ऑपरेशन त्रिशूल, भारतपोल और नए कानूनों का चला चाबुक; अमित शाह के ‘मिशन मोड’ ने बिगाड़ा इंटरनेशनल अपराधियों का खेल
नई दिल्ली। विदेश की धरती पर पहचान बदलकर और नाम बदलकर कानून की आंखों में धूल झोंकने वाले भगोड़ों के लिए अब दुनिया का कोई कोना सुरक्षित नहीं बचा है। केंद्र की मोदी सरकार के नेतृत्व और गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में भारत ने भगोड़े अपराधियों के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी और कड़क कार्रवाई को अंजाम दिया है। वर्ष 2019 से 2026 तक के आंकड़ों पर नजर डालें तो भारत की एजेंसियों ने 36 अलग-अलग देशों में दबिश देकर 274 खूंखार और शातिर अपराधियों को घसीटकर वापस देश की जेलों में ला खड़ा किया है।
पहले की सरकारों में जहां इच्छाशक्ति (पॉलीटिकल विल) की कमी के चलते फाइलें धूल फांकती थीं, वहीं मोदी सरकार ने भगोड़ों के प्रत्यर्पण को सीधी 'राष्ट्रीय प्राथमिकता' बना दिया है।
'भारतपोल' और 'ऑपरेशन त्रिशूल' से मिली सटीक लोकेशन
गृह मंत्रालय ने भगोड़ों को पकड़ने के लिए एकीकृत, इंटेलिजेंस-बेस्ड और आधुनिक तकनीक से लैस मॉडल तैयार किया है।
- भारतपोल (BHARTPOL): जनवरी 2025 में शुरू हुए इस पोर्टल ने 1,400 से अधिक एजेंसियों को सीधे इंटरपोल से जोड़ दिया। नतीजा यह हुआ कि जांच एजेंसियों के बीच सूचना साझा करने का समय जो हफ्तों का था, घटकर महज 3 से 10 दिन रह गया।
- ऑपरेशन त्रिशूल: विदेश में नाम-पहचान बदलकर छिपे अपराधियों को ट्रैक करने के लिए सैटेलाइट, डिजिटल फुटप्रिंट और सर्विलांस का सहारा लिया गया, जिसने भगोड़ों का हर ठिकाना बेनकाब कर दिया।
₹36,600 करोड़ से ज्यादा की चोट: खाली किए भगोड़ों के खजाने
आर्थिक अपराध करके विदेश भागने वाले धनकुबेरों पर 'मनी लॉन्ड्रिंग निरोधक कानून' (PMLA) का कड़ा डंडा चला है।
- संपत्ति जब्ती: 2019 से 2026 के बीच ₹17,874 करोड़ की संपत्ति जब्त की गई।
- सफल वापसी (Restitution): भगोड़ों से ₹18,762 करोड़ की सफल रिकवरी कर देश के खजाने में वापस लाए गए।
अनुपस्थिति में भी चलेगा केस, नए कानूनों ने कसी नकेल
साल 2024 में लागू नए आपराधिक कानूनों (BNSS) की धारा 355 और 356 के तहत 'ट्रायल इन एब्सेंशिया' (Trial in Absentia) का ऐतिहासिक प्रावधान किया गया है। इसका मतलब यह है कि अपराधी चाहे देश के बाहर छुपा बैठा हो, उसकी अनुपस्थिति में भी अदालत में केस चलेगा और सजा सुनाई जाएगी।
आंकड़े बोलते हैं: कौन-कौन चढ़े हत्थे?
वर्ष 2019 से 2026 (जुलाई तक) वापस लाए गए प्रमुख अपराधियों की सूची:
- हत्या, डकैती व हिंसक अपराध: 62
- यौन अपराध व पॉक्सो (POCSO): 53
- संगठित अपराध व गैंगस्टर: 42
- आतंकी व नार्को-टेरर गतिविधियां: 17
- मानव तस्करी व अन्य: 100
गृह मंत्रालय के अनुसार, तहव्वुर हुसैन राणा का अमेरिका से प्रत्यर्पण भारत के इसी धैर्य और स्मार्ट कूटनीति का सबसे बड़ा सबूत है। एजेंसियों का साफ संदेश है—कानून के हाथ लंबे हैं और अब देश की संप्रभुता से खिलवाड़ करने वालों का बच निकलना नामुमकिन है।







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