केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव व मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने किया वर्चुअली उद्घाटन, बोले सीएम— मार्च में आई नीति का दिखने लगा असर, ग्लोबल हब बनेगा अलवर-भिवाड़ी क्षेत्र
भिवाड़ी/जयपुर। राजस्थान के औद्योगिक विकास में शुक्रवार को एक नया इतिहास रच गया। दिल्ली-एनसीआर से सटे अलवर जिले के औद्योगिक क्षेत्र भिवाड़ी (सैलारपुर-खुशखेड़ा) में देश के पहले लघु व मध्यम उद्योग (SME) संचालित सेमीकंडक्टर प्लांट का भव्य उद्घाटन किया गया। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव की गरिमामयी उपस्थिति में ‘सहासरा सेमीकंडक्टर्स’ के इस अत्याधुनिक प्लांट तथा ‘एल्सिना इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर’ (EMC) का वर्चुअली लोकार्पण किया।

भू-राजनीतिक दृष्टि से मील का पत्थर इस अवसर पर नई दिल्ली से वर्चुअली जुड़ते हुए केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि आज का दिन राजस्थान के लिए ऐतिहासिक है। सेमीकंडक्टर एक ऐसा रणनीतिक क्षेत्र है, जिसकी धाक आज पूरी दुनिया और वैश्विक राजनीति में है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के कारण पिछले 12 वर्षों में देश का इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन 6 गुना बढ़कर 13 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। आज मोबाइल फोन भारत का सबसे बड़ा निर्यात उत्पाद बन चुका है।
मार्च में बनी नीति, मई में दिखे नतीजे समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार राजस्थान को देश का अग्रणी मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी कड़ी में मार्च 2026 में ‘राजस्थान सेमीकंडक्टर नीति’ लाई गई थी, जिसके सकारात्मक परिणाम महज दो महीनों में ही धरातल पर दिखने लगे हैं। दिल्ली-एनसीआर के नजदीक होने के कारण भिवाड़ी आने वाले समय में देश के इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर की रीढ़ बनेगा।
खबर के मुख्य बिंदु: क्यों खास है यह उपलब्धि?
- मेड इन राजस्थान—बिक रहा अमेरिका-फ्रांस में: सहासरा सेमीकंडक्टर्स का यह प्लांट 150 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से 57,000 वर्ग फीट में बना है। खास बात यह है कि यहां बनने वाली माइक्रो एसडी कार्ड, फ्लैश स्टोरेज और ई-सिम (eSIM) की 60 प्रतिशत से ज्यादा चिप्स अभी से ही अमेरिका, जर्मनी, फ्रांस, चीन और नेपाल जैसे देशों को निर्यात की जा रही हैं।
- सालाना 60 करोड़ यूनिट का लक्ष्य: वर्तमान में इस प्लांट की क्षमता सालाना 6 करोड़ सेमीकंडक्टर यूनिट पैकेजिंग की है, जिसे अगले 3 साल में बढ़ाकर 40 से 60 करोड़ करने की योजना है। इससे स्थानीय युवाओं के लिए उच्च तकनीक वाले रोजगार के रास्ते खुलेंगे।
- 1200 करोड़ का इलेक्ट्रॉनिक्स क्लस्टर: लोकार्पित किया गया ‘एल्सिना क्लस्टर’ 50.3 एकड़ में फैला है। इसमें केंद्र सरकार ने 20.24 करोड़ रुपये की सीधी वित्तीय सहायता दी है। इस क्लस्टर में 20 कंपनियों द्वारा 1200 करोड़ रुपये का निवेश किया जा रहा है, जिससे 2,700 से अधिक लोगों को सीधे रोजगार मिला है। यहां आइसां फिएम, ई-पैक ड्यूरेबल और डग्गर पावर जैसी दिग्गज कंपनियां काम शुरू कर चुकी हैं।



