संगठन ने उप-प्राचार्य पद को 'Dying Cadre' घोषित करने के प्रस्ताव को बताया 'अव्यावहारिक' और 'शिक्षा हित के विपरीत'
जालोर, 10 दिसंबर 2025। राजस्थान शिक्षा सेवा परिषद (उप-प्राचार्य) (RESA-VP) ने विद्यालय शिक्षा विभाग द्वारा उप-प्राचार्य (Vice-Principal) पद को 'Dying Cadre' (समाप्त होने वाला कैडर) घोषित करने की प्रक्रिया पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। आज संगठन ने जिला कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें इस कार्यवाही को शिक्षा तंत्र के लिए अत्यंत चिंताजनक बताया गया है।
📌 शैक्षिक प्रबंधन का आधार है उप-प्राचार्य
प्रदेश कोषाध्यक्ष चेतन जांगु ने मीडिया को बताया कि विद्यालयों में सुचारु प्रबंधन के लिए उप-प्राचार्य का पद अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा, "शैक्षिक प्रबंधन, छात्रों के बीच अनुशासन बनाए रखने, परामर्श सेवाओं और प्रशासनिक समन्वय की पूरी व्यवस्था उप-प्राचार्य स्तर पर संचालित होती है। ऐसे में इस महत्त्वपूर्ण पद को समाप्त करना न केवल अव्यावहारिक है, बल्कि इससे विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और जिम्मेदारी निर्धारण की पूरी संरचना प्रतिकूल रूप से प्रभावित होगी।"
📌 पद को समाप्त करने का प्रस्ताव शिक्षा हित के विरुद्ध
रेसा-वीपी के प्रतिनिधि कपूर सिंह राजपुरोहित ने जोर देते हुए कहा कि विद्यालयों में नेतृत्व संरचना में उप-प्राचार्य की भूमिका केंद्रीय है। उन्होंने मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर ध्यान दिलाया:
- उप-प्राचार्य पद स्कूल प्रबंधन और शैक्षिक गुणवत्ता का महत्त्वपूर्ण आधार स्तम्भ है।
- यह पद प्रधानाचार्य और शिक्षकों के बीच एक मजबूत पुल का काम करता है।
- इसलिए, इस पद को Dying Cadre घोषित कर समाप्त करने का प्रस्ताव शिक्षा हित के सर्वथा विपरीत है।
प्रदेश उपाध्यक्ष प्रगतिशील ने बताया कि रेसा-वीपी संगठन ने मुख्यमंत्री से विनम्र अनुरोध किया है कि जनहित और शिक्षा के व्यापक हित को ध्यान में रखते हुए उप-प्राचार्य पद को यथावत रखा जाए। उन्होंने मांग की कि इस संबंध में तत्काल आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाएं, ताकि राज्य की विद्यालयीन शिक्षा व्यवस्था अधिक प्रभावी और उत्तरदायी रूप में संचालित हो सके।
📌 ज्ञापन सौंपने वाली टीम
मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपने वालों में प्रमुख रूप से कपूर सिंह राजपुरोहित, देवेश दुआ (कार्यक्रम अधिकारी), जालाराम खीचड़ (उप-प्राचार्य और प्रदेश उपाध्यक्ष प्रगतिशील), रमेश पारीक (कार्यक्रम अधिकारी), भंवरु खां (उप-प्राचार्य, डुडसी), चेतन कुमार जांगु (प्रदेश कोषाध्यक्ष, रेसा-वीपी), मदन लाल (कार्यक्रम अधिकारी), ओमप्रकाश जांगु (दांतीवास), और मुश्ताक खां (जालोर) उपस्थित रहे।







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