जालोर: (टीकम पाल) शिक्षक को हमेशा से समाज का निर्माता और पथ प्रदर्शक माना गया है। यह कहावत कि "शिक्षक समाज का आईना है" बिल्कुल सही है, क्योंकि वे ही भविष्य के नागरिकों को ज्ञान, नैतिकता और मूल्यों से सींचते हैं। जालोर में ऐसे ही एक प्रेरणादायक शिक्षक हैं सेवानिवृत्त पीटीआई जय नारायण परिहार, जो अपनी सेवानिवृत्ति के बाद भी शिक्षा की अलख जगाए हुए हैं।
पिछले साल राजकीय शहरी स्कूल, जालोर से सेवानिवृत्त हुए परिहार, आज भी सैकड़ों युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में मदद कर रहे हैं। वह धवला रोड स्थित मेघवाल समाज छात्रावास में वार्डन के तौर पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं, जहां वे युवाओं को निःशुल्क शिक्षा और उचित मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। उनकी यह पहल सिर्फ किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि वह छात्रों में संस्कार और अनुशासन भी भरते हैं।
पिछले आठ सालों में, उनके मार्गदर्शन में 1,000 से भी ज़्यादा युवा सरकारी सेवाओं में चयनित होकर अपने और समाज के सपनों को साकार कर चुके हैं। परिहार जी का यह जज़्बा और निस्वार्थ सेवा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हर छात्र के लिए एक मिसाल है। वह विभिन्न करियर गाइडेंस समारोहों में भी हिस्सा लेते हैं, जहां वे छात्रों को सफलता की राह दिखाते हैं।
परिहार जी ने साबित कर दिया है कि एक शिक्षक का कर्तव्य सिर्फ कक्षा तक सीमित नहीं होता, बल्कि उसका प्रभाव पूरे समाज में होता है। उनका यह इंक़लाबी क़दम जालोर के युवाओं के लिए एक नया सवेरा लेकर आया है।







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