मेहसाणा आरटीओ का बड़ा खुलासा: फर्जी नंबर प्लेट लगाकर दौड़ रहीं बसें, भ्रष्टाचार की तीखी दुर्गंध! आरटीओ की कार्रवाई से उठा लग्जरी बस रैकेट का पर्दा, क्या भीनमाल के डीटीओ विभाग की है मिलीभगत?
मेहसाणा/भीनमाल: गुजरात के मेहसाणा में आरटीओ की एक कार्रवाई ने राजस्थान के परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मेहसाणा आरटीओ द्वारा पकड़ी गई एक राजस्थान पासिंग लग्जरी बस ने सिर्फ सरकारी खजाने को चूना लगाने का खुलासा नहीं किया है, बल्कि इससे एक बड़े संगठित रैकेट की बू आ रही है।
क्या है पूरा मामला?
बीती 25 जनवरी 2026 को मेहसाणा आरटीओ की टीम ने मेवड़ टोल नाके पर एक पीली लग्जरी बस को रोका। बस पर नंबर प्लेट RJ-21-PB-1007 लगी थी। जब आरटीओ अधिकारियों ने टैक्स के दस्तावेज मांगे, तो चालक कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सका। गाड़ी को डिटेन कर जब जांच की गई, तो चौंकाने वाला सच सामने आया—बस का असली नंबर RJ-46-PA-1527 था। टैक्स चोरी के डर से मालिक ने न केवल नंबर प्लेट बदली, बल्कि सरकार को लाखों का आर्थिक चूना भी लगाया। भीनमाल डीटीओ ऑफिस से आए ईमेल से पूरी बात का खुलासा हुआ।

भीनमाल से चल रहा है ‘नंबर गेम’?
सूत्रों का कहना है कि भीनमाल से ऐसी न जाने कितनी बसें रोज गुजरात और अन्य राज्यों की सीमाओं में दाखिल होती हैं। यह सवाल अब जोर पकड़ रहा है कि क्या यह महज एक घटना है या एक सोची-समझी साजिश? अगर एक बस फर्जी नंबर प्लेट के साथ पकड़ी जा सकती है, तो ऐसी और कितनी गाड़ियां सड़कों पर बेखौफ दौड़ रही होंगी? क्या भीनमाल का परिवहन विभाग (DTO) अनजान है, या फिर यह उनकी मिलीभगत का परिणाम है?

‘कुंभकर्णी नींद’ या ‘सेटिंग’ का खेल?
इस घटना ने राजस्थान के डीटीओ विभाग की भूमिका को कठघरे में खड़ा कर दिया है। सवाल यह है कि:
- क्या डीटीओ कार्यालय ‘कुंभकर्णी नींद’ में सो रहा है?
- क्या अधिकारियों और बस ऑपरेटरों के बीच कोई ‘सेटिंग’ चल रही है?
- इन अवैध बसों के फिटनेस, परमिट और टैक्स की जांच समय पर क्यों नहीं होती?
इस पूरी घटना से भ्रष्टाचार की तीखी दुर्गंध आ रही है। अगर भीनमाल डीटीओ कार्यालय ने अभी भी अपनी कार्यशैली नहीं सुधारी और इन ‘फर्जी’ नंबरों वाली बसों पर नकेल नहीं कसी, तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि सरकारी खजाने की लूट में रसूखदार बस ऑपरेटरों को संरक्षण प्राप्त है।
Circle News Network मांग करता है कि इस मामले की उच्च स्तरीय जांच हो और भीनमाल से संचालित होने वाली ऐसी सभी संदिग्ध बसों के दस्तावेजों का ऑडिट किया जाए।



