पितृदोष से मुक्ति और अखंड सौभाग्य की चाह रखने वालों के लिए अमृत काल; गोशालाओं में दान और गोमाता को गोग्रास देने से बदलेगी किस्मत
रानीवाड़ा। आगामी 15 जून को श्रद्धा और आस्था का अनूठा संगम देखने को मिलेगा। ज्येष्ठ अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) के पावन महीने में इस बार सोमवार के दिन अमावस्या तिथि का आना एक अत्यंत दुर्लभ और चमत्कारी संयोग बना रहा है। ज्योतिषविदों के अनुसार, अधिक मास में सोमवती अमावस्या का ऐसा महासंयोग लगभग तीन दशकों (30 साल) के बाद बन रहा है।
इस महापर्व पर पवित्र नदियों में स्नान, दान और पितृ तर्पण के साथ-साथ गोसेवा, गोशालाओं में गुप्त दान और गोमाता को गोग्रास (हरा चारा) खिलाने का विशेष महत्व है। मान्यता है कि अधिक मास की अमावस्या पर की गई गोसेवा से 33 करोड़ देवी-देवताओं का आशीर्वाद एक साथ प्राप्त होता है और सात पीढ़ियों के पितृ तृप्त होकर सुख-समृद्धि का वरदान देते हैं।
क्यों खास है इस बार की अमावस्या?
- दुर्लभ संयोग: सोमवार और अधिक मास का एक साथ मिलना इस तिथि के महत्व को सौ गुना बढ़ा देता है।
- महापुण्य का माध्यम: सुहागिनों द्वारा अखंड सौभाग्य का व्रत, पीपल की 108 परिक्रमा और गोशालाओं में विशेष गोसेवा।
- दोषों से मुक्ति: कुंडली के पितृदोष, कालसर्प दोष और राहु-केतु के कुप्रभावों से मुक्ति के लिए गोमाता को हरा चारा खिलाना अचूक उपाय।
1. शुभ मुहूर्त और समय सारणी
ज्योतिष गणना के अनुसार, अमावस्या तिथि रविवार दोपहर से ही शुरू हो जाएगी, लेकिन उदय तिथि की मान्यता के कारण महापुण्यकाल सोमवार, 15 जून को ही रहेगा।
- अमावस्या तिथि प्रारंभ: 14 जून, रविवार दोपहर 12:19 बजे से
- अमावस्या तिथि समापन: 15 जून, सोमवार सुबह 08:23 बजे तक
- ब्रह्म मुहूर्त (पवित्र स्नान): सुबह 04:03 बजे से 04:43 बजे तक
- अमृत व सर्वार्थ सिद्धि योग: सुबह 05:23 बजे से सुबह 07:08 बजे तक (इस बीच की गई पूजा व दान का फल तत्काल और स्थायी होता है)।
2. गोशालाओं में दान और गोग्रास का महामहत्व
सनातन धर्म में गोमाता को साक्षात देवस्वरूप माना गया है। अधिक मास की सोमवती अमावस्या पर रानीवाड़ा क्षेत्र की विभिन्न गोशालाओं में विशेष धार्मिक आयोजन होंगे। इस दिन सुबह स्नान के बाद गोशाला जाकर गायों को गुड़, लापसी, और हरा चारा (गोग्रास) खिलाने से घर की दरिद्रता दूर होती है। यदि कोई व्यक्ति आर्थिक संकट या कर्ज से परेशान है, तो उसे इस दिन गोशाला में गुप्त दान या गायों के चारे के लिए आर्थिक सहयोग अवश्य करना चाहिए।
3. सुहागिनों के लिए 'अश्वत्थ प्रदक्षिणा' का महाव्रत
इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सुखी दांपत्य जीवन के लिए निराहार या फलाहार व्रत रखेंगी। इस दिन पीपल के वृक्ष की जड़ में दूध-जल अर्पित कर 108 बार परिक्रमा की जाती है। परिक्रमा के दौरान धान, फल या मिठाई का दान करने की परंपरा है।
4. पितरों की तृप्ति और अक्षय पुण्य
अमावस्या तिथि के अधिपति स्वयं पितृदेव हैं। अधिक मास की अमावस्या पर रानीवाड़ा क्षेत्र सहित आसपास के जलाशयों और तीर्थों पर श्रद्धालु अपने पूर्वजों के नाम से तर्पण, पिंडदान और धूप-ध्यान करेंगे। इसके साथ ही, ज्येष्ठ मास की भीषण गर्मी को देखते हुए इस दिन गोशालाओं में पानी की खेलियों (कुंडों) की सफाई करवाना, पक्षियों के लिए परिंडे बांधना और जरूरतमंदों को जल-पात्र, छाता व अन्न का दान करना सर्वश्रेष्ठ माना गया है।
सर्कल न्यूज़ की विशेष अपील: > इस महाअमावस्या के पावन अवसर पर अपने नजदीकी गोशाला में जाकर गोमाता की सेवा अवश्य करें। अपने सामर्थ्य अनुसार गोग्रास या चारे का दान दें। मानसिक शांति के लिए अमावस्या के दिन 'ॐ नमः शिवाय' और 'ॐ पितृदेवाय नमः' मंत्र का जाप फलदायी रहेगा।







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