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रेगिस्तान के सीने पर जब आसमान से आग बरसती है और पारा 50 डिग्री सेल्सियस को छूने लगता है, तब इंसान छाया की एक-एक बूंद के लिए तरस उठता है। लेकिन दुनिया के नक्शे पर एक ऐसी अनोखी बस्ती भी आबाद है, जहाँ न कोई छत दिखाई देती है और न ही दीवारें। ऊपर से देखने पर ऐसा भ्रम होता है मानो किसी भयानक उल्कापिंड की बौछार ने जमीन को छलनी कर दिया हो, लेकिन हकीकत यह है कि इन 30 फीट गहरे गड्ढों के भीतर पूरी की पूरी गृहस्थी फल-फूल रही है। बाहर झुलसाने वाली लू चलती है और भीतर का तापमान बिना किसी एयर कंडीशनर या बिजली के 20 से 23 डिग्री पर स्थिर रहता है।

कितनी पुरानी है यह सभ्यता और कौन रहता है यहाँ?
यह अजूबा ट्यूनीशिया के मातमाता (Matmata) इलाके का है। इतिहासकारों और स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, यह आवासीय तकनीक 1000 वर्ष से भी अधिक पुरानी है (कुछ साक्ष्य इसे रोमन काल और 11वीं सदी के अरब आक्रमणों के दौर से जोड़ते हैं)।
यहाँ मूल रूप से अमाज़ीग (Amazigh या बर्बर) जनजाति के लोग रहते हैं। इन लोगों ने दोहरा मकसद साधने के लिए यह तरीका चुना था: पहला, सहारा रेगिस्तान की जानलेवा गर्मी से बचाव; और दूसरा, हमलावरों और लुटेरों से छिपकर सुरक्षित रहना। जमीन के ऊपर कुछ नजर न आने के कारण दुश्मन सेनाएं पास से गुजर जाती थीं और उन्हें आबादी का सुराग तक नहीं मिलता था।
क्या आज भी लोग इन गड्ढों में रहते हैं?
हाँ, लेकिन इनकी तादाद अब काफी कम हो चुकी है। 1960 और 70 के दशक में सरकार ने इनके पास 'न्यू मातमाता' नामक आधुनिक शहर बसाया और लोगों को ऊपर पक्के मकानों में शिफ्ट होने के लिए प्रेरित किया। फिर भी, अपनी संस्कृति और विरासत से जुड़े कुछ दर्जन परिवार आज भी इन्हीं भूमिगत गुफाओं में रह रहे हैं। कुछ घरों को हेरिटेज होटल और होमस्टे में बदल दिया गया है (जैसे 'होटल सिदी द्रिस', जहाँ हॉलीवुड फिल्म Star Wars की शूटिंग हुई थी), जहाँ दुनियाभर से सैलानी रात बिताने आते हैं।
भारी बारिश में पानी निकासी और धंसने का खतरा कैसे टलता है?
इन घरों के निर्माण और टिके रहने के पीछे प्रकृति और पारंपरिक इंजीनियरिंग का तालमेल है:
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जल संचयन और ढलान: बीच के खुले आंगन (Sunken Courtyard) में बारिश के पानी को सहेजने के लिए ढलानदार नालियां बनाकर नीचे भूमिगत हौज या टांके (Cisterns) में उतारा जाता है, जिससे पीने का पानी जमा हो जाता है।
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कम बारिश वाला इलाका: यहाँ सालभर में बहुत कम वर्षा होती है।
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मिट्टी की संरचना: यहाँ की मिट्टी बलुआ पत्थर और सख्त गाद (Sandstone/Clay) का ऐसा सम्मिश्रण है जो खोदने में तो आसान है, लेकिन सूखने के बाद चट्टान की तरह मजबूत हो जाती है। हालांकि, जब 1969 में यहाँ 22 दिनों तक भीषण मूसलाधार बारिश हुई थी, तब कई घर ढह गए थे, जिसके बाद ही सरकार ने नए शहर के निर्माण की पहल की थी।
आजकल इनमे होटल बनाए जा रहे है
दुनिया में और कहाँ-कहाँ हैं ऐसी 'पाताल बस्तियाँ'?
भूमिगत या चट्टानों को काटकर रहने (Troglodyte Architecture) का यह मॉडल सिर्फ ट्यूनीशिया तक सीमित नहीं है:
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कापाडोसिया (तुर्किये): डेरिनकुयू और कायमाकली जैसी बहुमंजिला भूमिगत शहर, जहाँ 20,000 लोग जमीन के 8 स्तर नीचे तक रहते थे।
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याओदोंग (चीन): शांक्सी और हेनान प्रांत में लोएस पठार (Loess Plateau) पर बने गड्ढानुमा आंगन वाले घर, जहाँ लाखों लोग आज भी रहते हैं।
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कूबर पेडी (ऑस्ट्रेलिया): ओपल खनन का रेगिस्तानी कस्बा, जहाँ भीषण गर्मी से बचने के लिए 60% से अधिक आबादी, चर्च और दुकानें सब जमीन के नीचे हैं।
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कंदोवन (ईरान): ज्वालामुखी की चट्टानों को अंदर से तराश कर बनाए गए घर।

राजस्थान में भी यह कांसेप्ट सफल हो सकता है! काल्पनिक डिजाईन क्रिएट बाय DPG studio
क्या राजस्थान की मरुभूमि के लिए अनुकूल है यह मॉडल?
राजस्थान और सहारा के मौसम का मिजाज काफी हद तक एक जैसा है—कड़कती धूप, रेतीली आंधियां और दिन-रात के तापमान में भारी अंतर। लेकिन इस मॉडल को जस-का-तस राजस्थान में उतारने के बजाय इसके वैज्ञानिक सिद्धांतों को अपनाना मुमकिन और बेहद कारगर है:
| पैमाना | ट्यूनीशिया (मातमाता) | राजस्थान (थार मरुस्थल) | अनुकूलता विश्लेषण |
| मिट्टी की बनावट | ठोस दोमट व बलुआ मिट्टी (Self-supporting) | भुरभुरी रेतीली मिट्टी (Loose sand) | शुद्ध रेत में गड्ढा खोदने पर दीवारें ढह जाएंगी; आरसीसी या पत्थर की रिटेनिंग वॉल अनिवार्य है। |
| मानसून का मिजाज | साल में नाममात्र बौछारें | कम समय में तेज बारिश (Flash Floods) | गहरे गड्ढे में पानी भरने (Waterlogging) का बड़ा जोखिम; उच्च क्षमता वाली ड्रेनेज व वॉटरप्रूफिंग जरूरी। |
| पारंपरिक समाधान | सनकन आंगन (Sunken Courtyard) | हवेलियों के चौक, बावड़ी और 'तहखाने' | राजस्थान में पुराने किलों और हवेलियों के तहखाने (Earth-sheltered basements) इसी सिद्धांत पर बने हैं। |
राजस्थान में आधुनिक 'अर्थ-शेल्टर' या 'सनकन कोर्टयार्ड' आर्किटेक्चर के तहत रिसॉर्ट्स, फार्महाउस और विला बनाए जा सकते हैं, जहाँ इमारत का आधा हिस्सा जमीन के स्तर से 6 से 8 फीट नीचे हो और चारों तरफ पत्थर या ईंट की मजबूत सुरक्षा दीवारें हों। इससे थार की चिलचिलाती दोपहर में बिना किसी एयर कंडीशनर के बिजली बिल में 40 से 50 फीसदी तक की सीधी बचत हासिल की जा सकती है।









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