किसानों की बर्बादी पर अपनों का ही ‘मौन’: जैसलमेर-भाभर रेलवे लाइन के लिए देवजी पटेल पहुंचे दिल्ली, तो सिरोही मास्टर प्लान की अनदेखी पर घिरे सांसद लुंबाराम और राज्य मंत्री ओटाराम
सांचौर/सिरोही।
राजस्थान के पश्चिमी क्षेत्र में प्रस्तावित ‘जैसलमेर-भाभर रेलवे लाइन’ परियोजना के एलाइनमेंट को लेकर किसानों की उपजाऊ जमीन बचाने की मुहिम तेज हो गई है। एक तरफ जहां पूर्व सांसद देवजी पटेल ने सांचौर क्षेत्र के किसानों के हितों की रक्षा के लिए सीधे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रेल मंत्री तक गुहार लगाई है, वहीं दूसरी तरफ सिरोही के मंडार बाईपास मामले में वर्तमान जनप्रतिनिधियों की रहस्यमयी चुप्पी ने किसानों के आक्रोश को भड़का दिया है। किसानों का आरोप है कि उनकी बेशकीमती कृषि भूमि को बर्बाद करने का यह खुला खेल राजनीतिक शह पर चल रहा है।

देवजी पटेल की पैरवी: ‘भारत-पाक सीमा के पास से निकले रेल लाइन’
पूर्व सांसद देवजी पटेल ने सांचौर के किसानों की आवाज उठाते हुए 28 मई 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र (क्रमांक: पी.एस/पूं.एम.पी/जालोर-सिरोही/2026/154) भेजा है। इस पत्र के जरिए पटेल ने मांग की है कि:
- रूट में बदलाव: रेलवे लाइन का एलाइनमेंट उपजाऊ कृषि भूमि के बजाय भारत-पाकिस्तान सीमा के पास से निकाला जाए, ताकि किसानों की उपजाऊ जमीनें नष्ट होने से बच सकें।
- बाजार मूल्य पर मुआवजा: यदि किसी परिस्थिति में किसानों की जमीन ली भी जाती है, तो उन्हें डीएलसी (DLC) दर के बजाय वास्तविक बाजार मूल्य पर उचित मुआवजा दिया जाए। कृषि भूमि जाने से किसानों को होने वाले भारी नुकसान की भरपाई जरूरी है।

दूसरी तरफ बड़ा अंतर्विरोध: मंडार बाईपास पर क्यों साधे हैं चुप्पी?
जहां पूर्व सांसद देवजी पटेल किसानों की जमीन के लिए मंत्रियों के चक्कर काट रहे हैं, वहीं सिरोही जिले के मंडार-सिरोही सड़क बाईपास मामले में वर्तमान सांसद लुंबाराम चौधरी और राज्य मंत्री ओटाराम देवासी की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
मास्टर प्लान 2031 की सरेआम अनदेखी
राज्य सरकार ने सिरोही का ‘मास्टर प्लान 2031’ पहले ही स्वीकृत कर रखा है, जिसके अनुरूप बाईपास को शहर से दूर से निकाला जाना था। इसके बावजूद, स्वीकृत मास्टर प्लान को ताक पर रखकर किसानों की लहलहाती खेती की जमीन के बीच से नया बाईपास निकालने की तैयारी है। इस सीधे अन्याय पर वर्तमान सांसद लुंबाराम चौधरी और राज्य मंत्री ओटाराम देवासी पूरी तरह मौन हैं और किसानों की कोई मदद नहीं कर रहे हैं।
PWD की रिपोर्ट में 50 करोड़ की बचत, फिर भी जिद क्यों?
लोक निर्माण विभाग (PWD) की एक रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि अगर सरकार मास्टर प्लान 2031 के अनुसार बाईपास बनाती है, तो उसकी लागत में 50 करोड़ रुपये की कमी आएगी। जनता के पैसे की बचत और किसानों की जमीन की सुरक्षा होने के बावजूद इस रिपोर्ट को दबाया जा रहा है।
किसानों का सवाल: आखिर माजरा क्या है?
प्रभावित किसानों का कहना है कि जब मास्टर प्लान के तहत बाईपास बनने से सरकार के 50 करोड़ रुपये बच रहे हैं और किसानों की जमीन भी सुरक्षित रह रही है, तो फिर किसानों को बर्बाद कर नया बाईपास बनाने का क्या तुक है?
अभी भी समय है कि सांसद लुंबाराम चौधरी को दलगत राजनीति से ऊपर उठकर किसानों के हित में केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी को पूरी हकीकत बतानी चाहिए। PWD की उस रिपोर्ट को गडकरी के सामने रखकर मास्टर प्लान के मुताबिक बाईपास बनाने की पैरवी मजबूती से करनी चाहिए। अगर अब भी जनप्रतिनिधियों ने अपनी चुप्पी नहीं तोड़ी, तो क्षेत्र का किसान इस खुले अन्याय के खिलाफ बड़ा आंदोलन करने को मजबूर होगा।



