राजपूत छात्रावास में वरिष्ठजनों के सान्निध्य में संपन्न हुई भव्य बैठक; जनगणना में गोत्र के बजाय केवल 'राजपूत' लिखवाने और समाज सेवा के लिए धरातल पर उतरने का लिया संकल्प।
मुख्य समाचार: समाज सुधार और एकजुटता की नई अलख
रानीवाड़ा/जालोर। "संगठन में ही शक्ति है और जब समाज के प्रबुद्धजन एक जाजम पर बैठकर कुरीतियों को मिटाने का बीड़ा उठाते हैं, तो इतिहास बदल जाता है।" इसी गौरवशाली सोच के साथ रानीवाड़ा स्थित राजपूत छात्रावास में समाज हित को समर्पित एक भव्य एवं महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया। आदरणीय वरिष्ठजनों के सान्निध्य में अत्यंत गरिमामय वातावरण में संपन्न हुई इस बैठक का मुख्य उद्देश्य समाज को नई दिशा देना और कुरीतियों पर कड़ा प्रहार करना रहा।

वरिष्ठजनों और प्रबुद्ध नेतृत्व की गरिमामयी उपस्थिति बैठक में क्षेत्र के प्रमुख समाजसेवियों और वरिष्ठजनों ने शिरकत कर मार्गदर्शन दिया। इस दौरान मुख्य रूप से:
ठा. इक्ष्वाकू देव देवड़ा (बड़गांव), राघवेंद्र सिंह (पूर्व प्रधान, रानीवाड़ा), कु. प्रदीप सिंह (मालवाड़ा), ठा. कालू सिंह (रानीवाड़ा - कल्ला), नवल सिंह (रानीवाड़ा), छैल सिंह देवड़ा (रतनपुर), मूल सिंह (जाखरी), फतेह सिंह (रानीवाड़ा खुर्द), उक सिंह (डूंगरी), प्रताप सिंह (डूंगरी), जोग सिंह (डूंगरी) उपस्थित रहे।
विभिन्न क्षेत्रों से उमड़े संगठन के पदाधिकारी इस महा-मंथन में केवल स्थानीय ही नहीं, बल्कि सायला, भीनमाल, बागोड़ा, बालोतरा सहित विभिन्न क्षेत्रों से संगठन के कर्मठ पदाधिकारीगण हिस्सा लेने पहुँचे। जिनमें प्रमुख रूप से: मंगल सिंह सिराणा, जेठु सिंह भालनी, हीर सिंह चौराऊ, सवाई सिंह कालेवा, विक्रम सिंह भाण्डवपुर, मदन सिंह तुरा, भंवर सिंह देता, नारायण सिंह उनडी, महीपाल सिंह दासपा और ईश्वर सिंह दुदवा सहित अनेक गणमान्य सदस्यों ने अपनी सक्रिय उपस्थिति दर्ज कराई।
इन प्रमुख मुद्दों पर हुआ गहन विचार-विमर्श बैठक का मुख्य केंद्र आगामी 23-24 मई 2026 को नागाणा राय मैरिज गार्डन (उनडी, तहसील-सायला, जिला-जालोर) में आयोजित होने वाले 'राजपूत सर्वोत्तम सहयोग संस्थान, भारत' के 02 दिवसीय भव्य स्थापना दिवस एवं दहेज विरोधी क्षत्रिय संघ चिंतन शिविर को लेकर रहा। इसके साथ ही बैठक में निम्नलिखित ऐतिहासिक निर्णय व संकल्प लिए गए:
- कुरीतियों पर प्रहार: समाज में पैर पसार रही दहेज प्रथा, शादी-ब्याह में फिजूलखर्ची (दिखावा) और नशा जैसी बुराइयों को जड़ से समाप्त करने पर विशेष जोर दिया गया।
- एकजुटता का संदेश (एक नाम, एक पहचान): आगामी जनगणना में अलग-अलग गोत्र लिखवाने के स्थान पर सभी से केवल “राजपूत” लिखवाने का आह्वान किया गया, ताकि समाज की संगठित शक्ति का सही आकलन हो सके।
- सगाई-बायोडाटा मिलान और प्रतिभा सम्मान: आगामी सायला कार्यक्रम में होने वाले खानदानी बन्ना/बाईसा सगाई परिचय समारोह, कार्यकर्ता स्नेह मिलन और 80% से अधिक अंक लाने वाले प्रतिभावान छात्र-छात्राओं के सम्मान समारोह की रूपरेखा तय की गई।
सार्थक संदेश के साथ समापन बैठक के अंत में सभी उपस्थित जनों से 'राजपूत सर्वोत्तम सहयोग संस्थान, भारत' से जुड़कर राष्ट्र और समाज सेवा में अपनी सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की गई। कुल मिलाकर यह बैठक समाज के स्वर्णिम भविष्य के लिए अत्यंत सार्थक, प्रेरणादायक एवं सामाजिक एकजुटता का एक सशक्त संदेश देने वाली सिद्ध हुई।







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