रानीवाड़ा (जालौर) क्षेत्र के जाखड़ी गांव के दो युवाओं सहित 23 श्रद्धालुओं का जत्था बाबा रामसा पीर के दर्शन को निकला
गाजे-बाजे और भव्य वरघोड़े के साथ हज़ारों भक्तों ने की पुष्प वर्षा; 1 महीने की कठिन यात्रा कर रक्षाबंधन पर रामदेवरा पहुंचने का लक्ष्य
विशेष संवाददाता, चेन्नई / रानीवाड़ा
चेन्नई / जाखड़ी। "जय बाबा री" और "खम्मा-खम्मा ओ रामा पीर" के गगनभेदी जयकारों के बीच दक्षिण भारत की कर्मभूमि चेन्नई से मरुधरा की तपोभूमि रामदेवरा तक की ऐतिहासिक साइकिल पदयात्रा का भव्य आगाज हुआ। बाबा रामदेव जी के प्रति अटूट श्रद्धा और आस्था का प्रतीक यह जत्था रविवार सुबह 9 बजे चेन्नई से गाजे-बाजे, ढोल-नगाड़ों और भव्य वरघोड़े के साथ रवाना हुआ। इस दौरान स्थानीय प्रवासियों और हज़ारों श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा कर यात्रियों का जोरदार स्वागत किया व मंगल यात्रा की कामना की।- यात्रा के पहले दिन श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव से पेरुमबदूर (श्रीपेरंबदूर) में प्रथम रात्रि विश्राम किया, जहां देर रात तक संगीतमय भजन संध्या का आयोजन किया गया। भक्तिमय माहौल में श्रद्धालु बाबा के भजनों पर झूमते नजर आए।
अकेले शुरू हुआ सफर, 5 सालों में बना बड़ा कारवां
इस साइकिल यात्रा का इतिहास बेहद प्रेरणादायी है। 5 साल पहले इस कठिन यात्रा की शुरुआत अकेले विक्रम सिंह जोधा (रामा बाला) ने की थी। उन्होंने बाबा रामसा पीर के चरणों में साइकिल से पहुंचने का संकल्प लिया था। बीते 5 वर्षों से यह सिलसिला अनवरत जारी है। समय के साथ आस्था का यह पौधा वटवृक्ष रूप ले चुका है। जहां पिछले साल इस यात्रा में 13 श्रद्धालु शामिल थे, वहीं इस बार यह संख्या बढ़कर 23 हो गई है। (साथ ही गाड़ी ड्राइवर शंकर लाल जी माली और साइकिल मैकेनिक श्रवण नाथ जी सहित कुल 25 सदस्यों की टीम इस दल का हिस्सा है)।

जाखड़ी गांव के दो युवा भी शामिल; सबसे कम उम्र का यात्री 18 वर्ष का
रानीवाड़ा (जालौर) क्षेत्र के जाखड़ी गांव के दो होनहार व धर्मप्रेमी युवाओं ने इस पैदल/साइकिल जत्थे में शामिल होकर क्षेत्र का मान बढ़ाया है। जाखड़ी के नुकुल सिंह देवड़ा (सुपुत्र श्री भूपेन्द्र सिंह जी देवड़ा) तथा भरत सिंह (सुपुत्र श्री बाबूसिंह जी रावणा राजपूत) इस दल में शामिल हैं। इस बार यात्रा का मुख्य आकर्षण दल के युवाओं का उत्साह है, जिसमें सबसे कम उम्र का श्रद्धालु मात्र 18 वर्ष का है।

दानदाताओं और सेवाभावियों का अनूठा सहयोग
यह कठिन यात्रा विक्रम सिंह जोधा के कुशल नेतृत्व, राहुल सिंह राजपुरोहित (मादड़ी) की देख-रेख और भामाशाह हितेश जैन (दादाल-जालोर) के विशेष सहयोग से आयोजित हो रही है। पूरे 23 श्रद्धालुओं के लिए आधुनिक साइकिलों की संपूर्ण व्यवस्था हितेश जैन दादाल की तरफ से की गई है, जिसकी सर्वत्र सराहना हो रही है। यात्रा के साथ सामग्री व सहयोग के लिए गाड़ी ड्राइवर शंकर लाल जी माली (ढूंढा लंबोडी) और साइकिल मैकेनिक श्रवण नाथ (बड़ा गुड़ा, सोजत) भी निरंतर साथ चल रहे हैं।

एक महीने में लगभग 2000 किमी का सफर, लक्ष्य रक्षाबंधन
चेन्नई से रामदेवरा तक की दूरी लगभग 2,000 किलोमीटर से अधिक है। श्रद्धालुओं का लक्ष्य लगभग एक महीने की निरंतर साइकिल यात्रा पूरी कर रक्षाबंधन के पावन पर्व तक बाबा रामदेव जी के दरबार में धोक लगाना और ध्वजा चढ़ाना है।

लोक देवता बाबा रामदेव जी की महिमा और भादवा मेला
- कलयुग के अवतारी 'रामसा पीर': राजस्थान के जैसलमेर जिले के पोकरण के पास स्थित रामदेवरा (रूणेचा) में बाबा रामदेव जी का भव्य मंदिर स्थित है। बाबा रामदेव जी को कलयुग में भगवान श्रीकृष्ण का अवतार माना जाता है। उन्होंने समाज से ऊंच-नीच, छुआछूत और भेदभाव को मिटाकर 'सद्भाव और समरसता' का संदेश दिया। हिंदू उन्हें 'बाबा रामदेव' और मुस्लिम समुदाय उन्हें 'रामसा पीर' के रूप में पूजता है।

- मक्का से आए पीरों ने माना था लोहा: किंवदंती है कि मक्का से आए पांच पीरों ने बाबा की परीक्षा ली थी। जब बाबा ने उन्हें अपने चमत्कार से मक्का में छूटे उनके ही बर्तनों में भोजन कराया, तो पीरों ने नतमस्तक होकर कहा था— "हम तो पीर हैं, पर आप पीरों के पीर 'रामसा पीर' हैं।"

- कब लगता है लक्खी मेला?
बाबा रामदेवरा का प्रसिद्ध लक्खी मेला प्रतिवर्ष भाद्रपद माह की शुक्ल पक्ष द्वितीया (बाबे री बीज) से शुरू होकर एकादशी तक आयोजित होता है। इस मेले में देश-विदेश (विशेषकर राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, पंजाब, मध्य प्रदेश और तमिलनाडु) से लाखों श्रद्धालु पैदल, साइकिल और वाहनों के जरिए बाबा के दर्शन करने और मन्नतें मांगने पहुंचते हैं।







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