उत्तर प्रदेश के कोरवा ऑर्डिनेंस फैक्ट्री में तैयार हुई पहली पूरी तरह 'मेड इन इंडिया' असॉल्ट राइफल; सितंबर में सेना के ट्रायल के बाद बढ़ेगी रफ्तार, हर 100 सेकंड में तैयार होगी एक घातक गन।
विस्तृत खबर:
रक्षा विनिर्माण (Defence Manufacturing) के क्षेत्र में भारत ने एक ऐतिहासिक और गर्व करने वाला मील का पत्थर हासिल कर लिया है। उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले में स्थित कोरवा ऑर्डिनेंस फैक्ट्री (Indo-Russian Rifles Private Limited - IRRPL) ने देश की पहली 100% स्वदेशी AK-203 असॉल्ट राइफल, जिसे 'शेर' (Sher) नाम दिया गया है, का सफल निर्माण और परीक्षण (Test Fire) कर लिया है।

इस उपलब्धि के साथ ही भारत ने आत्मनिर्भरता की दिशा में एक और छलांग लगाई है। आइए जानते हैं इस घातक हथियार और इस बड़ी सफलता से जुड़ी हर एक खास बात:
क्यों है यह उपलब्धि ऐतिहासिक?
इंडो-रशियन राइफल्स प्राइवेट Limited (IRRPL) के सीईओ और प्रबंध निदेशक मेजर जनरल एस. के. शर्मा ने इस बड़ी सफलता की जानकारी साझा करते हुए बताया कि इस राइफल में इस्तेमाल किया जाने वाला हर एक पुर्जा (Component) और कच्चा माल (Input Material) पूरी तरह से भारतीय उद्योगों से ही प्राप्त किया गया है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यह सिर्फ चुनिंदा हिस्सों का स्थानीयकरण (Localisation) नहीं है, बल्कि यह राइफल का ट्रू, एंड-टू-एंड '100% जेन्युइन स्वदेशीकरण' (Indigenisation) है। यानी इस गन का एक-एक पार्ट पूरी तरह 'मेड इन इंडिया' है।
सफल रहा टेस्ट फायरिंग का पहला चरण
उत्पादन के बाद इस पहले 100% स्वदेशी प्रोटोटाइप राइफल का कड़ा परीक्षण किया गया। इसमें बर्स्ट फायरिंग (Burst Firing) समेत कई राउंड्स की टेस्टिंग शामिल थी। अधिकारियों के मुताबिक, इसके शुरुआती परिणाम बेहद उत्साहजनक रहे हैं, जिसने यह साबित कर दिया है कि भारतीय कारीगरी और तकनीक ग्लोबल स्टैंडर्ड्स पर खरी उतरती है।
अब आगे क्या? (सेना के ट्रायल और डिलीवरी का प्लान)
- सितंबर में सेना के कड़े परीक्षण: इस सफलता के बाद, IRRPL अब सितंबर में भारतीय सेना के उपयोग और परीक्षण के लिए जरूरी संख्या में स्वदेशी प्रोटोटाइप तैयार करने में जुट गया है।
- हर 100 सेकंड में एक राइफल का उत्पादन: कंपनी अपनी विनिर्माण क्षमता (Manufacturing Capacity) को तेजी से बढ़ा रही है। बहुत जल्द यह प्लांट हर 100 सेकंड में एक AK-203 'शेर' राइफल बनाने की रफ्तार पकड़ लेगा।
- समय से पहले मिलेगी डिलीवरी: बेहतर प्रॉडक्शन ऑप्टिमाइजेशन और कैपेसिटी एन्हांसमेंट के चलते भारतीय सेना को मिलने वाली करीब 6 लाख राइफलों की डिलीवरी का शेड्यूल लगभग एक साल पहले ही पूरा किए जाने की उम्मीद है।
सेना की ताकत में क्यों होगा बड़ा इजाफा?
भारतीय सेना अपनी दशकों पुरानी INSAS राइफलों को पूरी तरह से बदलने के लिए इस आधुनिक असॉल्ट राइफल को बड़े पैमाने पर अपने बेड़े में शामिल कर रही है।
- खूबी: AK-203 एक 7.62x39 मिमी कैलिबर की गैस-ऑपरेटेड असॉल्ट राइफल है, जो कालाश्निकोव प्लेटफॉर्म की बेजोड़ विश्वसनीयता (Reliability) और आधुनिक डिजाइन का बेहतरीन मेल है।
- मारक क्षमता: इस राइफल की फायरिंग स्पीड करीब 700 राउंड प्रति मिनट है और इसकी प्रभावी मारक क्षमता 800 मीटर तक की है। यह मॉड्यूलर रेल सिस्टम और आधुनिक एर्गोनॉमिक्स से लैस है, जो सैनिकों के लिए बेहद सुविधाजनक और घातक साबित होगी।









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