घटिया सामग्री का खेल: बजट ठिकाने लगा गए ठेकेदार, पहली बारिश से पहले ही रिसने लगी स्कूल की छत; ग्रामीणों और संस्था प्रधान ने खोला मोर्चा
चितलवाना (जालोर)। शिक्षा के मंदिरों में बच्चों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करने का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। चितलवाना ब्लॉक के राजकीय प्राथमिक विद्यालय, जगमाल सेमाल की ढाणी (सिवाड़ा) में स्कूल भवन की छत मरम्मत के नाम पर सरकारी बजट को डकारने की बड़ी साजिश उजागर हुई है। ठेकेदार ने मरम्मत के नाम पर ऐसी ‘लीपापोती’ की है कि काम पूरा होने से पहले ही कमरों की छतों से पानी टपकना शुरू हो गया है, जिससे कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है।
साजिश का पर्दाफाश: कागजों में मरम्मत, हकीकत में बर्बादी विद्यालय के संस्था प्रधान श्रीराम जांगू और भूमिदाता विरदसिंह चौहान ने इस मामले को लेकर प्रशासन के खिलाफ बिगुल फूंक दिया है। मिली जानकारी के अनुसार, विभाग द्वारा छत मरम्मत के लिए बजट स्वीकृत कर संबंधित फर्म को कार्यादेश जारी किया गया था। लेकिन ठेकेदार ने घटिया स्तर की सामग्री और मानकों को ताक पर रखकर काम की इतिश्री कर दी। आलम यह है कि क्लासरूम्स में पहले की तरह ही पानी का रिसाव जारी है, जिससे न केवल मासूम बच्चों के सिर पर खतरा मंडरा रहा है, बल्कि सरकारी पैसे का भी सरेआम दुरुपयोग किया गया है।

प्रशासन को चेतावनी: ‘जब तक काम सही नहीं, तब तक भुगतान नहीं’ इस धांधली को लेकर संस्था प्रधान ने मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (CBEO) को कड़ा पत्र लिखकर मांग की है कि जब तक ठेकेदार गुणवत्तापूर्ण कार्य दोबारा नहीं करता, तब तक उसका भुगतान रोक दिया जाए। भूमिदाता ने भी मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला कलेक्टर और मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी को प्रतिलिपि भेजकर मौके पर भौतिक सत्यापन और जांच की मांग की है।
पिछली घटनाओं से भी नहीं लिया सबक शिकायत में स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि गत वर्ष प्रदेश में क्षतिग्रस्त भवनों के गिरने से भारी जनहानि हुई थी, इसके बावजूद विभाग और ठेकेदार की मिलीभगत बच्चों के भविष्य को खतरे में डाल रही है। अब देखना यह होगा कि जालोर प्रशासन इस ‘भ्रष्ट’ निर्माण पर क्या एक्शन लेता है या फिर किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जाएगा।



