करड़ा, 05 जुलाई 2025: करड़ा आरआई सर्कल के गांवों में खरीफ फसल की बुवाई के बाद आई भारी बारिश ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि अंकुरित फसलों पर मिट्टी के बहाव और लगातार बारिश के कारण 95% फसल नष्ट हो चुकी है। इस प्राकृतिक आपदा ने किसानों को आर्थिक संकट में डाल दिया है, जिसके चलते उन्होंने सरकार से मुआवजा और बीमा क्लेम की मांग की है। करड़ा गांव के किसानों भवरलाल, संजय, प्रताप राम, आसू, मफी रेवी, लक्ष्मी रेवी, प्रकाश सिंह, दलपत सिंह, गगन सिंह, नारण सिंह, पाचाराम, जवराराम, भरत, गीता रेवी, सुरेश, और अन्य ने पं. दीनदयाल उपाध्याय अंत्योदय संबल पखवाड़ा शिविर के प्रभारी अधिकारी को एक आवेदन सौंपकर अपनी पीड़ा बयां की है।
भाजपा के पूर्व मंडल अध्यक्ष तुलसाराम बिश्नोई ने बताया की करड़ा आरआई सर्कल के सभी गांवों में 99% किसानों ने पहली बारिश के बाद खरीफ फसल की बुवाई की थी। फसल अंकुरित होकर छोटी-छोटी बालियों में तब्दील हो रही थी, लेकिन अचानक हुई मूसलाधार बारिश और पानी के तेज बहाव ने फसलों को मिट्टी में दबा दिया, जिससे 95% फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई।
किसानों की त्रासदी:
महंगा बीज, डीजल और मजदूरी बेकार किसानों ने बताया कि महंगे बीज, डीजल, और मजदूरी पर भारी खर्च के बाद बुवाई की गई थी, लेकिन लगातार बारिश के कारण फसल नष्ट होने से सारा निवेश बेकार चला गया। बार-बार बारिश के कारण दोबारा बुवाई में देरी हो रही है, और यदि दोबारा बुवाई की जाए तो भी अगली बारिश में फसल फिर से नष्ट होने का डर बना हुआ है। किसान भवरलाल ने कहा, "हमने कर्ज लेकर बीज और डीजल खरीदा, लेकिन अब सब कुछ बर्बाद हो गया। साल भर के लिए अनाज और पशुओं के चारे की चिंता सता रही है।"
किसानों का भ्रम और चिंता
आवेदन में किसानों ने बताया कि वे भारी भ्रम की स्थिति में हैं। एक ओर दोबारा बुवाई का जोखिम है, तो दूसरी ओर परिवार और पशुओं के लिए अनाज की व्यवस्था की चिंता सता रही है। किसान प्रताप राम ने कहा, "अगर हम अभी बुवाई करें और फिर बारिश हो जाए, तो हमारी मेहनत फिर से बर्बाद हो जाएगी। सरकार को चाहिए कि हमें मुआवजा और बीमा क्लेम दे ताकि हम इस संकट से उबर सकें।"
मुआवजा और बीमा की मांग
किसानों ने प्रभारी अधिकारी से मांग की है कि करड़ा आरआई सर्कल के सभी प्रभावित गांवों में नष्ट हुई फसलों का सर्वे करवाया जाए और किसानों को तत्काल मुआवजा व फसल बीमा क्लेम स्वीकृत किया जाए। उन्होंने कहा कि यह सहायता न केवल उनकी आर्थिक स्थिति को सुधारने में मदद करेगी, बल्कि उन्हें प्राकृतिक आपदाओं की मार को सहन करने की ताकत भी देगी।
प्रशासन से अपील: संबल प्रदान करें
किसानों ने अपने आवेदन में लिखा, "हम अन्नदाता अपने पैरों पर खड़ा रहना चाहते हैं, लेकिन बार-बार प्रकृति की मार हमें तोड़ रही है। आपसे विनम्र अनुरोध है कि हमें संबल प्रदान करें।"
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, जलवायु परिवर्तन के कारण अनियमित बारिश और बाढ़ जैसी घटनाएं ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों के लिए चुनौती बन रही हैं। विशेषज्ञों का सुझाव है कि सरकार को फसल बीमा योजनाओं को और प्रभावी करना चाहिए ताकि किसानों को तत्काल राहत मिल सके। साथ ही, आपदा प्रबंधन के लिए स्थानीय स्तर पर बेहतर योजनाएं लागू करने की आवश्यकता है।
आगे की राह
करड़ा सर्कल के किसान अब प्रशासन के जवाब का इंतजार कर रहे हैं। उनकी मांग है कि नष्ट हुई फसलों का तुरंत सर्वे हो और मुआवजा व बीमा राशि शीघ्र उपलब्ध कराई जाए। अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो किसान आंदोलन की चेतावनी भी दे रहे हैं।
किसान देश की रीढ़ हैं, और उनकी मेहनत पर प्राकृतिक आपदाओं का यह कहर चिंता का विषय है। सरकार को चाहिए कि फसल नुकसान की स्थिति में त्वरित सर्वे और मुआवजा वितरण की प्रक्रिया को तेज करे। साथ ही, दीर्घकालिक उपायों जैसे बेहतर जल निकासी और बीमा योजनाओं पर ध्यान देना होगा ताकि अन्नदाता को बार निवेदन नहीं करना पड़े।







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