राजस्थान के पंचायती राज महकमे से जुड़ी सबसे बड़ी खबर सामने आई है। गांवों की सरकार यानी पंचायत समितियों में अब चुने हुए जनप्रतिनिधियों का राज खत्म होने जा रहा है और कमान 'अफसरशाही' के हाथ में आने वाली है।
राज्य सरकार ने एक अहम अधिसूचना जारी करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि जिन पंचायत समितियों का कार्यकाल 11 दिसंबर 2025 को पूरा हो रहा है, वहां अब प्रशासक (Administrator) राज करेंगे। इस आदेश का सीधा असर रानीवाड़ा पंचायत समिति पर पड़ा है।
प्रधान का कार्यकाल 11 को होगा खत्म, SDM होंगे नए 'बॉस'
रानीवाड़ा पंचायत समिति के वर्तमान प्रधान राघवेंद्र सिंह देवड़ा का 5 साल का कार्यकाल आगामी 11 दिसंबर 2025 को पूरा हो रहा है। सरकार द्वारा जारी आदेश के मुताबिक, अपरिहार्य कारणों से चुनाव समय पर नहीं हो पा रहे हैं। ऐसे में 11 दिसंबर के बाद रानीवाड़ा सहित अन्य पंचायत समिति की बागडोर प्रधान के हाथों से निकलकर उपखण्ड अधिकारी (SDM) के पास चली जाएगी।

क्या है सरकार का आदेश?
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के शासन सचिव एवं आयुक्त डॉ. जोगा राम द्वारा जारी अधिसूचना (दिनांक 08-12-2025) में कहा गया है:
- राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा-95 और 101 के तहत शक्तियों का प्रयोग करते हुए यह निर्णय लिया गया है।
- जिन पंचायत समितियों का कार्यकाल 11.12.2025 तक समाप्त हो रहा है, वहां चुनाव नहीं होने तक प्रशासक नियुक्त किए जाएंगे।
- संबंधित जिला कलेक्टर को अधिकार दिए गए हैं कि वे क्षेत्र के उपखण्ड अधिकारी (SDM) को प्रशासक नियुक्त करें।
अब किसके पास होगी पावर?
इस आदेश के बाद पंचायत समितियों की सियासत पूरी तरह बदल जाएगी:
- वित्तीय अधिकार: प्रधान के सील-सिक्के और वित्तीय अधिकार अब प्रशासक (SDM) के पास होंगे।
- बैठकें: पंचायत समिति की साधारण सभा या स्थायी समितियों की बैठकें अब प्रशासक की अध्यक्षता में होंगी या उनके निर्देशानुसार चलेंगी।
- कार्यकाल: यह प्रशासक राज तब तक लागू रहेगा, जब तक नए चुनाव संपन्न नहीं हो जाते और नई पंचायत समिति की पहली बैठक नहीं हो जाती।
सियासी हलचल तेज
प्रधान का कार्यकाल पूरा होने और चुनाव टलने की खबर से रानीवाड़ा के सियासी गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। एक तरफ जहां प्रशासनिक अधिकारी अब विकास कार्यों की फाइलें निपटाएंगे, वहीं दूसरी तरफ भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों ने आगामी चुनावों के लिए अपनी कमर कसनी शुरू कर दी है। हाल ही में भाजपा द्वारा जिला प्रभारियों की घोषणा करना भी इसी चुनावी तैयारी का हिस्सा माना जा रहा है।
लिहाजा, 11 दिसंबर की तारीख रानीवाड़ा सहित एनी समितियों की राजनीति के लिए एक अध्याय का अंत और दूसरे की शुरुआत होगी। अब देखना यह है कि प्रशासन और जनता के बीच की यह नई व्यवस्था चुनाव होने तक कितनी कारगर साबित होती है।







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