रानीवाड़ा के पाल गांव की पारसकुमारी देवासी ने पहले ही प्रयास में NEET पास कर हासिल की कामयाबी; सुणतर क्षेत्र की पहली सरकारी डॉक्टर बनेगी
जालौर। कहा जाता है कि प्रतिभा किसी पहचान की मोहताज नहीं होती, और जब हौसले बुलंद हों, तो हर मुश्किल राह आसान हो जाती है। राजस्थान के जालौर जिले की रेतीली जमीन से ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी सामने आई है। यहां के पशुपालक समाज (रेबारी/देवासी) की एक होनहार बेटी ने नीट (NEET) जैसी कठिन परीक्षा में शानदार सफलता हासिल कर एक नया इतिहास रच दिया है।
रानीवाड़ा तहसील के छोटे से पाल गांव की रहने वाली पारसकुमारी देवासी ने अपने पहले ही प्रयास में नीट 2025 में बेहतरीन अंक प्राप्त कर बांसवाड़ा के सरकारी मेडिकल कॉलेज में प्रवेश हासिल किया है। यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि रानीवाड़ा के 'सुणतर' क्षेत्र से सरकारी मेडिकल कॉलेज में प्रवेश पाने वाली वह अपने समाज की पहली बेटी है।

रूढ़ियों को तोड़कर शिक्षा का नया अध्याय
रेबारी समाज, जो पारंपरिक रूप से पशुपालन से जुड़ा है, में बेटियों को उच्च शिक्षा दिलाने की परंपरा अभी भी नई है। ऐसे में पारसकुमारी की यह सफलता समाज के लिए एक बड़ा बदलाव लेकर आई है। उसने कुडा के कृष्णा पब्लिक स्कूल से 12वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद उदयपुर के एसेंट करियर इंस्टीट्यूट से कोचिंग ली और पहले ही प्रयास में अपनी मंजिल पा ली।
पारसकुमारी शुरू से ही एक होनहार छात्रा रही हैं। उनके परिवार में अब बेटियों की संख्या लगातार बढ़ रही है जो पढ़ाई पर ध्यान दे रही हैं। कई लड़कियां कोटा और उदयपुर में नीट की तैयारी कर रही हैं, जबकि कुछ निजी मेडिकल कॉलेजों से डॉक्टरी की डिग्री हासिल कर रही हैं। मारवाड़ में रेबारी समाज की पहली डॉक्टर सांचौर की नैनोल निवासी लाडू देवासी को माना जाता है। उनके बाद कईयों ने निजी कॉलेजों से डॉक्टरी की है। लेकिन रानीवाड़ा तहसील से सरकारी कॉलेज से डॉक्टरी करने वाली पारसकुमारी पहली लड़की मानी जाती हैं।

गौरवशाली परिवार का नया अध्याय
पारसकुमारी के दादा रवाराम देवासी एक प्रतिष्ठित परिवार से हैं, जिनके पुरखों के पास कभी सैकड़ों ऊंट और भेड़ें हुआ करती थीं। एक समय था जब यह परिवार रियासतकाल में पहाड़ों पर राज करता था। इसी प्रतिष्ठित परिवार से आने वाली पारसकुमारी ने शिक्षा के क्षेत्र में भी अपनी छाप छोड़ी है। उनके दादा कांग्रेस के पुराने नेता हैं और जिला परिषद सदस्य सहित कई पदों पर रह चुके हैं। मौजूदा समय में, उनके परिवार के सेवानिवृत्त शिक्षक महादेवाराम को विधायक रतन देवासी से नजदीकियों के कारण कांग्रेस से उपप्रधान बनाया गया है। इसी परिवार में प्रख्यात जादूगर और लोकदेवता रहे रूपाराम देवासी का नाम भी जगप्रसिद्ध है। परिवार में कई युवा सरकारी नौकरियों में हैं।
एक बदलाव की कहानी
यह सफलता सिर्फ एक छात्रा की व्यक्तिगत जीत नहीं, बल्कि पूरे समाज की सोच में आए सकारात्मक बदलाव का प्रमाण है। पारसकुमारी ने साबित कर दिया है कि अगर गांवों की प्रतिभाओं को सही दिशा और अवसर मिले, तो वे भी बड़े शहरों के छात्रों से पीछे नहीं रहतीं। उनकी यह उपलब्धि इलाके की हजारों बेटियों को भी आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगी। उनके पिता किरणकुमार देवासी और पूरे परिवार को इस उपलब्धि पर गर्व है। यह कहानी सिर्फ एक लड़की की सफलता की नहीं, बल्कि एक पूरे समुदाय के लिए शिक्षा के नए द्वार खुलने की है। यह कहानी दर्शाती है कि प्रतिभा गाँव में ही निवास करती है, बस जरूरत एक जौहरी की होती है जो उसे तराश सके।







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