सर्कल न्यूज़ नेटवर्क जयपुर/जालौर:
राजस्थान के सूखाग्रस्त इलाकों और संकट में फंसे किसानों के लिए राहत का सबसे बड़ा फैसला सामने आ गया है। आपदा प्रबंधन, सहायता एवं नागरिक सुरक्षा विभाग ने खरीफ फसल वर्ष 2026 (संवत् 2083) के लिए 24 घंटे के भीतर बैक-टू-बैक दो आधिकारिक अधिसूचनाएं जारी कर जालौर जिले के हर कोने को राहत के दायरे में ला दिया है।
इस पूरे घटनाक्रम में जालौर के दो दिग्गज जनप्रतिधियों की जमीनी पैरवी और सक्रियता मील का पत्थर साबित हुई है:
- पूर्व विधायक नारायण सिंह देवल की पहली बड़ी कामयाबी: कम बारिश और फसल बर्बादी के बाद रानीवाड़ा के पूर्व विधायक नारायण सिंह देवल ने स्वयं गांवों और ढाणियों का सघन दौरा कर वास्तविक ग्राउंड रिपोर्ट, फोटो और वीडियो तैयार किए थे। उन्होंने जयपुर में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के सामने पूरे जिले के हालात को बेहद संजीदगी से रखा। उनके इसी अथक प्रयास का नतीजा रहा कि सरकार की 24 अक्टूबर की पहली अधिसूचना में रानीवाड़ा, भीनमाल, सांचौर सहित जालौर की 9 तहसीलों को सीधे 'गंभीर सूखाग्रस्त' घोषित कर दिया गया।
- सरकारी मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग का प्रभावी हस्तक्षेप: पहली सूची में सब कुछ शामिल होने के बावजूद जब खुद जिला मुख्यालय की प्रमुख 'जालौर तहसील' का नाम तकनीकी या प्रशासनिक वजहों से छूट गया, तो सरकारी मुख्य सचेतक एवं स्थानीय विधायक जोगेश्वर गर्ग तुरंत एक्शन मोड में आए। उन्होंने मुख्यालय के किसानों के हितों की अनदेखी नहीं होने दी और शासन स्तर पर मुख्यमंत्री व आपदा प्रबंधन विभाग से तुरंत संपर्क कर वास्तविक स्थिति दर्ज करवाई। जोगेश्वर गर्ग की इस प्रभावी पहल का ही सुखद असर हुआ कि सरकार ने 25 अक्टूबर को पूरक अधिसूचना जारी करते हुए जालौर तहसील को भी 'गंभीर सूखाग्रस्त' (Severe Category) में शामिल कर लिया।
अब जालौर जिला मुख्यालय सहित पूरा जालौर जिला शत-प्रतिशत गंभीर अभावग्रस्त क्षेत्र में आ चुका है।
जालौर जिले की अंतिम स्थिति: सभी 10 तहसीलें गंभीर श्रेणी में
दोनों अधिसूचनाओं के बाद जालौर जिले की सभी 10 प्रमुख तहसीलें अब आधिकारिक रूप से 'गंभीर सूखाग्रस्त' (Severe Category) की सूची में दर्ज हो चुकी हैं:
- जालौर (जिला मुख्यालय - 25 अक्टूबर की अधिसूचना से शामिल)
- रानीवाड़ा
- भीनमाल
- सांचौर
- जसवंतपुरा
- सायला
- बागौड़ा
- आहोर
- चितलवाना
- भाद्राजून
(राजस्थान एफेक्टेड एरियाज एक्ट 1952 के तहत इन सभी तहसीलों में आगामी 6 माह तक सभी सरकारी राहत नियम व पाबंदियां लागू रहेंगी।)
राजस्थान की कुल स्थिति: दोनों अधिसूचनाओं का पूरा ब्योरा
राज्य सरकार द्वारा जारी दोनों अधिसूचनाओं (24 अक्टूबर को 13 जिले और 25 अक्टूबर को 10 जिले) के तहत प्रदेश के सूखा प्रभावित अंचलों को दो सूचियों में वर्गीकृत किया गया है:
1. पहली अधिसूचना (13 जिले, कुल 53 तहसीलें - 24 अक्टूबर 2026):
- बांसवाड़ा (3): गढ़ी, अर्थूना (गंभीर) | सज्जनगढ़ (मध्यम)
- बाड़मेर (9): गडरारोड़, चौहटन, बाड़मेर, बायतू, सेड़वा, रामसर, शिव, धनाऊ, बाड़मेर ग्रामीण (सभी गंभीर)
- बालोतरा (3): गुड़ामालानी, कल्याणपुर, पचपदरा (सभी गंभीर)
- चूरू (1): राजगढ़ (गंभीर)
- डूंगरपुर (7): आसपुर, गलियाकोट, झौंथरीपाल, सागवाड़ा (गंभीर) | सीमलवाड़ा, पालदेवल, ओबरी (मध्यम)
- ब्यावर (1): रायपुर (मध्यम)
- जैसलमेर (5): फतेहगढ़, भणियाना, सम, रामगढ़ (गंभीर) | जैसलमेर (मध्यम)
- जालौर (9): आहोर, चितलवाना, जसवंतपुरा, बागौड़ा, भीनमाल, रानीवाड़ा, सांचौर, सायला, भाद्राजून (सभी गंभीर)
