रेलवे के अंतिम सर्वे (FLS) में सीमावर्ती गांवों पर विशेष फोकस; जैसलमेर से भाभर तक के रूट में शामिल होंगे नेहैड और सुईगाम जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र
जैसलमेर से भाभर (गुजरात) के बीच प्रस्तावित 380 किलोमीटर लंबी रेल परियोजना अब महज एक नक्शे का हिस्सा नहीं रही, बल्कि धरातल पर उतरने के लिए तैयार है। उत्तर पश्चिम रेलवे द्वारा किए जा रहे अंतिम स्थान सर्वेक्षण (Final Location Survey – FLS) ने इस परियोजना के महत्व को स्पष्ट कर दिया है। इस रेल लाइन के प्रस्तावित अलाइनमेंट में न केवल मुख्य शहर, बल्कि राजस्थान-गुजरात सीमा पर स्थित उन सुदूर गांवों को भी जोड़ने की तैयारी है, जो अब तक मुख्यधारा की रेल कनेक्टिविटी से वंचित रहे हैं।
बॉर्डर एरिया और नेहैड क्षेत्र में नई उम्मीद
रेलवे की सर्वे टीम ने इस प्रस्तावित मार्ग को रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण माना है। प्रस्तावित रूट के अनुसार, यह ट्रेन जैसलमेर और बाड़मेर के बाद सांचौर जिले के ‘नेहैड क्षेत्र’ (Nehad Area) से होकर गुजरेगी। नेहैड का भौगोलिक परिदृश्य काफी चुनौतीपूर्ण रहा है, लेकिन रेल लाइन के आने से इस पूरे इलाके की सूरत बदल सकती है। इसके अलावा, गुजरात के सीमावर्ती क्षेत्र ‘सुईगाम’ (Sui Gam) को भी इस लाइन से जोड़ने की योजना है।

सर्वे में तकनीक और बारीकी का तालमेल
उप मुख्य अभियंता (निर्माण)-III, सौरभ कुमार के नेतृत्व में जारी इस सर्वेक्षण में अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। ड्रोन और डीजीपीएस (DGPS) उपकरणों की मदद से उन गांवों की मैपिंग की जा रही है, जो अब तक नक्शों में उपेक्षित थे। इस सर्वे का उद्देश्य केवल ट्रेन चलाना नहीं है, बल्कि सीमावर्ती गांवों के निवासियों को रेल की सुविधा देना है। रेलवे प्रशासन ने साफ कर दिया है कि सर्वे टीम का मुख्य ध्यान इन गांवों के निवासियों के साथ तालमेल बिठाने और उनकी जरूरतों को समझने पर है।
सामरिक और आर्थिक कनेक्टिविटी का नया द्वार
सांचौर के नेहैड और सुईगाम जैसे क्षेत्रों में रेल की पहुंच होने से निम्नलिखित बड़े बदलाव की उम्मीद है:
- स्थानीय विकास: कृषि उत्पादों (जैसे जीरा, इसबगोल) को मंडियों तक ले जाने में आसानी।
- सामरिक महत्व: सीमावर्ती क्षेत्रों में सेना और रसद की आवाजाही के लिए एक वैकल्पिक और मजबूत रूट।
- कनेक्टिविटी: जैसलमेर से गुजरात तक की सीधी कनेक्टिविटी, जिससे पर्यटन और व्यापार दोनों को गति मिलेगी।
प्रशासनिक सहयोग पर जोर
सर्वे के दौरान किसी भी प्रकार की बाधा से बचने के लिए रेलवे ने जैसलमेर, बाड़मेर, सांचौर और बनासकांठा जिला प्रशासन को पत्र लिखकर सहयोग मांगा है। टीम का जोर विशेष रूप से उन गांवों में संवाद स्थापित करने पर है, जहां से यह लाइन प्रस्तावित है, ताकि स्थानीय लोगों को परियोजना के भविष्य के लाभों के बारे में आश्वस्त किया जा सके।
आने वाले दिनों में सर्वे रिपोर्ट के आधार पर इस प्रोजेक्ट की विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) को अंतिम रूप दिया जाएगा, जिससे सांचौर के नेहैड और सुईगाम के निवासियों के लिए विकास की नई पटरियां बिछने का रास्ता साफ हो सकेगा।



