‘भारत की विश्व विरासत: राजस्थान’ प्रदर्शनी में दिखेगी किलों, किंवदंतियों और शौर्य की झलक; राष्ट्रीय अभिलेखागार ने पहली बार शुरू की देशव्यापी पोस्टर प्रतियोगिता
जोधपुर | 13 मार्च, 2026
सूर्य नगरी जोधपुर कल एक ऐतिहासिक सांस्कृतिक उत्सव का गवाह बनने जा रही है। राष्ट्रीय अभिलेखागार द्वारा 14 मार्च को जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय के केंद्रीय कार्यालय परिसर (बृहस्पति भवन) में ‘भारत की विश्व विरासत: राजस्थान’ शीर्षक से एक विशेष प्रदर्शनी का आयोजन किया जा रहा है। इसका उद्घाटन केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत शनिवार सुबह 10:00 बजे करेंगे।
प्रदर्शनी की खास बातें: शौर्य से लेकर खगोल तक का सफर
यह प्रदर्शनी केवल एक प्रदर्शन मात्र नहीं है, बल्कि राजस्थान के उस गौरवशाली इतिहास का उत्सव है जिसने मानवता की साझा विरासत में अमूल्य योगदान दिया है।
- ऐतिहासिक व्यक्तित्व: प्रदर्शनी में रानी पद्मिनी, मीराबाई, महाराणा प्रताप और राणा कुंभा जैसे महान नायक-नायिकाओं की अमर विरासत को जीवंत किया गया है।
- स्थापत्य वैभव: मेवाड़, मारवाड़, ढूंढाड़ और हाड़ौती की विशेष स्थापत्य शैली के साथ-साथ यूनेस्को की सूची में शामिल राजस्थान के 6 पर्वतीय दुर्गों (चित्तौड़गढ़, कुंभलगढ़, रणथंभौर, आमेर, जैसलमेर और गागरोन) को प्रदर्शित किया गया है।
- खगोलीय ज्ञान: जयपुर का जंतर-मंतर और गुलाबी नगरी की नियोजित शहरी व्यवस्था भी इस प्रदर्शनी का मुख्य आकर्षण है।
- मारवाड़ का विशेष उल्लेख: जोधपुर का मेहरानगढ़, जालोर किला और ओसियां के मंदिरों की भव्यता के माध्यम से इस क्षेत्र की समृद्ध वास्तुकला को उभारा गया है।
राष्ट्रीय अभिलेखागार (National Archives) का महत्व
राष्ट्रीय अभिलेखागार संस्कृति मंत्रालय के अधीन वह संस्थान है जो हमारे देश के ‘इतिहास की स्मृति’ को सहेज कर रखता है। इसके बारे में कुछ महत्वपूर्ण तथ्य जो विस्तार से जानना जरूरी है:
- स्थापना और विरासत: इसकी स्थापना 11 मार्च, 1891 को कोलकाता में हुई थी। 1911 में राजधानी दिल्ली शिफ्ट होने के बाद 1926 में प्रसिद्ध वास्तुकार सर एडविन लुटियंस ने इसकी वर्तमान इमारत का डिजाइन तैयार किया था।
- दस्तावेजों का विशाल खजाना: यहाँ 34 करोड़ से अधिक पृष्ठों का संग्रह है, जिसमें प्राचीन फाइलें, मानचित्र, संधियाँ, दुर्लभ पांडुलिपियाँ और राष्ट्रपतियों द्वारा अनुमोदित विधेयक सुरक्षित हैं।
- कानूनी नोडल एजेंसी: यह संस्थान ‘सार्वजनिक अभिलेख अधिनियम 1993’ के क्रियान्वयन के लिए मुख्य एजेंसी है, जो देश के महत्वपूर्ण सरकारी रिकॉर्ड्स का प्रबंधन करती है।
आम जनता और युवाओं को क्या होगा फायदा?
- छात्रों के लिए अवसर: राष्ट्रीय अभिलेखागार ने पहली बार देशव्यापी पोस्टर प्रस्तुति का आयोजन किया है। इससे शोधार्थियों और कॉलेज के छात्रों को अपनी सृजनात्मक अभिव्यक्ति दिखाने का मंच मिला है।
- सांस्कृतिक चेतना: आम जनता को एक ही स्थान पर राजस्थान की उन धरोहरों को करीब से देखने और समझने का मौका मिलेगा, जिन्हें हम अक्सर किताबों में पढ़ते हैं।
- इतिहास से जुड़ाव: दुर्लभ पांडुलिपियों और ऐतिहासिक दस्तावेजों की जानकारी मिलने से स्थानीय लोगों और पर्यटकों में राजस्थान की संस्कृति के प्रति गर्व की भावना बढ़ेगी।
- शैक्षणिक लाभ: शोधार्थियों के लिए यह समझना आसान होगा कि कैसे सरकारी अभिलेख इतिहास लेखन में सहायक होते हैं।
जोधपुर में आयोजित होने वाली यह प्रदर्शनी राजस्थान की वीर प्रसूता भूमि के उन अनछुए पहलुओं को सामने लाएगी, जो अब तक अभिलेखागार की फाइलों में कैद थे। यह आयोजन न केवल पर्यटन को बढ़ावा देगा, बल्कि भावी पीढ़ी को अपनी जड़ों से भी जोड़ेगा।
सर्कल न्यूज़ नेटवर्क के लिए जोधपुर से गुमान सिंह राव की रिपोर्ट।



