रानीवाड़ा। रानीवाड़ा को नगर पालिका से पुनः ग्राम पंचायत बनाए जाने के बाद स्थानीय ग्रामीणों के सामने आजीविका का बड़ा संकट खड़ा हो गया है। नगर पालिका कार्यकाल के दौरान बने सभी जॉब कार्ड तकनीकी रूप से डिलीट कर दिए गए हैं, और ग्राम पंचायत स्तर पर अब तक एक भी नया जॉब कार्ड जारी नहीं हुआ है।
इस गंभीर समस्या को देखते हुए निवर्तमान उप सरपंच अलका बोहरा ने जिला कलेक्टर को पत्र लिखकर रानीवाड़ा ग्राम पंचायत के निवासियों के लिए तत्काल नए जॉब कार्ड जारी करने की मांग की है। अलका बोहरा ने पत्र में चेताया है कि आगामी 1 जुलाई से सरकार की महत्वाकांक्षी 'जी राम जी' योजना शुरू होने जा रही है। यदि समय रहते जॉब कार्ड नहीं बनाए गए, तो रानीवाड़ा के हजारों जरूरतमंद लोग इस योजना के तहत काम पर नहीं जा पाएंगे, जिससे पूरे क्षेत्र में रोजगार की एक गंभीर समस्या खड़ी हो जाएगी।
आखिर क्यों पैदा हुआ यह संकट?
रानीवाड़ा में हाल ही में हुए प्रशासनिक बदलाव (नगर पालिका से वापस ग्राम पंचायत बनने) के कारण डिजिटल डेटाबेस में बड़ा फेरबदल हुआ। इस प्रक्रिया में नगर पालिका के समय के तमाम जॉब कार्ड्स को सिस्टम से हटा (डिलीट) दिया गया।
नियम के मुताबिक, पंचायत बनते ही नए सिरे से जॉब कार्ड बनने चाहिए थे, लेकिन प्रशासनिक शिथिलता के कारण अभी तक एक भी नया कार्ड नहीं बन सका है। रोजगार का कोई दूसरा बड़ा साधन न होने के कारण स्थानीय श्रमिक पूरी तरह सरकारी योजनाओं पर निर्भर हैं। 1 जुलाई बेहद नजदीक है, ऐसे में अगर प्रशासन ने तुरंत कैंप लगाकर या विशेष आदेश जारी करके जॉब कार्ड नहीं बनाए, तो रानीवाड़ा कस्बे और ग्रामीण इलाके में बेरोजगारी और आर्थिक तंगी का हाहाकार मच जाएगा।
क्या है 'जी राम जी' योजना और यह मनरेगा से कैसे अलग है?
सरकार द्वारा ग्रामीण और अर्द्ध-शहरी क्षेत्रों में रोजगार की गारंटी देने के लिए 'जी राम जी' योजना को नए स्वरूप में अमलीजामा पहनाया जा रहा है। स्थानीय स्तर पर इसे रोजगार की नई लाइफलाइन माना जा रहा है, लेकिन तकनीकी दस्तावेजों के अभाव में रानीवाड़ा इसका लाभ उठाने से वंचित रह सकता है।
'जी राम जी' योजना बनाम मनरेगा (MGNREGA): मुख्य अंतर
मोटे तौर पर दोनों ही योजनाएं श्रमिकों को रोजगार की गारंटी देती हैं, लेकिन इनमें कुछ बुनियादी और तकनीकी अंतर हैं:
| विशेषताएं | मनरेगा (MGNREGA) | 'जी राम जी' योजना |
| मुख्य फोकस | मुख्य रूप से विशुद्ध ग्रामीण क्षेत्रों में अकुशल (Unskilled) श्रम और जल संरक्षण/पक्के एसेट्स के निर्माण पर केंद्रित है। | यह ग्रामीण के साथ-साथ उन क्षेत्रों को भी कवर करती है जो शहरी से ग्रामीण संक्रमण (जैसे रानीवाड़ा) के दौर से गुजर रहे हैं। |
| प्रशासनिक ढांचा | पूरी तरह से केंद्रीय और राज्य के पुराने ग्रामीण विकास नियमों के तहत संचालित होती है। | इसमें स्थानीय निकायों और नई पंचायत व्यवस्थाओं के अनुसार त्वरित बजट आवंटन और काम के चयन में थोड़ी अधिक लचीलापन (Flexibility) होती है। |
| दस्तावेजीकरण | इसके लिए पुराने ग्रामीण जॉब कार्ड और परमानेंट ग्रामीण डेटाबेस की आवश्यकता होती है। | यह नई व्यवस्था के तहत नए सिरे से सर्वेक्षित परिवारों को प्राथमिकता के आधार पर जोड़ती है, जिसमें स्थानीय निकाय के बदलावों का ध्यान रखा जाता है। |
(प्रशासन के लिए चेतावनी): यदि 1 जुलाई से पहले रानीवाड़ा में युद्ध स्तर पर जॉब कार्ड बनाने का कार्य शुरू नहीं किया गया, तो सरकार की इस कल्याणकारी योजना का धरातल पर क्रियान्वयन शून्य रहेगा और रानीवाड़ा शहर रोजगार के मोर्चे पर एक बड़े संकट की गर्त में चला जाएगा।







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