वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान: सेलड़ी में लहलहाई 7 हजार पौधों की वाटिका, 122 वर्ष पुराने बांकली बांध की जल प्रबंधन व्यवस्था को भी सराहा
जालोर। जिले में 'वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान' के तहत बुधवार को मीडियाकर्मियों के एक विशेष दल ने सेलड़ी, भंवरानी और बांकली बांध का फील्ड भ्रमण किया। 25 मई से 5 जून तक चलने वाले इस विशेष अभियान के तहत आयोजित इस विजिट के दौरान मीडियाकर्मियों ने जिले की प्राचीन और आधुनिक जल संचय पद्धतियों को करीब से देखा और समझा।

सदियों पुराना भंवरानी तालाब: मवेशियों का सहारा, अद्भुत स्थापत्य
भ्रमण दल सबसे पहले भंवरानी गांव के ऐतिहासिक तालाब पर पहुंचा। यह तालाब सदियों से प्राकृतिक प्रवाह के अनुरूप जल को संरक्षित करता आ रहा है। आज भी यह आस-पास के ग्रामीणों सहित हजारों मवेशियों के लिए पेयजल का एकमात्र मुख्य स्रोत बना हुआ है।
मीडियाकर्मियों ने इस तालाब के नैसर्गिक सौंदर्य को निहारने के साथ ही ग्रामीणों से इसके धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व की जानकारी ली। सदियों पुरानी इस पारंपरिक जल संरक्षण तकनीक की सभी ने सराहना की। इस दौरान प्रशासक गोविंदराम सुथार, ईश्वरसिंह भंवरानी सहित कई ग्रामीण मौजूद रहे।

गौचर भूमि पर हरियाली: ड्रिप सिंचाई से महकी वाटिका
इसके बाद भूजल ग्रहण विकास एवं भूजल विभाग द्वारा सेलड़ी ग्राम की गौचर भूमि पर किए गए बेहतरीन कार्यों का अवलोकन कराया गया। यहाँ वानिकी एवं फलदार पौधारोपण कार्यक्रम के तहत लगाई गई 5000 फलदार और 2000 छायादार पौधों की वाटिका को मीडिया ने देखा।
आधुनिक ड्रिप सिंचाई (बूंद-बूंद सिंचाई पद्धति) के सटीक प्रबंधन के कारण आज इस ऊजड़ गौचर भूमि पर गूंदा, बेर, आंवला, अनार, शीशम, नीम और रोहिड़ा के पेड़ लहलहा रहे हैं। जिला प्रशासन के इन पर्यावरण सुधार प्रयासों की मौके पर काफी प्रशंसा की गई।
सन् 1904 में बना बांकली बांध: आज भी भरा पूरा, पेटे में हो रही खरबूजों की खेती
भ्रमण के अंतिम चरण में मीडियाकर्मियों ने वर्ष 1904 (122 वर्ष पूर्व) में निर्मित ऐतिहासिक बांकली बांध का अवलोकन किया। दल ने बांध के जल ग्रहण क्षेत्र, नहरों के नेटवर्क, फाटकों के संचालन और गेज प्रणाली को समझा।
सिंचाई विभाग के जेईएन मनीष गोदारा व कैलाश शर्मा ने बताया कि इस बांध से जालोर की आहोर तहसील के 8 गांवों (बांकली, तोड़मी, रेवड़ा कल्ला, घाणा, बिजली, भोरड़ा, रामा व बाला) तथा पाली जिले की रोहट तहसील के सिराणा ग्राम को सिंचाई का पानी मिलता है। वहीं सेलड़ी और पाती की भूमि पर पेटाकाश्त की सुविधा उपलब्ध है। वर्तमान में बांध के पेटाकाश्त में बड़े पैमाने पर हो रही खरबूजों की खेती को भी मीडिया दल ने देखा और लाभांवित किसानों से संवाद किया।







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