साँईजी की बेरी दरगाह पर कौमी एकता का पैग़ाम, 48वें उर्स के लिए पैदल ज़ायरीनों का आना शुरू
रूहानी सुकून और क़ौमी एकता (राष्ट्रीय एकता) का जश्न! जी हाँ, रानीवाड़ा में हर अक़ीदतमंद (श्रद्धालु) की मुराद पूरी करने वाले हज़रत हाजी क़ादर शाह बाबा साँईजी की बेरी दरगाह पर आज से 48वें सालाना उर्स-ए-मुबारक का आगाज़ होने जा रहा है। दरगाह का मंज़र (दृश्य) आज ही से नूरानी (प्रकाशमय) हो गया है, जहाँ दूर-दराज़ से पैदल ज़ायरीनों (तीर्थयात्रियों) की टोलियाँ बाबा की चौखट पर सजदा (प्रणाम) करने के लिए पहुँचना शुरू हो गई हैं।
🕌 बुलन्द दरवाज़े पर शान से लहराएगा परचम-ए-इनाम
48वें उर्स की तैयारियाँ मुकम्मल (पूरी हो चुकी हैं)। दरगाह कमेटी के सदर (अध्यक्ष), मिस्त्री आबाद खान ने बताया कि आज, बुधवार 29 अक्टूबर, को सुबह ठीक 11 बजे दरगाह के बुलन्द दरवाज़े पर परचम-ए-इनाम (ध्वजारोहण) की रस्म अदा की जाएगी। इस झंडे की रस्म के साथ ही आधिकारिक तौर पर उर्स की रौनक़ शुरू हो जाएगी।
- खास रस्म: डीसा के पीर-ए-तरीक़त सैयद मोहम्मद अली बावा और सैयद हसन अली बावा की सरपरस्ती में यह रस्म अदा होगी। इस मौक़े पर सदर आबाद खाँ, ख़ादिम सिद्दीक़ बख्श और कमेटी के मेम्बरान (सदस्यगण) मौजूद रहेंगे।
🤝 हर मजहब की मुराद पूरी करते हैं बाबा: क़ौमी एकता की मिसाल
ख़ादिम सिद्दीक़ भाई ने इस दरगाह की सबसे बड़ी ख़ासियत बताई। उनका कहना है, "हज़रत क़ादर शाह बाबा की दरगाह हमेशा से कौमी एकता की मिसाल रही है। यहाँ हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई... हर मज़हब और धर्म के लोग अपनी-अपनी मन्नतें लेकर आते हैं और बाबा सब की मनोकामना पूरी करते हैं।" दरगाह पर आम दिनों में भी अक़ीदतमंदों की भीड़ रहती है, ख़ासकर जुमेरात (गुरुवार) के दिन।
✨ कव्वाली की रात, जब गूँजेगा 'या क़ादर शाह' का नाम
उर्स का सबसे बड़ा आकर्षण कल यानी 30 अक्टूबर गुरुवार को होगा।
- सन्दल और क़ुरआनख़्वानी: जुहर (दोपहर) की नमाज़ के बाद क़ुरआनख़्वानी और सन्दल का शानदार कार्यक्रम रखा गया है।
- नूरी महफ़िल: रात में कव्वाली का विशाल कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इस रूहानी महफ़िल में देश के मशहूर कव्वाल, कमर अहमद वारसी (लखनऊ वाले), अपनी लाजवाब कव्वाली पेश कर समाँ (माहौल) बाँधेंगे।
- उनके अलावा, पगड़ी बंध कव्वाल मुराद एंड साबिर पार्टी (भीनमाल) भी बाबा की शान में कलाम पेश करेंगे।
व्यवस्थाएँ हुई माकूल, जायरिनों की हिफ़ाज़त पुख़्ता
दरगाह इन्तेज़ामिया (प्रशासन) कमेटी ने जायरीनों की सहूलियत (सुविधा) का ख़ास ख्याल रखा है। दरगाह में रंग-रोगन और साफ़-सफ़ाई का काम पूरा हो चुका है। कमेटी की ओर से तमाम ज़ायरीनों के लिए पानी, रोशनी और लंगर (भोजन) की माक़ूल (उचित) व्यवस्था की गई है। अकीदत की इस भीड़ में सुरक्षा बनाए रखने के लिए पुलिस प्रशासन की भी पुख़्ता हिफ़ाज़त (सुरक्षा) का इंतज़ाम किया गया है।
रानीवाड़ा की यह ज़मीन आज बाबा के नूर से जगमगा रही है। उम्मीद है, उर्स का यह पाक मौका सबको नेकी और मोहब्बत का पैग़ाम देगा।







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