों पर गर्व महसूस कर रहे हैं।



