जालोर, राजस्थान: राज्य सरकार की एक अनूठी और किसान-हितैषी पहल ने जालोर जिले के किसानों में नई उम्मीद जगाई है। 2025-26 के बजट में की गई घोषणा के तहत, छोटे और सीमांत किसानों को बैलों से खेती करने के लिए हर साल 30,000 रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। इस योजना का मकसद पारंपरिक खेती को बढ़ावा देना, लागत कम करना और किसानों की आय में वृद्धि करना है।

सेवा शिविर में मिला सम्मान और सहायता
शनिवार को जालोर की ग्राम पंचायत धानोल में आयोजित हुए ग्रामीण सेवा शिविर में इस योजना का एक शानदार उदाहरण देखने को मिला। किसान चुणाराम कोली को पशुपालन विभाग के अधिकारियों ने उनके बैलों का हेल्थ सर्टिफिकेट सौंपा। यह सर्टिफिकेट इस बात का प्रमाण था कि उनके बैल खेती के लिए पूरी तरह से स्वस्थ हैं, और इसी के आधार पर उन्हें 30,000 रुपये की प्रोत्साहन राशि मिलेगी। इस राशि से चुणाराम कोली को अपनी खेती में बड़ी मदद मिलेगी और वे बैलों से खेती को और बेहतर तरीके से कर पाएंगे। यह कदम सिर्फ एक आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि किसानों के पारंपरिक ज्ञान और मेहनत का सम्मान है।
सरकार की दूरदर्शिता और किसानों का आभार
किसान चुणाराम कोली ने इस मौके पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का विशेष रूप से आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह योजना छोटे किसानों के लिए वरदान साबित होगी। इसके साथ ही, उन्होंने ब्लॉक विकास अधिकारी हेमलता विश्नोई और पशुपालन विभाग के डॉ. नवीन कुमार सहित पूरी टीम का भी धन्यवाद किया, जिन्होंने यह सुनिश्चित किया कि योजना का लाभ सही व्यक्ति तक पहुँचे।
यह योजना दिखाती है कि सरकार न केवल आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा दे रही है, बल्कि अपनी जड़ों से जुड़ी खेती की पद्धतियों को भी महत्व दे रही है। यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह ख़बर सर्कल न्यूज़ नेटवर्क द्वारा प्रकाशित की गई है।



