कागमाला, 14 जुलाई। शिक्षा के अधिकार को केवल कागजों तक सीमित न रखकर उसे धरातल पर उतारने का एक अनुकरणीय और प्रेरणादायी उदाहरण सिरोही जिले के कागमाला से सामने आया है। 'प्रवेशोत्सव 2026-27' के तहत चलाए गए एक विशेष सर्वे अभियान ने उन बच्चों के जीवन में नई आशा की किरण जगा दी है, जो गरीबी और अभावों के कारण अब तक स्कूल की चौखट तक नहीं पहुँच पाए थे।
अंधेरे से उजाले की ओर: भील बस्ती में जगी उम्मीद
राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय कागमाला के प्रधानाचार्य नारायण जीनगर और प्रभारी नरेश पंवार की टीम ने जब चकली मार्ग स्थित चांडपुरा-कागमाला की भील बस्ती में दस्तक दी, तो वहां कई ऐसे बच्चे मिले जो शिक्षा की मुख्यधारा से कोसों दूर थे। पेयजल की किल्लत, विद्यालय की दूरी और आर्थिक तंगहाली इन बच्चों के सपनों की राह में सबसे बड़ी बाधा बनी हुई थी। सर्वे में 21 ऐसे अनामांकित और ड्रॉपआउट बच्चों की पहचान की गई, जिनका भविष्य अंधकारमय नजर आ रहा था।

साक्षी फाउंडेशन बना 'सच्चा साथी'
इन बच्चों की सुध लेने के लिए 'साक्षी फाउंडेशन' आगे आया। फाउंडेशन के संरक्षक व अध्यक्ष नेपाल सिंह देवल की दूरदर्शी सोच और उनके द्वारा प्रेरित भामाशाहों—जितेंद्र प्रजापत, मालाराम देवासी और चुनाराम राणा ने इन 21 बच्चों को न केवल गले लगाया, बल्कि उन्हें अगले पांच वर्षों तक गोद लेने की ऐतिहासिक घोषणा की।
इस संकल्प के तहत बच्चों की शिक्षा का पूरा दायित्व फाउंडेशन ने अपने कंधों पर ले लिया है। अब इन बच्चों को विद्यालय की पोशाक (यूनिफॉर्म), स्कूल बैग, नोटबुक और शिक्षण सामग्री के लिए किसी के आगे हाथ नहीं फैलाना पड़ेगा। सबसे बड़ी सौगात—विद्यालय आने-जाने के लिए निःशुल्क वाहन सुविधा है, जिसने इन बच्चों के लिए स्कूल की दूरी को खत्म कर दिया है।
उत्साह के साथ हुआ बच्चों का 'श्रीगणेश'
कार्यक्रम के दौरान अतिरिक्त मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी रामेश्वरी विश्नोई, मुख्य प्रबंधक आगार सिरोही खेतसिंह राठौड़ (आरएएस) और अन्य गणमान्य नागरिकों की मौजूदगी में जब इन बच्चों को नई पोशाक और बैग के साथ स्कूल बस में बैठाया गया, तो उनके चेहरों पर जो मुस्कान थी, वह भामाशाहों की दरियादिली का प्रमाण दे रही थी। अतिथियों ने बच्चों को हरी झंडी दिखाकर विद्यालय के लिए रवाना किया।
शिक्षा के प्रति संवेदनशीलता: एक नजीर
नेपाल सिंह देवल के नेतृत्व में साक्षी फाउंडेशन द्वारा उठाए गए इस कदम की चहुंओर प्रशंसा हो रही है। कार्यक्रम में मौजूद अतिथियों ने अभिभावकों से संवाद करते हुए शिक्षा को जीवन की सबसे बड़ी संपत्ति बताया। प्रधानाचार्य नारायण लाल जीनगर ने कहा कि, "साक्षी फाउंडेशन का यह सहयोग मात्र वित्तीय सहायता नहीं है, बल्कि यह उन 21 परिवारों के लिए एक नया जीवन है। नेपाल सिंह देवल जी और उनकी टीम ने जो बीड़ा उठाया है, उससे न केवल नामांकन बढ़ेगा, बल्कि क्षेत्र में ड्रॉपआउट की दर भी शून्य की ओर जाएगी।"
यह पहल उन लोगों के लिए एक कड़ा संदेश है जो संसाधनों की कमी का हवाला देकर बच्चों को स्कूल नहीं भेजते। साक्षी फाउंडेशन ने यह साबित कर दिया है कि अगर समाज का हर वर्ग अपनी जिम्मेदारी समझे, तो देश के हर बच्चे के हाथों में कलम हो सकती है।







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