बनासकांठा (पालनपुर)। एशिया की सबसे बड़ी दुग्ध उत्पादक सहकारी संस्था, बनास डेयरी, में राजनीतिक और संगठनात्मक नेतृत्व पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का परचम और मजबूत हो गया है। गुजरात विधानसभा अध्यक्ष और थराद विधायक शंकरभाई लगधीरभाई चौधरी लगातार तीसरी बार बनास डेयरी के अध्यक्ष पद पर निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं। निदेशक मंडल ने उपाध्यक्ष पद के लिए भावाभाई (बालाभाई) रबारी के नाम पर भी मुहर लगा दी है।
इस चयन के साथ ही, शंकर चौधरी और भावाभाई रबारी अगले ढाई साल (2025-2028) तक 15,000 करोड़ रुपये से अधिक के सालाना कारोबार वाले इस विशाल सहकारी साम्राज्य का नेतृत्व करेंगे।

रिकॉर्ड निर्विरोध चयन और भाजपा का मेंडेट:
बनास डेयरी के 16 सदस्यीय निदेशक मंडल के चुनाव में 15 सीटें निर्विरोध रही थीं, जो भाजपा समर्थित नेतृत्व की मजबूत पकड़ को दर्शाती है। केवल दांता सीट पर चुनाव हुआ, जिसमें भाजपा अधिकृत उम्मीदवार अमरतजी परमार ने जीत हासिल की।
चेयरमैन के चयन की औपचारिक घोषणा से पहले ही भाजपा गुजरात प्रदेश अध्यक्ष जगदीश विश्वकर्मा ने आधिकारिक पत्र जारी कर शंकर चौधरी को चेयरमैन और बालाभाई रबारी को वाइस चेयरमैन नियुक्त करने का मेंडेट (अधिकार पत्र) जारी कर दिया था, जिससे नेतृत्व का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया था।
तीसरी बार ताज, 10 साल का सफर:
शंकर चौधरी पिछले 10 सालों से बनास डेयरी के अध्यक्ष पद पर काबिज हैं। उनका तीसरी बार निर्विरोध चुना जाना सहकारिता क्षेत्र में उनकी मजबूत पैठ और कुशल प्रबंधन का प्रमाण है।
- डेयरी के पूर्व अध्यक्षों में: स्वर्गीय गलबाभाई नानजीभाई पटेल ने डेयरी की स्थापना की थी, उसके बाद डालुमभाई देसाई और फिर परितभाई भटोल ने 22 साल तक अध्यक्ष पद संभाला था। अब शंकर चौधरी ने अपनी निर्विरोध 'हैट्रिक' पूरी कर ली है।

बनास डेयरी की विशाल उपलब्धियाँ (श्वेत क्रांति से मीठी क्रांति तक):
बनास डेयरी सिर्फ एक दुग्ध संस्था नहीं है, यह बनासकांठा की लाखों महिलाओं की आत्मनिर्भरता का आधार है। इसका कार्यक्षेत्र गुजरात सहित 8 राज्यों में फैला हुआ है।
- आर्थिक आधार: डेयरी से 3 लाख 76 हज़ार सदस्य जुड़े हैं, जिनके खाते में प्रतिदिन 35 करोड़ रुपये जमा होते हैं।
- उत्पादन: डेयरी में प्रतिदिन 80 लाख लीटर दूध आता है, और इसका सालाना कारोबार 15,000 करोड़ रुपये से ज़्यादा है।
- नवाचार:
- गोबर से सीएनजी गैस प्लांट की परिकल्पना को साकार किया गया है।
- मीठी क्रांति में काम करते हुए 350 टन शहद का उत्पादन किया गया है।
- सबसे महत्वपूर्ण, बनास डेयरी के पशुपालकों ने अपने आर्थिक योगदान से देश का पहला मेडिकल कॉलेज स्थापित किया है।
[सर्कल न्यूज़ नेटवर्क] (रिपोर्ट: गुमान सिंह राव 8094161616)







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