प्रान्त के दर्जनों गाँवों में प्रार्थना “क्षत्रिय कुल में प्रभु जन्म दिया” के साथ मनाया गया जन्मोत्सव; मातृशक्ति ने दी भावांजलि।
व्यक्तित्व निर्माण का प्रेरणा पुंज
रानीवाड़ा/जालौर। श्री क्षत्रिय युवक संघ के चतुर्थ संघ प्रमुख पूज्य भगवान सिंह रोलसाबसर का 82 वां जयंती समारोह रानीवाड़ा प्रान्त के विभिन्न क्षेत्रों में हर्षोल्लास और आध्यात्मिक ऊर्जा के साथ संपन्न हुआ। प्रान्त प्रमुख प्रवीण सिंह सुरावा ने बताया कि कार्यक्रमों की शुरुआत विधिवत मंगलाचरण और संघ की पारंपरिक प्रार्थना के साथ की गई।

गाँव-गाँव में संस्कारों की गूँज जसवंतपुरा, रानीवाड़ा और सुरावा मंडल के दर्जनों गाँवों जैसे रतनपुर, चांडपुरा, पहाड़पुरा, और सेवाड़ा में आयोजित कार्यक्रमों में स्वयंसेवकों ने हिस्सा लिया। वक्ताओं ने जोर देकर कहा कि रोलसाबसर का व्यक्तित्व जाति और धर्म की सीमाओं से ऊपर उठकर समाज को जोड़ने वाला था। उनके जीवन का सबसे बड़ा संदेश अनुशासन और व्यवहारिकता था। कार्यक्रमों में बताया गया कि परम पूज्य तन सिंह जी के सान्निध्य में उनका व्यक्तित्व निखरा और उन्होंने आजीवन संघ के आदर्शों को जिया।
मातृशक्ति और नारी शिक्षा पर जोर इस जयंती समारोह की एक खास कड़ी जाखड़ी, धामसीन और सुरावा में मातृशक्ति की सहभागिता रही। स्वयंसेविका पूजा कंवर जाखड़ी सहित अन्य वक्ताओं ने पूज्य श्री के जीवन परिचय के साथ नारी शिक्षा और संस्कारों की मजबूत नींव रखने में उनके योगदान को याद किया। बालिकाओं और महिलाओं की शाखाओं में उनके अनुभवों को साझा कर भावी पीढ़ी को प्रेरित किया गया।
आदर्श व्यक्तित्व: एक नजर में
पूज्य भगवान सिंह रोलसाबसर का परिचय
- पद: चतुर्थ संघ प्रमुख, श्री क्षत्रिय युवक संघ।
- दर्शन: समाज को संस्कारों और अनुशासन से जोड़ना।
- विशेषता: पूज्य तन सिंह जी के सान्निध्य में व्यक्तित्व निर्माण; जाति-धर्म से ऊपर उठकर सर्वसमाज के उत्थान की सोच।
- संदेश: संघ को केवल विचारों में नहीं, बल्कि अपने व्यवहार में उतारना ही सच्ची श्रद्धांजलि है।



