भामाशाह वस्तुपाल जैन और सरपंच प्रदीप सिंह देवल के सहयोग से आंगनवाड़ी केंद्र बनेगा हाईटेक, बच्चों को मोबाइल की लत से दूर करने की अनूठी पहल
डिजिटल दौर की चकाचौंध में जहाँ आज का बचपन मोबाइल स्क्रीन की कैद में सिमटता जा रहा है, वहीं रानीवाड़ा के मालवाड़ा से एक सुखद और प्रेरक खबर सामने आई है। प्रभाकर सेवा संस्थान ने अपनी दूरगामी सोच और भामाशाहों के सहयोग से ग्रामीण अंचल के बच्चों को फिर से खिलौनों और पारंपरिक खेलों की दुनिया में वापस लाने का बीड़ा उठाया है। यह पहल न केवल बच्चों का शारीरिक विकास सुनिश्चित करेगी, बल्कि मारवाड़ की लुप्त होती खेल संस्कृति को भी नई संजीवनी देगी।

रानीवाड़ा/जालौर। प्रभाकर सेवा संस्थान के महत्वाकांक्षी अभियान 'खेलो मारवाड़' के तहत जिले की पहली 'स्मार्ट खिलौना बैंक' की स्थापना मालवाड़ा में होने जा रही है। मालवाड़ा सरपंच प्रदीप सिंह देवल के अथक प्रयासों और प्रतिष्ठित भामाशाह वस्तुपाल बाबूलाल जैन के उदार सहयोग से इस आधुनिक खिलौना बैंक को मालवाड़ा के आंगनवाड़ी केंद्र में स्थापित किया जाएगा।
उपमुख्यमंत्रियों ने जयपुर में किया था पोस्टर विमोचन संस्थान के फाउंडर अमृत पुरोहित ने बताया कि इस अभियान की रूपरेखा बेहद व्यापक है। गौरतलब है कि 'खेलो मारवाड़' अभियान का औपचारिक शुभारंभ राजधानी जयपुर में राजस्थान की उपमुख्यमंत्री श्रीमती दिया कुमारी एवं श्री प्रेमचंद बैरवा द्वारा पोस्टर विमोचन के साथ किया गया था। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में खेलों के प्रति एक नया वातावरण तैयार करना है।
स्मार्ट खिलौना बैंक: संसाधनों से लैस होगा आंगनवाड़ी केंद्र मालवाड़ा के आंगनवाड़ी केंद्र में बनने वाली यह स्मार्ट खिलौना बैंक जालोर जिले की अपनी तरह की पहली पहल है। यहाँ बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास के लिए हर प्रकार के आधुनिक खिलौने और खेल संसाधन उपलब्ध रहेंगे। सरपंच प्रदीप सिंह देवल ने कहा कि आंगनवाड़ी के नन्हें-मुन्नों को निजी स्कूलों जैसी सुविधाएँ प्रदान करना हमारा लक्ष्य है।
मोबाइल स्क्रीन के खिलाफ जंग और पारंपरिक खेलों का पुनरुद्धार संस्थान के फाउंडर अमृत पुरोहित ने बताया कि अभियान के तहत शुरुआती चरण में चुनिंदा आंगनवाड़ी केंद्रों को 'खेल बैंक' के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसके साथ ही:
- फ्री खेल किट: स्कूली बच्चों को खेलों के प्रति प्रोत्साहित करने के लिए संस्थान द्वारा निःशुल्क खेल किट वितरित किए जाएंगे।
- जागरूकता सेमिनार: बच्चों और अभिभावकों को मोबाइल स्क्रीन के बढ़ते उपयोग से होने वाले मानसिक और शारीरिक नुकसान के प्रति जागरूक करने के लिए सेमिनार आयोजित किए जाएंगे।
- विरासत का संरक्षण: आधुनिकता के बीच गायब हो रहे मारवाड़ के पारंपरिक खेलों के प्रति बच्चों का रुझान बढ़ाने के विशेष प्रयास किए जाएंगे।
इस ऐतिहासिक पहल से क्षेत्र के अभिभावकों में भारी उत्साह है। भामाशाह वस्तुपाल जैन के इस सहयोग की पूरे क्षेत्र में सराहना हो रही है, जो ग्रामीण प्रतिभाओं को निखारने में मील का पत्थर साबित होगा।







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