सर्कल न्यूज़ नेटवर्क
जयपुर। राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग ने ग्राम पंचायतों में नियुक्त प्रशासकों/सरपंचों के मानदेय भुगतान को लेकर एक महत्वपूर्ण और कड़ा स्पष्टीकरण जारी किया है। हुकूमत के विभाग ने अपने ही पूर्व में जारी एक मार्गदर्शन पत्र को ‘अप्रभावी’ क़रार कर दिया है, जिससे मानदेय की उम्मीद लगाए बैठे प्रशासकों/सरपंचों को बड़ा झटका लगा है। विभाग ने साफ कर दिया है कि प्रशासकों/सरपंचों के मानदेय भुगतान के सिलसिले में अब केवल राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 और राजस्थान पंचायती राज नियम 1996 के कानूनी प्रावधान ही मान्य होंगे।

यह इज़हार ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायत विंग) के वित्तीय सलाहकार द्वारा एक आधिकारिक ज्ञापन के माध्यम से जारी किया गया है। यह ज्ञापन विशेष रूप से जिला परिषद्, श्रीगंगानगर, के मुख्य कार्यकारी अधिकारी को संबोधित है, जिसमें उल्लेख किया गया है कि ग्राम पंचायतों में नियुक्त प्रशासकों/सरपंचों के मानदेय के हवाले से विभाग द्वारा पूर्व में जारी मार्गदर्शन पत्र संख्या 17879/658 दिनांक 19.09.2025 अब ‘प्रावधान’ नहीं रहा है।
हुकूमत के इस नए अमल का सीधा असर उन प्रशासकों/सरपंचों पर पड़ेगा जो पिछले मार्गदर्शन पत्र के आधार पर अपने मानदेय के भुगतान की अपेक्षा कर रहे थे। इस इज़हार से यह स्पष्ट हो गया है कि मानदेय का निर्धारण और भुगतान अब सिर्फ़ विधायी नियमों के मुताबिक़ ही किया जाएगा, जिससे कई स्थानीय अधिकारियों की वित्तीय अपेक्षाओं को झटका लगा है। हुकूमत के इस आदेश ने मानदेय भुगतान के मामले में नियमों की सख्ती को अहमियत दी है।



