सिरोही। सिरोही जिला परिषद चुनाव अब अपने सबसे दिलचस्प और कांटेदार मोड़ पर पहुंच चुका है। जिले की 27 सीटों पर तस्वीर साफ होते ही सियासी पारा सातवें आसमान पर है। जिला प्रमुख की कुर्सी पर कब्जा जमाने के लिए भाजपा और कांग्रेस ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है, लेकिन इस बार का चुनावी समीकरण केवल दो दलों तक सीमित नहीं रह गया है। 9 सीटों पर जहां दोनों मुख्य दलों में आमने-सामने की भिड़ंत है, वहीं 10 सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिल रहा है। इसके अलावा 7 सीटें ऐसी हैं जहां 4 से 7 प्रत्याशी ताल ठोक कर मुकाबले को बहुकोणीय और बेहद अनिश्चित बना रहे हैं।
BAP की धमक: आदिवासी बेल्ट में किसका बिगड़ेगा गणित?
इस चुनाव में सबसे बड़ा 'एक्स फैक्टर' बनकर उभरी है भारत आदिवासी पार्टी (BAP)। पार्टी ने जिले के 10 वार्डों में अपने उम्मीदवार उतारकर दोनों प्रमुख दलों के कान खड़े कर दिए हैं। खासतौर पर आबूरोड और पिंडवाड़ा की आदिवासी पट्टी में BAP की सक्रियता ने कांग्रेस और भाजपा—दोनों के रणनीतिकारों का सिरदर्द बढ़ा दिया है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि BAP का यह उभार भाजपा के वोटों में सेंध लगाएगा या कांग्रेस का पारंपरिक वोट बैंक छीनेगा। अंदरखाने दोनों ही दल इस नए सियासी खतरे का सटीक आकलन करने में जुटे हैं।
भीतरघात और बगावत का साया
कागजों पर दोनों दल बहुमत का दावा ठोक रहे हैं, लेकिन हकीकत यह है कि दोनों ही खेमों में बगावत की आग सुलग रही है। कई सीटों पर पार्टी के बागी और असंतुष्ट कार्यकर्ता निर्दलीय मैदान में डट गए हैं, जिससे आधिकारिक प्रत्याशियों की नींद उड़ी हुई है।
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कांग्रेस का रुख: निकाय चुनावों के झटकों से सबक लेते हुए कांग्रेस इस बार अपेक्षाकृत एकजुट दिख रही है। पूर्व विधायक संयम लोढ़ा खुद फ्रंटफुट पर आकर कमान संभाले हुए हैं और जिलेभर के नेताओं को एकजुट कर जीत का खाका खींच रहे हैं।
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भाजपा की रणनीति: नगर निकाय चुनाव परिणामों के बाद भाजपा फूंक-फूंक कर कदम रख रही है और बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय कर अपनी व्यूहरचना मजबूत करने में लगी है।
हॉट सीट्स: जब आमने-सामने टकराए 'प्रमुख' पद के दावेदार
जिला परिषद का यह चुनाव केवल वार्ड पार्षदों का नहीं, बल्कि सीधे तौर पर भावी जिला प्रमुख की लड़ाई है। कई सीटों पर तो प्रमुख पद के दावेदार सीधे एक-दूसरे के खिलाफ ताल ठोक रहे हैं:
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वार्ड नंबर 4 (सुपर हॉट मुकाबला): यहां कांग्रेस के दिग्गज नेता गुमान सिंह देवड़ा (मेरमंडवाड़ा) और भाजपा के जिला महामंत्री गणपत सिंह राठौड़ आमने-सामने हैं। इस सीट के नतीजे पर पूरे जिले की नजरें टिकी हैं।
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आमने-सामने की दूसरी जंग: इसी तरह भाजपा के नारायण लाल पुरोहित (मंडवारिया) के सामने कांग्रेस के नरेंद्र सिंह देवड़ा ताल ठोक रहे हैं, जिससे मुकाबला बेहद कड़ा हो गया है।
भाजपा में अंदरूनी रस्साकशी, कांग्रेस में लोढ़ा का मिशन
प्रमुख पद की दावेदारी को लेकर भाजपा के भीतर भी समीकरण बेहद दिलचस्प हैं:
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गणपत सिंह राठौड़ का मजबूत दावा: पिछली बार अर्जुनराम पुरोहित को मौका मिलने के बाद इस बार गणपत सिंह राठौड़ अपनी दावेदारी को सबसे पुख्ता मान रहे हैं। उन्हें सांसद लुंबाराम चौधरी, मंत्री ओटाराम देवासी और भाजपा जिलाध्यक्ष रक्षा भंडारी का खुला समर्थन हासिल है, साथ ही प्रदेश नेतृत्व के बड़े नेताओं का वरदहस्त भी उनकी ताकत बढ़ा रहा है।
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नारायण पुरोहित की ताकत: दूसरी तरफ सेवाभावी छवि और मजबूत आर्थिक व सामाजिक पकड़ रखने वाले नारायण लाल पुरोहित भी मैदान में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं।
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कांग्रेस का खेमा: कांग्रेस से गुमान सिंह देवड़ा, नारायण सुथार और नरेंद्र सिंह देवड़ा प्रमुख पद की रेस में आगे चल रहे हैं। पूर्व विधायक संयम लोढ़ा हर हाल में जिला परिषद पर कांग्रेस का परचम लहराने के लिए दिन-रात एक किए हुए हैं।
27 वार्डों में बिखरे वोटों के इस जाल में बागी किसका खेल बिगाड़ेंगे और BAP किसे झटका देगी, इसका अंतिम फैसला मतदान के बाद ही होगा; लेकिन इतना तय है कि सिरोही जिला प्रमुख की यह जंग राजस्थान की सबसे दिलचस्प सियासी लड़ाइयों में से एक बन चुकी है।
Input - Mahaveer Ji Jain









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