मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना बनी पशुपालकों का संबल; ई-मित्र और डॉक्टर की जुगलबंदी से हाथों-हाथ जारी हुई पॉलिसी
कहते हैं कि एक ग्रामीण और किसान के घर में पशु सिर्फ धन नहीं, बल्कि परिवार के सदस्य की तरह होते हैं। लेकिन अनहोनी का डर हमेशा बना रहता था। इसी डर को दूर करने का बीड़ा उठाया है राज्य सरकार के 'ग्रामीण सेवा शिविर' ने। ग्राम पंचायत गुन्दाउ में चल रहे शिविर में तब एक सुखद तस्वीर सामने आई, जब स्थानीय निवासी रिड़मल सिंह के दुधारू पशुओं को सरकार की महत्वाकांक्षी योजना का सीधा लाभ मिला।
ई-मित्र पर क्लिक और डॉक्टर का 'फिटनेस' सर्टिफिकेट
रिड़मल सिंह अपने दो दुधारू पशुओं के भविष्य को लेकर फिक्रमंद थे। उन्होंने जैसे ही शिविर में कदम रखा, प्रशासन ने पूरी तत्परता दिखाई:
- डिजिटल शुरुआत: सबसे पहले ई-मित्र के जरिए चंद मिनटों में ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन मुकम्मल हुआ।
- मौके पर जांच: पशुपालन विभाग के डॉक्टर ने तुरंत पशुओं का स्वास्थ्य परीक्षण कर फिटनेस सर्टिफिकेट जारी किया।
- हाथों-हाथ पॉलिसी: एसआईपीएफ (SIPF) एजेंट ने बिना किसी दफ्तरी लेत-लेत के मौके पर ही बीमा पॉलिसी रिड़मल सिंह के सुपुर्द कर दी।
"पशु बीमार हो जाए या कोई अनहोनी हो जाए, तो हम जैसे छोटे पशुपालक कर्ज के तले दब जाते हैं। अब सरकार ने ₹40,000 की गारंटी देकर हमारे सिर से बहुत बड़ा बोझ हटा दिया है।" — रिड़मल सिंह, लाभार्थी पशुपालक
₹40,000 की सुरक्षा गारंटी, मुख्यमंत्री का जताया आभार
इस बीमा पॉलिसी के तहत यदि किसी आकस्मिक दुर्घटना या प्राकृतिक आपदा के कारण दुधारू पशु की असमय मृत्यु होती है, तो सरकार की तरफ से ₹40,000 की सहायता राशि सीधे लाभार्थी को मिलेगी। रिड़मल सिंह ने इस 'मंगलकारी' पहल के लिए सूबे के मुखिया श्री भजनलाल शर्मा और राज्य सरकार का तहे दिल से आभार जताया और कहा कि इस योजना ने सचमुच गांव के पशुपालकों को सुशासन और सुरक्षा की नई उम्मीद दी है।







पाठक टिप्पणियां (Comments)
0 टिप्पणियां