सफर बना जी का जंजाल: तत्काल खुलते ही 'रिग्रेट', संघर्ष समिति ने रेल मंत्री से लगाई गुहार
सर्किल न्यूज नेटवर्क मोदरान/जालोर। जालोर-सिरोही क्षेत्र के प्रवासियों और स्थानीय यात्रियों के लिए जीवन रेखा मानी जाने वाली भगत की कोठी - एम.जी.आर चेन्नई सेंट्रल सुपरफास्ट एक्सप्रेस (20625/20626) इन दिनों खुद 'बीमार' नजर आ रही है। बीमारी है—ओवरलोडिंग और भारी भीड़ की। इस रूट पर सफर करना अब यात्रियों के लिए किसी जंग जीतने जैसा हो गया है। कंफर्म टिकट मिलना तो दूर, वेटिंग लिस्ट भी इतनी लंबी है कि ऑनलाइन सिस्टम सीधे 'रिग्रेट' (बुकिंग बंद) का बोर्ड टांग देता है।

1 मिनट का खेल और टिकट गायब!
मोदरान, भीनमाल, रानीवाड़ा, धनेरा, भीलडी, पाटन और साबरमती जैसे प्रमुख स्टेशनों से चेन्नई की तरफ जाने वाले यात्रियों की तादाद हजारों में है। आलम यह है कि सुबह 11 बजे जब तत्काल खिड़की खुलती है, तो पलक झपकते ही यानी मात्र 1 मिनट के भीतर सीटें फुल हो जाती हैं। इसके बाद शुरू होता है दलालों के चक्कर काटने और जनरल डिब्बे में भेड़-बकरियों की तरह ठंसकर सफर करने का मजबूरी भरा सफर। इसका सबसे ज्यादा खामियाजा दक्षिण भारत में कारोबार करने वाले व्यापारियों, पढ़ाई करने वाले छात्रों और इलाज के लिए जाने वाले मरीजों को भुगतना पड़ रहा है।
आशापुरी माताजी रेल संघर्ष समिति ने खोला मोर्चा
यात्रियों की इस जायज पीड़ा को देखते हुए आशापुरी माताजी रेल संघर्ष समिति ने अब सीधे रेल मंत्रालय के खिलाफ हुंकार भरी है। समिति के पदाधिकारियों ने रेल मंत्री और उत्तर पश्चिम रेलवे के उच्च अधिकारियों को पत्र भेजकर इस रूट की सुध लेने की मांग की है।
"यह ट्रेन इस क्षेत्र के प्रवासियों के लिए रीढ़ की हड्डी है। रेलवे केवल राजस्व कमा रहा है, लेकिन सुविधाओं के नाम पर यात्रियों को भगवान भरोसे छोड़ दिया गया है।"
समाधान पर ध्यान: ये कदम उठाना बेहद जरूरी
समस्या विकट है, लेकिन अगर रेलवे प्रशासन चाहे तो इन 3 व्यावहारिक कदमों से यात्रियों को तुरंत राहत मिल सकती है:
- सप्ताह में सातों दिन चले ट्रेन: वर्तमान में यह ट्रेन नियमित नहीं है। यात्रियों के भारी दबाव को देखते हुए इसे दैनिक (Daily) किया जाना सबसे बड़ा और स्थाई समाधान है।
- स्थाई रूप से जुड़ें अतिरिक्त कोच: स्लीपर से लेकर थर्ड एसी और सेकेंड एसी में लंबी वेटिंग को देखते हुए ट्रेन में तुरंत 3 से 4 अतिरिक्त कोच स्थाई रूप से बढ़ाए जाने चाहिए।
- नई स्पेशल ट्रेन की शुरुआत: समदड़ी-भीलड़ी रेल मार्ग पर बढ़ रहे ट्रैफिक को बांटने के लिए इस रूट पर एक नई साप्ताहिक या द्विसाप्ताहिक स्पेशल ट्रेन का संचालन तुरंत शुरू किया जाए।
...तो आंदोलन की राह पकड़ेगी जनता
क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों और संघर्ष समिति ने रेलवे को साफ चेतावनी दी है कि यदि इस गंभीर समस्या का जल्द समाधान नहीं किया गया, तो क्षेत्र की जनता चुप नहीं बैठेगी। अब देखना यह है कि करोड़ों का राजस्व देने वाले इस रूट पर रेल मंत्रालय कब तक राहत की हरी झंडी दिखाता है।







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