- मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा का विशेष संदेश सौंपकर किया जाएगा पूज्य संतों का सम्मान
- प्रशासन ने कसी कमर: एडीएम राजेंद्र सिंह चांदावत ने अधिकारियों को दिए समय पर पुख्ता व्यवस्थाएं जुटाने के निर्देश
- ऐतिहासिक सेवाडिया मठ का नाम नहीं | भक्तों में सरकार के प्रति नाराजगी | जन जन का है आस्था केंद्र
- क्या 12 अधिसूचित लिस्टेड मठ पर है देवस्थान विभाग की तीसरी नज़र ?
जालौर (विशेष संवाददाता)। भारतीय संस्कृति में ईश्वर से भी ऊँचा दर्जा पाने वाले गुरुजनों की महिमा के पर्व ‘गुरु पूर्णिमा’ (बुधवार, 29 जुलाई) को लेकर पूरे जालोर जिले में आस्था और उत्साह का माहौल है। इस पावन अवसर पर जिले के ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व रखने वाले 12 प्रमुख धार्मिक एवं समाधि स्थलों पर भव्य ‘गुरु वंदन’ कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा।
देवस्थान विभाग, राजस्थान सरकार के निर्देशों के तहत आयोजित होने वाले इन कार्यक्रमों में पधारने वाले पीठाधीशों, संत-महात्माओं और गुरुजनों का राज्य सरकार की ओर से माननीय मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा के संदेश पत्र के साथ भावभीना अभिनंदन और सम्मान किया जाएगा।
इन 12 सिद्ध एवं प्रसिद्ध मठ-मंदिरों में आयोजित होंगे कार्यक्रम
अतिरिक्त जिला कलक्टर (एडीएम) राजेंद्र सिंह चांदावत ने जानकारी देते हुए बताया कि जिले की विभिन्न तहसीलों और प्रसिद्ध आध्यात्मिक केंद्रों पर भव्य गुरु वंदन समारोह रखे गए हैं। इनमें निम्नलिखित प्रमुख स्थल शामिल हैं:
- सिरे मंदिर (भैरवनाथ जी अखाड़ा, जालोर): जालोर की ऐतिहासिक स्वर्णगिरि पहाड़ियों पर स्थित नाथ संप्रदाय की शीर्ष पीठ।
- ठाकुरजी मंदिर (ग्राम बावड़ी, आहोर)
- फूलमुक्तेश्वर महादेव मंदिर (होतीगांव, सांचौर)
- बड़गांव मठ
- बाबा रामदेव मठ (खारा)
- कंवला मठ (आहोर)
- श्री आत्मानंद समाधि / सरस्वती समाधि धाम
- पिप्लेश्वर मठ (भैंसवाड़ा)
- मादा भाखरी मठ (चरली)
- मठ गजीपुरा (भीनमाल)
- मठ पुनासा
- जिले का अन्य अधिसूचित देवस्थान केंद्र
प्रशासन मुस्तैद: तैयारियों को दिया जा रहा अंतिम रूप
कार्यक्रम के गरिमामय और सुव्यवस्थित संचालन को लेकर एडीएम चांदावत ने जिला एवं उपखंड स्तरीय अधिकारियों की बैठक लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
- सुरक्षा एवं पेयजल व्यवस्था: श्रद्धालुओं और आगंतुकों की संभावित भीड़ को देखते हुए मंदिरों के आसपास साफ-सफाई, शुद्ध पेयजल, रोशनी तथा सुरक्षा के कड़े इंतजाम करने के निर्देश दिए गए हैं।
- समयबद्ध संयोजन: सभी संबंधित उपखंड अधिकारियों (SDM) और देवस्थान विभाग के प्रतिनिधियों को निर्देशित किया गया है कि वे संतों के सम्मान समारोह की समय सारणी और व्यवस्थाओं का मौके पर जाकर निरीक्षण करें।
क्या है 'गुरु वंदन' पहल का उद्देश्य? (महत्व एवं जानकारी)
राजस्थान सरकार के देवस्थान विभाग द्वारा गुरु पूर्णिमा पर राज्यभर के प्रमुख मठों एवं मंदिरों में 'गुरु वंदन' कार्यक्रम आयोजित करने का मुख्य उद्देश्य सनातन परंपरा, गुरु-शिष्य परंपरा के संरक्षण और संतों के आशीर्वाद से समाज में नैतिक मूल्यों का प्रसार करना है।
गुरु पूर्णिमा का आध्यात्मिक महत्व: आषाढ़ माह की पूर्णिमा को महर्षि वेदव्यास जी का जन्मदिवस माना जाता है, जिन्होंने वेदों का विभाग किया और महाभारत ग्रंथ की रचना की। इस दिन भक्त अपने गुरुओं के चरणों में नतमस्तक होकर उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं और अपने जीवन के मार्गदर्शन के लिए कृतज्ञता व्यक्त करते हैं।







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