मरीजों की जान जोखिम में: नर्सिंग स्टाफ के भरोसे चल रहा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, एक्सपायरी डेट के मुहाने पर सरकारी दवाइयां
सर्किल न्यूज नेटवर्क
मोदरान (जालौर)। कस्बे में स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) पिछले 12 महीनों से बिना डॉक्टर के ‘सफेद हाथी’ साबित हो रहा है। चिकित्सा विभाग की घोर लापरवाही के चलते स्थानीय निवासियों और आसपास के दर्जनों गांवों की गरीब जनता भगवान भरोसे है। एक तरफ सरकार राइट टू हेल्थ (स्वास्थ्य के अधिकार) की ढोल पीट रही है, वहीं दूसरी तरफ मोदरान में पिछले एक साल से डॉक्टरों का टोटा है। इस प्रशासनिक विफलता के खिलाफ अब ग्रामीणों और स्थानीय संगठनों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया है।
चरमराई व्यवस्था के मुख्य बिंदु
- नर्सिंग स्टाफ के भरोसे रामभरोसे केंद्र: PHC में कोई स्थायी डॉक्टर नहीं होने से पूरा दारोमदार नर्सिंग कर्मियों पर है। गंभीर या आपातकालीन मरीजों का इलाज करने में वे तकनीकी रूप से असमर्थ हैं।
- दवाइयां हो रही हैं ‘एक्सपायर’: डॉक्टर के अभाव में मरीजों को पर्ची (Prescription) लिखने वाला कोई नहीं है। नतीजतन, मुफ्त सरकारी दवाओं का स्टॉक रखे-रखे अवधि पार (Expired) हो रहा है और जनता को निजी मेडिकल स्टोरों पर जेब ढीली करनी पड़ रही है।
- आपातकाल में जान का जोखिम: डिलीवरी केस या किसी हादसे जैसी इमरजेंसी की स्थिति में मरीजों को जिला अस्पताल या गुजरात रेफर करना पड़ता है। रास्ते में लगने वाला समय कई बार मरीजों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है।
जनता की मांग और चेतावनी
स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों का कहना है कि वे पिछले एक साल से शांतिपूर्ण तरीके से प्रशासन की सुध लेने का इंतजार कर रहे थे। लेकिन अब पानी सिर से ऊपर जा चुका है। ग्रामीणों ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने जल्द ही मोदरान PHC में स्थायी डॉक्टर की नियुक्ति नहीं की, तो वे सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन और चक्काजाम करने को मजबूर होंगे।
इस गंभीर मुद्दे पर किसने क्या कहा?
“उच्च अधिकारियों को भेजा है प्रस्ताव” “मोदरान PHC में डॉक्टरों की कमी का मामला हमारे संज्ञान में है। रिक्त पदों को भरने के लिए उच्चाधिकारियों को लिखित में प्रस्ताव भेजा जा चुका है। जैसे ही विभाग से स्वीकृति और नए डॉक्टरों की नियुक्ति के आदेश मिलते हैं, मोदरान में प्राथमिकता के आधार पर डॉक्टर की व्यवस्था कर दी जाएगी।” — ब्लॉक मुख्य चिकित्सा अधिकारी (BCMO), जालौर क्षेत्र
“प्रशासनिक विफलता का प्रमाण, अब बर्दाश्त नहीं” “एक साल तक किसी अस्पताल में डॉक्टर न होना प्रशासनिक विफलता का सबसे बड़ा प्रमाण है। स्वास्थ्य सेवा पाना ग्रामीणों का मौलिक अधिकार है। यदि प्रशासन ने तुरंत इस समस्या का समाधान नहीं किया, तो श्री आशापुरी माताजी संघर्ष समिति ग्रामीणों के साथ मिलकर उग्र आंदोलन का बिगुल फूंकेगी।” — रतन सिंह सोढा, अध्यक्ष (श्री आशापुरी माताजी संघर्ष समिति, मोदरान)
रिपोर्टर: जगमालसिंह राजपुरोहित, मोदरान।



