अधिकारी ने दी कड़ी चेतावनी: "इलाज किया तो खैर नहीं!" - मानसून में बढ़ी मुश्किल, ग्रामीण बेहाल
रानीवाड़ा, 29 जुलाई (सर्कल न्यूज़)। एक तरफ प्रदेश सरकार जहां स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं दूसरी तरफ जालोर जिले के रानीवाड़ा ब्लॉक से आई एक खबर ने इन दावों की पोल खोल कर रख दी है। खंड मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने एक चौंकाने वाला आदेश जारी कर ब्लॉक के 12 स्वास्थ्य केंद्रों को तत्काल प्रभाव से बंद करने के निर्देश दिए हैं। इन केंद्रों को 'जर्जर' और 'मरम्मत योग्य' बताकर उनमें किसी भी व्यक्ति के प्रवेश को पूरी तरह से निषिद्ध कर दिया गया है।
इतना ही नहीं, आदेश में स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि किसी भी कार्मिक ने इन भवनों में प्रवेश किया या उनके आसपास कार्य किया और कोई दुर्घटना हुई, तो उसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित कार्मिक की होगी और उसके खिलाफ कठोर विभागीय एवं वैधानिक कार्यवाही की जाएगी।

स्वास्थ्य कर्मियों के सामने "धर्म संकट": मरीजों का क्या होगा?
इस फरमान ने स्वास्थ्य कर्मियों के सामने 'धर्म संकट' खड़ा कर दिया है। एक ओर जहां वे मरीजों को बेहतर सुविधा देने के लिए प्रतिबद्ध हैं, वहीं दूसरी ओर उन्हें जर्जर भवनों में जान जोखिम में डालकर काम करने से रोका जा रहा है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब ये 12 स्वास्थ्य केंद्र बंद हो जाएंगे, तो रानीवाड़ा जैसे बड़े ब्लॉक के ग्रामीण क्षेत्रों में मरीजों का इलाज कहां और कैसे किया जाएगा? खासकर, वर्तमान वर्षा ऋतु के दौरान जहां मौसमी बीमारियों का प्रकोप बढ़ रहा है, ऐसे में स्वास्थ्य केंद्रों का बंद होना जनता के लिए भारी मुसीबत का सबब बन गया है।

इन 12 स्वास्थ्य केंद्रों पर लगा 'ताला':
खंड मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय, रानीवाड़ा द्वारा जारी आदेश क्रमांक / 2025 / 866-69, दिनांक 28.07.25 के अनुसार, जिन 12 स्वास्थ्य संस्थानों को जर्जर घोषित कर बंद करने के आदेश दिए गए हैं, वे निम्न प्रकार हैं:
- पीएचसी गांग
- सब सेंटर डाडोकी
- सब सेंटर दांतवाडा
- सब सेंटर बामनवाडा
- सब सेंटर कोट की ढाणी
- सब सेंटर डुंगरी
- सब सेंटर कुडा
- सब सेंटर चितरोडी
- सब सेंटर सांवलावास (पुराना भवन)
- सब सेंटर सांतरू
- सब सेंटर धामसिन
- सब सेंटर रतनपुर
मरम्मत की बात पर चुप्पी, सीधे बंद करने का आदेश: क्या है मंशा?
आदेश में भवनों की मरम्मत या उनके जीर्णोद्धार का कोई जिक्र नहीं है, सीधे तौर पर उन्हें बंद करने का निर्देश दिया गया है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या विभाग इन जर्जर भवनों की मरम्मत को लेकर गंभीर नहीं है? या फिर बजट के अभाव में यह सीधा कदम उठाया गया है? अधिकारी ने "त्वरित वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करें" का हवाला तो दिया है, लेकिन ज़मीनी स्तर पर इन 12 सेंटरों के लिए रातोंरात क्या वैकल्पिक व्यवस्था होगी, यह स्पष्ट नहीं है। ग्रामीणों और स्वास्थ्य संगठनों ने सरकार से तुरंत इस मामले में हस्तक्षेप कर इन स्वास्थ्य केंद्रों की मरम्मत सुनिश्चित करने और जनता को उचित स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने की मांग की है।







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