भारतीय किसान संघ ने मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन; नर्मदा नहर का पानी तालाबों में डालने और फसल बीमा पोर्टल अपडेट करने की भी रखी प्रमुख मांग
जालोर/रानीवाड़ा। भारतीय किसान संघ ने कृषि भूमि की विरासत को लेकर एक बड़ा और नीतिगत मुद्दा उठाते हुए भानेजों को ननिहाल की संपत्ति के हक से बेदखल करने की मांग की है। मुख्यमंत्री के नाम सौंपे गए ज्ञापन में संघ ने स्पष्ट कहा है कि कृषि भूमि में बहनों के नाम पीहर पक्ष में जोड़े जाते हैं, लेकिन बहन की मृत्यु के बाद उनकी संतान (भानेजों) का नाम ननिहाल की संपत्ति में नहीं जुड़ना चाहिए। इस मांग ने क्षेत्र में एक नई चर्चा छेड़ दी है।

जल संकट और नर्मदा नहर पर फोकस
ज्ञापन में क्षेत्र के जल संकट को दूर करने के लिए ठोस सुझाव दिए गए हैं। किसानों ने मांग की है कि गुजरात से राजस्थान में प्रवेश करने वाली नर्मदा नहर के ‘रडका’ पॉइंट से लिफ्ट नहर निकालकर रानीवाड़ा, भीनमाल और सांचौर के उन ग्रामीण बांधों व तालाबों को भरा जाए जो अब तक वंचित हैं। विशेष रूप से बोरली नाडी, धानोल स्टोरेज और जखाडी नाडी जैसे जल स्रोतों को नर्मदा के ओवरफ्लो पानी से भरने की अपील की गई है, ताकि भूजल स्तर सुधर सके और मवेशियों को मीठा पानी मिल सके।
किसानों ने प्रशासन को जल जीवन मिशन और बिजली दरों के मुद्दों पर भी घेरा:
* नल तो लगे, पर पानी नहीं: जल जीवन मिशन के तहत ढाणियों में पाइपलाइन बिछा दी गई है, लेकिन नलों में पानी नहीं आ रहा है।
* बिजली दरों में भेदभाव: घरेलू सिंगल फेस कनेक्शन की अलग-अलग दरों को समाप्त कर पूरे प्रदेश में समान दरें लागू करने की मांग की गई है।
* फसल बीमा और अनुदान: वर्ष 2025 की खरीफ फसल का दोबारा सर्वे करवाकर आदान अनुदान देने और बीमा राशि का डेटा पोर्टल पर जल्द शो करने की मांग रखी गई है।
इस अवसर पर भारतीय किसान संघ के पदाधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि किसान हित में इन मांगों पर जल्द फैसला नहीं लिया गया, तो आगामी रणनीति तैयार की जाएगी।