- जोधपुर (7): ओसियां, तिंवरी, बालेसर, बावड़ी, शेरगढ़, सेखाला (गंभीर) | पीपाड़शहर (मध्यम)
- फलौदी (5): फलौदी, बाप, बापिणी, आऊ (गंभीर) | सेतरावा (मध्यम)
- नागौर (1): खींवसर (मध्यम)
- पाली (1): सुमेरपुर (गंभीर)
- सिरोही (1): शिवगंज (गंभीर)
2. दूसरी पूरक अधिसूचना (10 जिले, कुल 27 तहसीलें - 25 अक्टूबर 2026):
- जालौर (1): जालौर (गंभीर)
- चूरू (1): सिद्धमुख (गंभीर)
- जैसलमेर (2): पोकरण, फलसुण्ड (गंभीर)
- जोधपुर (5): कुड़ी भगतासनी, जोधपुर, झंवर, बिलाड़ा, लूणी (सभी गंभीर)
- पाली (7): देसूरी, पाली, बाली, मारवाड़ जंक्शन, रानी, रोहट, सोजत (सभी गंभीर)
- फलौदी (2): घंटियाली, देंचू (गंभीर)
- ब्यावर (1): जैतारण (मध्यम)
- बाड़मेर (1): बाटाडू (गंभीर)
- बालोतरा (6): गिड़ा, धौरीमन्ना, पाटौदी, समदड़ी, सिवाना, सिणधरी (सभी गंभीर)
- बीकानेर (1): हदा (मध्यम)
: सूखाग्रस्त घोषित होने से गांवों व किसानों को मिलने वाली सुविधाएं
'राजस्थान एफेक्टेड एरियाज (सस्पेंशन ऑफ प्रोसिडिंग्स) एक्ट, 1952' की धारा 5 से 10 के प्रभावी होने से काश्तकारों और ग्रामीण जनता को सीधे यह कानूनी और आर्थिक संबल मिलेगा:
- फसल खराबा कृषि इनपुट सब्सिडी (मुआवजा): SDRF और NDRF के नियमों के अनुसार 33% या अधिक नुकसान वाले काश्तकारों के बैंक खातों में आर्थिक सहायता राशि सीधे DBT के माध्यम से अंतरित की जाएगी।
- फसली ऋण वसूली व कुर्की पर 6 माह की पूर्ण रोक: अभावग्रस्त अवधि के दौरान किसानों से सहकारी और वाणिज्यिक बैंकों द्वारा अल्पकालीन फसली कर्जों की जबरन वसूली, कानूनी नोटिस और भूमि कुर्की की कार्यवाहियों पर पूरी रोक रहेगी। इन कर्जों को मध्यकालीन कर्जों में पुनर्गठित (रीस्ट्रक्चर) किया जाएगा।
- रियायती दरों पर चारा डिपो: मवेशियों के भरण-पोषण के लिए ग्राम पंचायतों व प्रमुख कस्बों में सरकार द्वारा अनुदानित चारा डिपो खोले जाएंगे, जिससे किसानों को बेहद सस्ती दरों पर सूखा व पौष्टिक चारा मिलेगा।
- गौशालाओं को विशेष आर्थिक पैकेज व कैटल कैंप: पंजीकृत गौशालाओं में आश्रित गोवंश के लिए प्रतिदिन/प्रति पशु के हिसाब से विशेष सरकारी बजट जारी किया जाएगा। जरूरतमंद इलाकों में निशुल्क सरकारी पशु राहत शिविर संचालित होंगे।
- आपातकालीन निशुल्क पेयजल आपूर्ति: जल संकट से प्रभावित ढाणियों व मजरों में जलदाय विभाग (PHED) द्वारा आपातकालीन बजट से नियमित टैंकरों द्वारा निशुल्क पेयजल पहुंचाया जाएगा।
- मनरेगा में अतिरिक्त रोजगार दिवस: सूखे के कारण ठप हुई कृषि मजदूरी की भरपाई के लिए मनरेगा योजना के तहत जरूरतमंद परिवारों को अतिरिक्त कार्य दिवस उपलब्ध कराए जाएंगे।
(सर्कल न्यूज़ ग्राउंड इम्पैक्ट)
जनसमस्याओं को उठाने की निष्पक्ष पत्रकारिता और जनप्रतिनिधियों की समयबद्ध संवेदनशीलता का यह सबसे सटीक उदाहरण है। जहां पहले पूर्व विधायक नारायण सिंह देवल ने रानीवाड़ा और अन्य तहसीलों के लिए मुख्यमंत्री के सामने मजबूत तथ्य रखे, वहीं जिला मुख्यालय जालौर के छूटते ही सरकारी मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग ने बिना देर किए मोर्चा संभाला और 24 घंटे में जालौर को उसका हक दिलवाया। अब शासन का दायित्व पूरा हो चुका है और गेंद सीधे जिला प्रशासन व राजस्व अमले के पाले में है। अधिकारियों को चाहिए कि वे दफ्तरी कागजों से निकलकर फील्ड में उतरें, ताकि मुआवजे का एक-एक रुपया और चारे की हर खेप तय समय में जरूरतमंद अन्नदाता तक पहुंच सके।









पाठक टिप्पणियां (Comments)
0 टिप्पणियां