सर्कल न्यूज़ नेटवर्क की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट
जालोर (राजस्थान): पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार की एक महत्वकांक्षी परियोजना, जालोर जिले के नरसाणा-भंवरानी होते हुए धुंधाडा तक 56 करोड़ रुपये की लागत से बनी सड़क, आज राजस्थान सरकार के पीडब्ल्यूडी (PWD) अधिकारियों की घोर लापरवाही और घटिया निर्माण की जीती-जागती मिसाल बन चुकी है। जिस सड़क को जालोर को जोधपुर से जोड़ने वाला 'वैकल्पिक जीवनरेखा' बनना था, वह आज जगह-जगह टूटी हुई, अधूरी और जानलेवा खामियों से भरी होने के कारण जनता के लिए 'मौत का जाल' बन गई है। जन अभियोग निराकरण समिति के पूर्व अध्यक्ष पुखराज पाराशर ने अब सीधे मुख्यमंत्री महोदय को पत्र लिखकर इस मामले में तुरंत उच्च-स्तरीय जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।

यहाँ वह सात बिंदु हैं, जो 56 करोड़ की सड़क की पोल खोल रहे हैं:
- 3 किलोमीटर का पैच अधूरा, जनता परेशान: सड़क का निर्माण लगभग पूरा होने का दावा किया जा रहा है, लेकिन बाला ग्राम से भोरडा ग्राम तक लगभग 3 से 4 किलोमीटर का महत्वपूर्ण हिस्सा आज भी अधूरा पड़ा है। जनता सवाल कर रही है कि 56 करोड़ के बजट में यह छोटा सा हिस्सा क्यों छोड़ दिया गया?
- घाणा नदी का पुल नहीं, 'जल-बंधक' बनाने का इंतजाम: घाणा नदी (घाणा-गेलावास के बीच) पर बना पुल इतना नीचा है कि बारिश के दिनों में यह रास्ता कई-कई दिनों तक पूरी तरह से बंद रहता है, जिससे जालोर-जोधपुर का संपर्क टूट जाता है। बार-बार की मरम्मत की जगह, लोगों की मांग है कि यहां एक नया और ऊंचा पुल बनाया जाए, ताकि मानसून में आवागमन न रुके।

- बांडी नहर का स्लोप बना 'दुर्घटना का अड्डा', दो लोगों की मौत: बिजली और घाणा के बीच बांडी नहर पर बने छोटे पुल का स्लोप (ढलान) इतना खतरनाक तरीके से ऊँचा बनाया गया है कि गाड़ियों को आवाजाही में भारी परेशानी हो रही है। इस जानलेवा डिज़ाइन के कारण मात्र 3-4 माह पहले यहाँ एक वाहन दुर्घटनाग्रस्त हुआ, जिसमें दुखद रूप से दो लोगों की जान चली गई थी। यह निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न है।

- जोधपुर सीमा पर ही सड़क ने दम तोड़ा: जोधपुर जिले के धुंधाडा गांव से पहले, जहां यह 56 करोड़ की सड़क समाप्त होती है, वहाँ से धुंधाडा तक की कनेक्टिंग सड़क पूरी तरह से क्षतिग्रस्त है। वैकल्पिक मार्ग का उद्देश्य तब तक पूरा नहीं होगा जब तक इस अंतिम छोर को दुरुस्त नहीं किया जाता।
- आगे का रास्ता भी बदहाल: 56 करोड़ का फायदा कहाँ? धुंधाडा से फीच/भांडु /सालावास तक की सड़क भी बहुत ही बुरी तरह से टूटी हुई है। यह दर्शाता है कि विभाग ने वैकल्पिक मार्ग को लेकर कोई गंभीर विज़न नहीं रखा।
- वाहन-तोड़क स्पीड ब्रेकर, या सड़क सुरक्षा का मज़ाक? धुंधाडा से कांकाणी की ओर जाने वाली सड़क पर इतने बड़े-बड़े और अनियमित स्पीड ब्रेकर बना दिए गए हैं कि वे वाहनों को धीमा करने के बजाय नुकसान पहुँचा रहे हैं। लोगों ने इसे कम करने की मांग की है।
- सांकेतिक बोर्डों में 'झोल', यात्री हो रहे गुमराह: सड़क मार्ग पर लगे सांकेतिक बोर्ड या तो गायब हैं या उनमें भयंकर गलत जानकारी दर्ज है। उदाहरण के लिए, भोरडा ग्राम में धुंधाडा की दूरी 60 किलोमीटर दर्शाई गई है, जबकि असलियत में यह 29-30 किलोमीटर ही है। तिराहों पर बोर्ड न होने से यात्री लगातार भटक रहे हैं।
- शिलान्यास पट्टीका तोड़ी गई, विभाग चुप: पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के द्वारा दिनांक 03.06.2023 को किया गया शिलान्यास की पट्टीका नरसाणा ग्राम में असामाजिक तत्वों ने तोड़ दी, लेकिन पीडब्ल्यूडी विभाग इसे पुनः स्थापित करने के लिए भी तैयार नहीं है।
जनता की दो टूक मांग:
जालोर से रोहट तक की बीओटी (BOT) सड़क की खराब स्थिति के बाद यह वैकल्पिक मार्ग जनता के लिए एकमात्र सहारा था। लेकिन निर्माण कार्य में की गई इस स्तर की लापरवाही और घटिया गुणवत्ता को देखते हुए अब जनता का धैर्य टूट चुका है। जनता ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि उक्त खामियों को तुरंत दूर करने और 56 करोड़ रुपये के इस प्रोजेक्ट में हुई अनियमितताओं की जांच के लिए विभागीय अधिकारियों को तत्काल निर्देश दिए जाएँ, ताकि जानलेवा हो चुकी इस सड़क से जनता को राहत मिल सके और दोषी इंजीनियरों व ठेकेदारों पर कड़ा एक्शन हो सके।
क्या राजस्थान सरकार इस 'मौत के जाल' पर चुप्पी तोड़ेगी या 56 करोड़ का यह 'घोटाला' दबा दिया जाएगा? यह बड़ा सवाल है।







पाठक टिप्पणियां (Comments)
0 टिप्पणियां