स्वच्छता टेंडर में गड़बड़ी:26 में से केवल 3-4 पंचायतों में हुए ऑनलाइन टेंडर, जांच में खुलासा
जयपुर, सर्कल न्यूज़ नेटवर्क। राजस्थान में सुशासन और पारदर्शिता के दावों की पोल खोलते हुए शिवगंज पंचायत समिति में "स्वच्छ भारत मिशन" के नाम पर करोड़ों के फंड में बड़ी अनियमितताओं का खुलासा हुआ है। पूर्व विधायक संयम लोढ़ा की तीखी शिकायत के बाद हुई जांच ने साबित कर दिया है कि यह एक-दो नहीं, बल्कि 26 में से 23 पंचायतों में नियमों को ताक पर रखकर, मिलीभगत से किए गए टेंडरों का मामला है। यह सिर्फ शिवगंज की बात नहीं है, बल्कि पूरे राजस्थान में चल रहे घोटालों की एक बानगी है जो सरकार के भ्रष्टाचार-मुक्त शासन के वादों पर एक बड़ा प्रश्नचिन्ह लगा रही है।
नियमों को ठेंगा दिखा, हुई करोड़ों की 'सफाई'
जांच रिपोर्ट के अनुसार, 26 ग्राम पंचायतों के लिए होने वाले ऑनलाइन टेंडर को मात्र 3-4 पंचायतों तक सीमित कर दिया गया। बाक़ी 23 पंचायतों में ठेकेदारों और अधिकारियों ने मिलकर ऑफ़लाइन टेंडर कराए, ताकि मिलीभगत से चहेते ठेकेदारों को काम दिया जा सके। नियमों का खुला उल्लंघन करते हुए, टेंडर खुलने के बाद प्रशासनिक, तकनीकी और वित्तीय स्वीकृतियां जारी की गईं, जबकि नियमानुसार यह सब टेंडर से पहले होना अनिवार्य है।
लोढ़ा ने खोली सरकार की पोल
पूर्व विधायक संयम लोढ़ा ने इस पूरे मामले को एक बड़ा भ्रष्टाचार बताते हुए दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उनकी शिकायत के बाद ही यह मामला सामने आ सका, जिससे यह स्पष्ट होता है कि अगर जनप्रतिनिधि चौकस न हों तो कैसे जनता के पैसे का खुलेआम दुरुपयोग किया जा सकता है। यह मामला सिर्फ एक पंचायत समिति का नहीं है, बल्कि यह दर्शाता है कि कैसे पंचायती राज व्यवस्था में भी भ्रष्टाचार की जड़ें गहरी हो चुकी हैं।
सवालिया निशान
- जब नियमानुसार काम ग्राम पंचायत स्तर पर सरपंच की समिति के माध्यम से होना था, तो क्यों यह कार्य पंचायत समिति स्तर पर किया गया?
- बोली प्रतिभूति, प्रपत्र शुल्क और प्रोसेसिंग फीस का संग्रहण नियमों के विपरीत क्यों किया गया?
- क्या यह सिर्फ एक स्थानीय चूक है, या पूरे प्रदेश में "स्वच्छ भारत मिशन" के नाम पर इसी तरह की लूट चल रही है?
यह रिपोर्ट इस सरकार की पारदर्शिता के दावों पर एक करारा प्रहार है और अगर इस मामले में ठोस कार्रवाई नहीं होती तो यह मान लिया जाएगा कि सरकार खुद इस भ्रष्टाचार को संरक्षण दे रही है। दोषियों पर तत्काल और कड़ी कार्रवाई ही जनता के विश्वास को बहाल कर सकती है।









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