राजस्थान, गुजरात और एमपी के पशुपालक जमाएंगे डेरा; कांकरेज बैल और मालाणी घोड़ों के बीच होंगी रोमांचक प्रतियोगिताएं
[लोक संस्कृति और पशुधन का महाकुंभ] मारवाड़ की पावन धरा पर पशुधन केवल संपत्ति नहीं, बल्कि हमारी गौरवशाली ग्रामीण संस्कृति का आधार है। सेवाड़िया के ऐतिहासिक श्री आपेश्वर महादेव मंदिर की छत्रछाया में आयोजित होने वाला यह वार्षिक पशु मेला न केवल व्यापार का केंद्र है, बल्कि यह पशुपालकों की मेहनत और बेहतरीन नस्लों के संरक्षण का उत्सव भी है। आधुनिकता के दौर में भी अपनी जड़ों को थामे हुए यह मेला ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने की दिशा में एक सशक्त कदम है।
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जालोर/रानीवाड़ा। राज्य के पंचायती राज विभाग द्वारा हर वर्ष की भाँति इस वर्ष भी प्रसिद्ध धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थल सेवाड़िया में ‘श्री आपेश्वर महादेव पशु मेले’ का आयोजन किया जा रहा है। यह मेला चैत्र शुक्ल एकादशी (29 मार्च) से शुरू होकर वैशाख कृष्ण द्वितीया (4 अप्रैल) तक चलेगा। मेले का विधिवत शुभारंभ रविवार, 29 मार्च को प्रातः 10 बजे ध्वजारोहण के साथ किया जाएगा।
प्रशासनिक तैयारियों का लिया जायजा मेले के सफल और सुव्यवस्थित आयोजन को लेकर रानीवाड़ा उपखण्ड अधिकारी एवं मेला मजिस्ट्रेट सुनील कुमार तथा रानीवाड़ा विकास अधिकारी (BDO) सुश्री हेमलता बिश्नोई ने मेला स्थल का विस्तृत दौरा किया। अधिकारियों ने सुरक्षा, पेयजल, रोशनी और पशुपालकों के लिए जरूरी सुविधाओं का निरीक्षण कर संबंधित विभागों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
विभिन्न राज्यों से जुटेंगे पशुपालक विकास अधिकारी हेमलता बिश्नोई ने बताया कि इस मेले की ख्याति दूर-दूर तक फैली है। इसमें राजस्थान के विभिन्न जिलों के अलावा पड़ोसी राज्य गुजरात और मध्य प्रदेश से भी बड़ी संख्या में पशुपालक अपने उन्नत नस्ल के पशुओं के साथ शिरकत करेंगे।
प्रतियोगिताएं होंगी मुख्य आकर्षण मेले के दौरान 2 अप्रैल (गुरुवार) को विभिन्न पशु प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा, जो दर्शकों के आकर्षण का केंद्र रहेंगी:
- कांकरेज बैल: दंतहीन से लेकर पूर्ण दांत (मलतियान) श्रेणी के बैलों की प्रतियोगिता।
- मालाणी नस्ल घोड़ा: सुंदर बछेरी, बछेरा और नर घोड़ों की सौंदर्य प्रतियोगिता।
- घोड़ा दौड़: सभी नस्लों के लिए ‘रेवाल’ और ‘सरपट’ चाल की दौड़।
- सिंघाण नस्ल: विशेष सुंदर प्रतियोगिता (नर व मादा)।
- ऊँट प्रतियोगिता: ऊँटों की कदम ताल, सरपट दौड़ और सौंदर्य प्रतियोगिता।
विजेताओं को मिलेगा सम्मान प्रत्येक श्रेणी में प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले पशुपालकों को प्रशासन की ओर से पारितोषिक और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया जाएगा।
पशुपालकों के लिए महत्वपूर्ण निर्देश मेला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले सभी पशुपालकों को अपना आधार कार्ड या पहचान पत्र साथ लाना अनिवार्य होगा। बिना पहचान पत्र के नामांकन स्वीकार नहीं किया जाएगा।



